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पराग प्लांट चालू होने में लगेगा लंबा वक्त
ब्यूराे/अमर उजाला,हाथरस
Updated Tue, 19 Apr 2016 12:22 AM IST
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पराग प्लांट
- फोटो : amar ujala
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हाथरस। सासनी में बीते एक दशक से बंद पड़े पराग डेयरी प्लांट से श्वेत क्रांति की वापसी का सपना संजोए बैठे जिलेवासियों को इसके चालू होने के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा। बेशक शासन ने प्लांट को चालू कराने के लिए साढ़े छह करोड़ का बजट जारी कर दिया है, लेकिन इसका इस्तेमाल तब तक नहीं हो सकेगा, जब तक शासन से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मंजूर होकर नहीं आ जाती।
अलीगढ़ दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के प्रबंधन ने प्लांट में होने वाले कामों का सर्वे कराने के बाद डीपीआर शासन को भेज दी है। इसकी मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और फिर काम शुरू होगा। अधिकारियों की मानें तो शासन ने प्रदेश के सभी दुग्ध प्लांटों को तीन फेजों में बांटा है। पहले फेज में वीआईपी जिलों के प्लांट शामिल किए गए हैं।
सासनी प्लांट का नंबर दूसरे या तीसरे फेज में ही आ पाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में एक से डेढ़ साल का वक्त लग सकता है। तब तक प्लांट के लिए मंजूर हुआ पैसा प्लांट प्रबंधन के पास ही रहेगा।
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आईडीएमसी को दी जिम्मेदारी
प्रबंधन ने जो डीपीआर शासन को भेजी है, उसमें स्पष्ट है कि प्लांट में सिविल वर्क यानि निर्माण का कोई काम नहीं होना है। केवल खराब मशीनरी का ही कायाकल्प किया जाएगा। इस काम का जिम्मा शासन ने इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी (आईडीएमसी) को सौंपा है। शासन से निर्देश मिलते ही कंपनी अपना काम शुरू कर देगी।
सबसे बड़ा घी प्लांट खटाई में
सासनी में प्रदेश सरकार की सूबे का सबसे बड़ा घी प्लांट बनाने की योजना भी खटाई में पड़ती दिख रही है। फिलहाल शासन का जोर किसी तरह इस प्लांट को चालू कराने पर है। उसके बाद यह तय किया जाएगा कि इसे सबसे बड़ा घी प्लांट बनाने की दिशा में क्या काम किया जा सकता है।
उधारी चुकाने की भी होगी चुनौती
प्रबंधन के सामने प्लांट को चालू कराने से पहले सबसे बड़ी चुनौती इसकी देनदारियां चुकता करने की है। पिछले साल तक प्लांट पर करीब 12 करोड़ की उधारी थी। पहली किश्त में जो करीब पांच करोड़ रुपया प्रबंधन को मिला, उससे पशुपालकों की उधारी, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और मदर डेयरी की उधारी, बिजली का बिल समेत कई उधारियां चुका दी गईं। अब ट्रांसपोर्टरों का बकाया, कर्मचारियों का वेतन समेत कुछ उधारी रह गई हैं, जिन्हें प्रबंधन किश्तों में मिलने वाली धनराशि से चुकाता रहेगा।
सिर्फ प्लांट पर खर्च होंगे 6.50 करोड़
दूसरी किश्त में शासन ने साढ़े छह करोड़ की ग्रांट प्रबंधन को दी है। इस पैसे को सिर्फ प्लांट को चालू कराने पर ही खर्च किया जाएगा। इससे कोई उधारी नहीं चुकाई जाएगी। यह पैसा तब तक इस्तेमाल नहीं हो सकता, जब तक शासन से डीपीआर मंजूर होकर नहीं आ जाती।
तगादे से बचने को अलीगढ़ में कार्यक्रम
जिस तरह सासनी प्लांट को दोबारा चालू कराने के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम अलीगढ़ में किया गया, उससे प्लांट के लेनदार ही नहीं, खुद प्रबंधन भी हैरान है। माना जा रहा है कि तगादे से बचने के लिए यह कार्यक्रम अलीगढ़ में कराया गया। प्रशासन को डर था कि यहां प्रदेश सरकार के मंत्री को उन लोगों का विरोध झेलना पड़ सकता है, जिनका प्लांट पर उधार चल रहा है।
कर्मियों की संख्या में कटौती के आसार
बेशक 12 साल से बेरोजगार चल रहे कर्मचारियों को भी प्लांट चालू होने की तैयारियों से उम्मीद की किरण दिखी है, लेकिन सरकार उन्हें झटका देने जा रही है। चर्चा यह भी है कि प्लांट चालू होने पर कर्मियों की संख्या में भी कटौती की जा सकती है। कर्मियों को इसकी भनक लग गई है। तभी तो वह पिछले दिनों यहां आए प्रदेश के दुग्ध विकास मंत्री राममूर्ति वर्मा से अपना दुखड़ा रोने पहुंच गए थे, लेकिन मंत्री ने भी उन्हें यह कहकर निराश कर दिया था कि जितनी जरूरत होगी, उतने ही कर्मी रखे जाएंगे।
पराग पर उधारी एक नजर में
-12 करोड़ कुल उधारी थी पराग के प्लांट पर
-05 करोड़ की उधारी अब तक दी जा चुकी है
-01 करोड़ मदर डेयरी का था उधार
-80 लाख रुपये ट्रांसपोर्टरों की थी उधारी
-14 लाख रुपये बिजली बिल के थे बकाया
-3.50 करोड़ रुपये कर्मियों के वेतन का बकाया
-1.80 करोड़ रुपया पशु पालकों का था बकाया
अभी प्लांट की मरम्मत के लिए डीपीआर बनाकर भेजी गई है। इसकी मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया होगी, फिर मशीनरी की मरम्मत का काम शुरू कराया जाएगा। इस काम में थोड़ा वक्त लग सकता है।
अमरनाथ वर्मा, महाप्रबंधक पराग अलीगढ़
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अलीगढ़ दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के प्रबंधन ने प्लांट में होने वाले कामों का सर्वे कराने के बाद डीपीआर शासन को भेज दी है। इसकी मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी और फिर काम शुरू होगा। अधिकारियों की मानें तो शासन ने प्रदेश के सभी दुग्ध प्लांटों को तीन फेजों में बांटा है। पहले फेज में वीआईपी जिलों के प्लांट शामिल किए गए हैं।
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सासनी प्लांट का नंबर दूसरे या तीसरे फेज में ही आ पाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में एक से डेढ़ साल का वक्त लग सकता है। तब तक प्लांट के लिए मंजूर हुआ पैसा प्लांट प्रबंधन के पास ही रहेगा।
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आईडीएमसी को दी जिम्मेदारी
प्रबंधन ने जो डीपीआर शासन को भेजी है, उसमें स्पष्ट है कि प्लांट में सिविल वर्क यानि निर्माण का कोई काम नहीं होना है। केवल खराब मशीनरी का ही कायाकल्प किया जाएगा। इस काम का जिम्मा शासन ने इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी (आईडीएमसी) को सौंपा है। शासन से निर्देश मिलते ही कंपनी अपना काम शुरू कर देगी।
सबसे बड़ा घी प्लांट खटाई में
सासनी में प्रदेश सरकार की सूबे का सबसे बड़ा घी प्लांट बनाने की योजना भी खटाई में पड़ती दिख रही है। फिलहाल शासन का जोर किसी तरह इस प्लांट को चालू कराने पर है। उसके बाद यह तय किया जाएगा कि इसे सबसे बड़ा घी प्लांट बनाने की दिशा में क्या काम किया जा सकता है।
उधारी चुकाने की भी होगी चुनौती
प्रबंधन के सामने प्लांट को चालू कराने से पहले सबसे बड़ी चुनौती इसकी देनदारियां चुकता करने की है। पिछले साल तक प्लांट पर करीब 12 करोड़ की उधारी थी। पहली किश्त में जो करीब पांच करोड़ रुपया प्रबंधन को मिला, उससे पशुपालकों की उधारी, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और मदर डेयरी की उधारी, बिजली का बिल समेत कई उधारियां चुका दी गईं। अब ट्रांसपोर्टरों का बकाया, कर्मचारियों का वेतन समेत कुछ उधारी रह गई हैं, जिन्हें प्रबंधन किश्तों में मिलने वाली धनराशि से चुकाता रहेगा।
सिर्फ प्लांट पर खर्च होंगे 6.50 करोड़
दूसरी किश्त में शासन ने साढ़े छह करोड़ की ग्रांट प्रबंधन को दी है। इस पैसे को सिर्फ प्लांट को चालू कराने पर ही खर्च किया जाएगा। इससे कोई उधारी नहीं चुकाई जाएगी। यह पैसा तब तक इस्तेमाल नहीं हो सकता, जब तक शासन से डीपीआर मंजूर होकर नहीं आ जाती।
तगादे से बचने को अलीगढ़ में कार्यक्रम
जिस तरह सासनी प्लांट को दोबारा चालू कराने के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम अलीगढ़ में किया गया, उससे प्लांट के लेनदार ही नहीं, खुद प्रबंधन भी हैरान है। माना जा रहा है कि तगादे से बचने के लिए यह कार्यक्रम अलीगढ़ में कराया गया। प्रशासन को डर था कि यहां प्रदेश सरकार के मंत्री को उन लोगों का विरोध झेलना पड़ सकता है, जिनका प्लांट पर उधार चल रहा है।
कर्मियों की संख्या में कटौती के आसार
बेशक 12 साल से बेरोजगार चल रहे कर्मचारियों को भी प्लांट चालू होने की तैयारियों से उम्मीद की किरण दिखी है, लेकिन सरकार उन्हें झटका देने जा रही है। चर्चा यह भी है कि प्लांट चालू होने पर कर्मियों की संख्या में भी कटौती की जा सकती है। कर्मियों को इसकी भनक लग गई है। तभी तो वह पिछले दिनों यहां आए प्रदेश के दुग्ध विकास मंत्री राममूर्ति वर्मा से अपना दुखड़ा रोने पहुंच गए थे, लेकिन मंत्री ने भी उन्हें यह कहकर निराश कर दिया था कि जितनी जरूरत होगी, उतने ही कर्मी रखे जाएंगे।
पराग पर उधारी एक नजर में
-12 करोड़ कुल उधारी थी पराग के प्लांट पर
-05 करोड़ की उधारी अब तक दी जा चुकी है
-01 करोड़ मदर डेयरी का था उधार
-80 लाख रुपये ट्रांसपोर्टरों की थी उधारी
-14 लाख रुपये बिजली बिल के थे बकाया
-3.50 करोड़ रुपये कर्मियों के वेतन का बकाया
-1.80 करोड़ रुपया पशु पालकों का था बकाया
अभी प्लांट की मरम्मत के लिए डीपीआर बनाकर भेजी गई है। इसकी मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया होगी, फिर मशीनरी की मरम्मत का काम शुरू कराया जाएगा। इस काम में थोड़ा वक्त लग सकता है।
अमरनाथ वर्मा, महाप्रबंधक पराग अलीगढ़