{"_id":"631f9404e112567d4e384fc4","slug":"we-would-not-have-been-so-devoted-in-love-we-would-not-have-been-known-in-the-world-by-your-name-hathras-news-ali300236516","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्यार में हम इतने समर्पित न होते, दुनिया में तेरे नाम से चर्चित न होते...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्यार में हम इतने समर्पित न होते, दुनिया में तेरे नाम से चर्चित न होते...
विज्ञापन
कवियत्री सम्मेलन का फीता काटकर शुभारंभ करते रेलवे बोर्ड की यात्री सेवा समिति के अध्यक्ष रमेश चन?
- फोटो : HATHRAS
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
यदि प्यार में हम इतने समर्पित नहीं होते, दुनिया में तेरे नाम से चर्चित नहीं होते... मोनिका दहलवी की इस रचना पर दाऊजी मेला परिसर तालियों से गूंज उठा। वे रविवार की रात अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन में प्रस्तुति दे रहीं थीं। सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि रेलवे बोर्ड की यात्री सेवा समिति के चेयरमैन रमेश चंद्र रत्न ने किया।
भूमिका जैन भूमि ने काव्य पाठ करते यह रचना प्रस्तुत कि आंसू साथ नहीं देंगे न खुलकर वो रो पाएंगे, कभी किसी के अंतरस में विश्वास नहीं वो पाएंगे। पूनम मिश्रा ने यह रचना सुनाई रात दो नयन झिलमिलाते रहे, प्रीत की वेदना को सुनाते रहे। सीमा मौर्य ने मोहब्बत हो जाती है, मुहब्बत कौन करता है, बताओ इश्क में मरना किसे अच्छा लगता है, यो जो दिल की बेमानी जो आहें रोज भरता है सुनाई।
पराजिता सिंह श्रेया ने सैनिक पापा की बेटी हूं, जोश हृदय में भरती हूं, अपने दिल के टुकड़ों को भी वार दिया भारत मां पर, ऐसे गुरुगोविंद सिंह का मैं अभिनंदन करती हूं सुनाकर सबको झकझोर दिया। इसके अलावा मनु दीक्षित, हेमा पांडेय, उन्नति भारद्वाज, डॉ अनीता रस्तोगी आदि ने काव्य पाठ किया। सम्मेलन का संचालन डॉ. नितिन मिश्रा व सतीश मधुप ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
यदि प्यार में हम इतने समर्पित नहीं होते, दुनिया में तेरे नाम से चर्चित नहीं होते... मोनिका दहलवी की इस रचना पर दाऊजी मेला परिसर तालियों से गूंज उठा। वे रविवार की रात अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन में प्रस्तुति दे रहीं थीं। सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि रेलवे बोर्ड की यात्री सेवा समिति के चेयरमैन रमेश चंद्र रत्न ने किया।
भूमिका जैन भूमि ने काव्य पाठ करते यह रचना प्रस्तुत कि आंसू साथ नहीं देंगे न खुलकर वो रो पाएंगे, कभी किसी के अंतरस में विश्वास नहीं वो पाएंगे। पूनम मिश्रा ने यह रचना सुनाई रात दो नयन झिलमिलाते रहे, प्रीत की वेदना को सुनाते रहे। सीमा मौर्य ने मोहब्बत हो जाती है, मुहब्बत कौन करता है, बताओ इश्क में मरना किसे अच्छा लगता है, यो जो दिल की बेमानी जो आहें रोज भरता है सुनाई।
विज्ञापन
पराजिता सिंह श्रेया ने सैनिक पापा की बेटी हूं, जोश हृदय में भरती हूं, अपने दिल के टुकड़ों को भी वार दिया भारत मां पर, ऐसे गुरुगोविंद सिंह का मैं अभिनंदन करती हूं सुनाकर सबको झकझोर दिया। इसके अलावा मनु दीक्षित, हेमा पांडेय, उन्नति भारद्वाज, डॉ अनीता रस्तोगी आदि ने काव्य पाठ किया। सम्मेलन का संचालन डॉ. नितिन मिश्रा व सतीश मधुप ने किया।
विज्ञापन