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Hathras News: दंगे में मारे गए युवक की हत्या में व्यापारी नेता सहित दो बरी

Sun, 28 May 2023 12:47 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 28 May 2023 12:47 AM IST
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Two acquitted including businessman leader in murder of youth killed in riots
वर्ष 2006 में पुराने शहर में हुए सांप्रदायिक दंगे में जान गंवाने वाले युवक नवेद की हत्या के मुकदमे में व्यापारी नेता हरिकिशन अग्रवाल सहित दो आरोपी बरी कर दिए गए। अदालत ने यह फैसला गवाहों के अभियोजन की कहानी साबित नहीं कर पाने और एक गवाह के पक्षद्रोही होने पर सुनाया है।
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इस मामले में बचाव पक्ष से पैरवी कर रहे अधिवक्ता दीपक पाठक ने बताया कि घटना 6 अप्रैल 2006 की दोपहर की है। रोरावर शाहजमाल की बुंदो देवी ने कोतवाली में 8 अप्रैल को मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के अनुसार उनका बेटा नवेद ऊपरकोट पर कपड़े की ढकेल लगाता था। घटना के समय वह फर्श के रास्ते घर आ रहा था। तभी वहां हंगामा होते देख रुक गया और उसकी बीनू चाय वाले व हरिकिशन अग्रवाल ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।
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उसे मेडिकल कॉलेज में मृत घोषित किया गया और 7 अप्रैल को दफन करने के बाद वह मुकदमा दर्ज कराने थाने पहुंचीं। जहां उन्होंने अपने परिचित अच्छे मियां से बुलवाकर तहरीर लिखवाकर दी। पुलिस ने चार्जशीट दायर कर दी। न्यायालय में सत्र परीक्षण के दौरान गवाह अभियोजन की कहानी को साबित न कर सके। पहले गवाह के रूप में वादिया ने बताया कि वह घर पर थी। उसे मोहल्ले के ही शकील ने आकर बताया कि उसके बेटे की दोनों आरोपियों ने हत्या कर दी है।
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अच्छे मियां ने बताया कि जो वादिया ने बोला, वही उसने तहरीर लिखी। इसी तरह शकील ने गवाही दी कि घटना के समय सब्जी मंडी चौराहे पर भगदड़ मच रही थी। पुलिस आगे नहीं जाने दे रही थी। इसी दौरान उसने देखा कि नवेद को किसी ने गोली मारी है। मगर वह उन्हें पहचानता नहीं है। इस आधार पर शकील को पक्षद्रोही करार देते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया है।







सीबीसीआईडी से हुई थी दंगे की हत्याओं की जांच

2006 के दंगे में इस घटना के दिन कनवरीगंज फर्श पर चार मौत हुई थीं। इसके अलावा सिलसिलेवार कई हत्याएं हुई थीं और शहर में एतिहासिक सौ दिन तक कफ्र्यू रहा था। इस मामले में शासन स्तर से एक जांच समिति गठित की गई थी। खुद तत्कालीन राज्यपाल दंगाग्रस्त इलाकों का दौरा करने आए थे। शासन स्तर से गठित जांच समिति की संस्तुति पर हत्याओं के मुकदमे की विवेचना सीबीसीआईडी को 2008 में सौंपी थी। इस मुकदमे की विवेचना सीबीसीआईडी आगरा के इंस्पेक्टर/सेवानिवृत्त डीएसपी सुखरामपाल तोमर ने की थी।
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