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आज से महंगे होंगे जमीन के सौदे
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Mon, 01 Aug 2016 12:06 AM IST
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जिले में जमीनों के बढ़े हुए सर्किल रेट लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। सोमवार से नए सर्किल रेट लागू हो जाएंगे। बढ़ोतरी के खिलाफ हालांकि दस्तावेज लेखकों और प्रॉपर्टी कारोबारियों ने मोर्चा भी खेाला था, लेकिन उनका विरोध ज्यादा कारगर नहीं रहा।
दस्तावेज लेखकों को तो स्टांप विभाग के अधिकारियों ने समझा-बुझा लिया, जबकि रीयल एस्टेट कारोबारी और कॉलोनाइजर खुद ही शांत बैठ गए। हालांकि वह मानते हैं कि पहले से ही मंदी की मार से जूझ रहे जमीन-जायदाद के कारोबार को इस बढ़ोतरी से तगड़ा झटका लगेगा।
दरअसल, जिला प्रशासन ने प्रस्तावित सर्किल रेट की सूची पिछले महीने जारी की थी। इस पर आपत्तियां भी मांगी गई थीं। दस्तावेज लेखक, वकील, कॉलोनाइजर और प्रॉपर्टी के कारोबारियों ने रेट में बढ़ोतरी का विरोध किया था। उनका कहना था कि एक तो प्रॉपर्टी बाजार वैसे ही मंदी की मार से जूझ रहा है।
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वर्तमान में उसे प्रोत्साहित करने के लिए रियायतों की दरकार है, न कि सर्किल रेट का बोझ बढ़ाने की जरूरत है। जिले की चारों ही तहसीलों के वकील और कातिबों ने इस बढ़ोतरी का विरोध किया था। उनकी दलील थी कि पिछले एक साल में रीयल एस्टेट बाजार में जो मंदी आई है, उससे जिले के शायद ही किसी क्षेत्र में जमीन की उपयोगिता या खरीद-फरोख्त बढ़ी है। जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त का कारोबार एकदम ठहर गया है। ऐसे में रेट में बढ़ोतरी होने से इसमें और ठहराव आ सकता है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट कह दिया कि रेट में बढ़ोतरी नियमानुसार ही की गई है, जोकि राजस्व हित में ज
रूरी भी है। इसके विरोध में दस्तावेज लेखकों ने कलमबंद हड़ताल का ऐलान भी किया, लेकिन उसकी भी हवा निकल गई। सबकुछ ठीक रहा तो सोमवार से नई रेट लिस्ट अस्तित्व में आ जाएगी।
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दस्तावेज लेखकों को तो स्टांप विभाग के अधिकारियों ने समझा-बुझा लिया, जबकि रीयल एस्टेट कारोबारी और कॉलोनाइजर खुद ही शांत बैठ गए। हालांकि वह मानते हैं कि पहले से ही मंदी की मार से जूझ रहे जमीन-जायदाद के कारोबार को इस बढ़ोतरी से तगड़ा झटका लगेगा।
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दरअसल, जिला प्रशासन ने प्रस्तावित सर्किल रेट की सूची पिछले महीने जारी की थी। इस पर आपत्तियां भी मांगी गई थीं। दस्तावेज लेखक, वकील, कॉलोनाइजर और प्रॉपर्टी के कारोबारियों ने रेट में बढ़ोतरी का विरोध किया था। उनका कहना था कि एक तो प्रॉपर्टी बाजार वैसे ही मंदी की मार से जूझ रहा है।
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वर्तमान में उसे प्रोत्साहित करने के लिए रियायतों की दरकार है, न कि सर्किल रेट का बोझ बढ़ाने की जरूरत है। जिले की चारों ही तहसीलों के वकील और कातिबों ने इस बढ़ोतरी का विरोध किया था। उनकी दलील थी कि पिछले एक साल में रीयल एस्टेट बाजार में जो मंदी आई है, उससे जिले के शायद ही किसी क्षेत्र में जमीन की उपयोगिता या खरीद-फरोख्त बढ़ी है। जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त का कारोबार एकदम ठहर गया है। ऐसे में रेट में बढ़ोतरी होने से इसमें और ठहराव आ सकता है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट कह दिया कि रेट में बढ़ोतरी नियमानुसार ही की गई है, जोकि राजस्व हित में ज
रूरी भी है। इसके विरोध में दस्तावेज लेखकों ने कलमबंद हड़ताल का ऐलान भी किया, लेकिन उसकी भी हवा निकल गई। सबकुछ ठीक रहा तो सोमवार से नई रेट लिस्ट अस्तित्व में आ जाएगी।