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Hathras: काका हाथरसी और राजा महेंद्र प्रताप के जिले पर आज ही के दिन लगा था बदनुमा दाग
Wed, 14 Sep 2022 01:15 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Sep 2022 01:15 AM IST
सार
हाथरस जिले का यह पहला ऐसा मामला था, जिसकी सीबीआई ने विवेचना की। घटना के बाद से ही चारों अभियुक्त अलीगढ़ जेल में निरुद्ध हैं। सीबीआई इन चारों अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है।
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वह खेत, जहां बिटिया के साथ वारदात हुई थी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
काका हाथरसी और राजा महेंद्र प्रताप जैसी शख्सियत को जन्म देने वाले हाथरस जिले के इतिहास में आज से ठीक दो साल पहले एक काला अध्याय जुड़ा था। इस घटना ने हाथरस जिले पर बदनामी का ठप्पा लगा दिया। दो साल पहले आज ही के दिन अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ दरिंदगी हुई थी। कुछ दिन बाद युवती की दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई थी। मामले ने इतना तूल पकड़ा था देश-विदेश की मीडिया में छा गया
घटना को दो साल हो गए हैं लेकिन मामला अभी तक सुर्खियों में है। हाथरस जिले का यह पहला ऐसा मामला था, जिसकी सीबीआई ने विवेचना की। घटना के बाद से ही चारों अभियुक्त अलीगढ़ जेल में निरुद्ध हैं। सीबीआई इन चारों अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। विशेष न्यायालय (एससी-एसटी एक्ट) में सुनवाई जारी है। सभी को फैसले का इंतजार है। इस पूरे मामले में 104 गवाह हैं, इसमें से 34 की गवाही हो चुकी है। विवेचक व सीबीआई की एएसपी सीमा पाहुजा की गवाही चल रही है। इंसाफ के लिए जंग अभी जारी है।
उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर 2020 को कोतवाली चंदपा क्षेत्र के एक गांव में अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ खेत पर गांव के ही कुछ युवकों ने दरिंदगी की थी। इस घटना के बाद इस युवती को गंभीर हालत में अलीगढ़ ले जाया गया था। वहां से 28 सितंबर को उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया था। सफदरजंग अस्पताल में 29 सितंबर को युवती ने दम तोड़ दिया था। उसकी मौत से पहले पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर चारों युवकों को गिरफ्तार कर लिया था।
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देश-विदेश तक यह कांड सुर्खियों में रहा था। पूरे विपक्ष ने योगी सरकार को निशाने पर ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बिटिया के परिजनों को सीआरपीएफ की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। साथ ही मामले की विवेचना सीबीआई ने की थी।
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घटना को दो साल हो गए हैं लेकिन मामला अभी तक सुर्खियों में है। हाथरस जिले का यह पहला ऐसा मामला था, जिसकी सीबीआई ने विवेचना की। घटना के बाद से ही चारों अभियुक्त अलीगढ़ जेल में निरुद्ध हैं। सीबीआई इन चारों अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। विशेष न्यायालय (एससी-एसटी एक्ट) में सुनवाई जारी है। सभी को फैसले का इंतजार है। इस पूरे मामले में 104 गवाह हैं, इसमें से 34 की गवाही हो चुकी है। विवेचक व सीबीआई की एएसपी सीमा पाहुजा की गवाही चल रही है। इंसाफ के लिए जंग अभी जारी है।
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उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर 2020 को कोतवाली चंदपा क्षेत्र के एक गांव में अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ खेत पर गांव के ही कुछ युवकों ने दरिंदगी की थी। इस घटना के बाद इस युवती को गंभीर हालत में अलीगढ़ ले जाया गया था। वहां से 28 सितंबर को उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेजा गया था। सफदरजंग अस्पताल में 29 सितंबर को युवती ने दम तोड़ दिया था। उसकी मौत से पहले पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर चारों युवकों को गिरफ्तार कर लिया था।
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देश-विदेश तक यह कांड सुर्खियों में रहा था। पूरे विपक्ष ने योगी सरकार को निशाने पर ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बिटिया के परिजनों को सीआरपीएफ की सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। साथ ही मामले की विवेचना सीबीआई ने की थी।
सीबीआई ने 67 दिन की जांच के बाद चारों अभियुक्तों संदीप, रामू, रवि व लवकुश के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया था। यह आरोप पत्र विशेष न्यायालय (एससी-एसटी एक्ट) में दाखिल किया गया था। अभी कोर्ट में यह केस ट्रायल पर है। बिटिया के घर पर सीआरपीएफ का पहरा है। पीड़ित पक्ष हो या अभियुक्त पक्ष, सभी को फैसले का इंतजार है।
मध्य रात्रि में ही प्रशासन ने जबरन कर दिया था शव का अंतिम संस्कार
इस कांड ने सबसे ज्यादा उस समय तूल पकड़ा था, जब बिटिया की मौत के बाद उसके शव का प्रशासन ने परिजनों की इच्छा के विरुद्ध मध्य रात्रि में ही अंतिम संस्कार कर दिया था। पुलिस ने बिटिया के परिजनों व अन्य लोगों पर बल प्रयोग भी किया था। इसे लेकर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी और प्रशासन की इस कार्रवाई चौतरफा विरोध हुआ था। इससे बाद न्यायपालिका में भी यह मामला गूंजा था।
राहुल, प्रियंका सहित कई राजनेता आए थे गांव
इस मुद्दे को लेकर जमकर सियासत भी हुई थी। बिटिया के परिजनों के आंसू पोंछने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी आए थे। परिवार को आर्थिक सहायता दी थी। इससे अलावा रालोद के जयंत चौधरी, आप के संजय सिंह, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, कम्युनिस्ट पार्टी के डी.राजा, सीताराम येचुरी सहित तमाम विपक्षी दलो के नेता आए थे। जयंत चौधरी जैसे कई राजनेताओं पर तो लाठीचार्ज भी हुआ था। इधर, अभियुक्त पक्ष की ओर से सवर्ण वर्ग भी एक जुट होने लगा था और करणी सेना सहित कई संगठन लामबंद हुए थे।
जातीय उन्माद फैलाने की हुई थी कोशिश, लिखे गए थे मुकदमे
इस प्रकरण में दलित बनाम सवर्ण जातीय उन्माद फैलाने की साजिश रचे जाने की बात भी सामने आई थी। इसी आधार पर कोतवाली चंदपा में मुकदमा कायम हुआ था। इसमें राष्ट्रद्रोह का आरोप भी था। इसे लेकर मथुरा में पीएफआई और सीएफआई के चार सदस्य पकड़े गए थे। इन पर इस कांड की आड़ में जातीय हिंसा फैलाने की साजिश रचने का आरोप था। कांग्रेस के नेता श्योराज जीवन के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ था।
मध्य रात्रि में ही प्रशासन ने जबरन कर दिया था शव का अंतिम संस्कार
इस कांड ने सबसे ज्यादा उस समय तूल पकड़ा था, जब बिटिया की मौत के बाद उसके शव का प्रशासन ने परिजनों की इच्छा के विरुद्ध मध्य रात्रि में ही अंतिम संस्कार कर दिया था। पुलिस ने बिटिया के परिजनों व अन्य लोगों पर बल प्रयोग भी किया था। इसे लेकर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी और प्रशासन की इस कार्रवाई चौतरफा विरोध हुआ था। इससे बाद न्यायपालिका में भी यह मामला गूंजा था।
राहुल, प्रियंका सहित कई राजनेता आए थे गांव
इस मुद्दे को लेकर जमकर सियासत भी हुई थी। बिटिया के परिजनों के आंसू पोंछने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी आए थे। परिवार को आर्थिक सहायता दी थी। इससे अलावा रालोद के जयंत चौधरी, आप के संजय सिंह, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, कम्युनिस्ट पार्टी के डी.राजा, सीताराम येचुरी सहित तमाम विपक्षी दलो के नेता आए थे। जयंत चौधरी जैसे कई राजनेताओं पर तो लाठीचार्ज भी हुआ था। इधर, अभियुक्त पक्ष की ओर से सवर्ण वर्ग भी एक जुट होने लगा था और करणी सेना सहित कई संगठन लामबंद हुए थे।
जातीय उन्माद फैलाने की हुई थी कोशिश, लिखे गए थे मुकदमे
इस प्रकरण में दलित बनाम सवर्ण जातीय उन्माद फैलाने की साजिश रचे जाने की बात भी सामने आई थी। इसी आधार पर कोतवाली चंदपा में मुकदमा कायम हुआ था। इसमें राष्ट्रद्रोह का आरोप भी था। इसे लेकर मथुरा में पीएफआई और सीएफआई के चार सदस्य पकड़े गए थे। इन पर इस कांड की आड़ में जातीय हिंसा फैलाने की साजिश रचने का आरोप था। कांग्रेस के नेता श्योराज जीवन के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ था।
तत्कालीन एसपी सहित पांच पर गिरी थी गाज
इस घटना के बाद तत्कालीन एसपी, सीओ सहित पांच पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी थी। घटना के बाद शासन ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने अपनी जांच में तत्कालीन एसपी विक्रांतवीर, सीओ सिटी रामशब्द यादव, तत्कालीन कोतवाली निरीक्षक चंदपा डीके वर्मा सहित पांच पुलिसकर्मियों को दोषी माना था। इन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि कुछ महीने बाद इनका निलंबन समाप्त हो गया था।
बहुचर्चित बिटिया कांड में यह है घटनाक्रम
- 14 सितंबर 2020 : चंदपा क्षेत्र के एक गांव में अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ खेत पर दरिंदगी हुई। वहीं उसका गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया गया। हाथरस के जिला अस्पताल से उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। पुलिस ने एक आरोपी संदीप के खिलाफ जानलेवा हमले व एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया।
- 19 सितंबर को आरोपी संदीप की गिरफ्तारी।
- 22 सितंबर को पीड़िता के बयान के आधार पर तीन अन्य नाम मुकदमे में शामिल किए गए और सामूहिक दुष्कर्म की धारा बढ़ाई गई।
- 23 सितंबर दूसरे आरोपी लवकुश को पुलिस ने किया गिरफ्तार।
- 25 सितंबर तीसरे आरोपी रवि को पुलिस ने किया गिरफ्तार और कोतवाली निरीक्षक चंदपा को किया लाइन हाजिर।
- 26 सितंबर चौथे आरोपी रामू को पुलिस ने बनाया बंदी।
- 28 सितंबर बेहद गंभीर हालत में अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में दिल्ली रेफर किया।
- 29 सितंबर --दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में बिटिया ने तोड़ा दम और मध्य रात्रि ढाई बजे पुलिस ने मृतका के शव का किया अंतिम संस्कार।
- 30 सितंबर-- सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिटिया के पिता से की वार्ता। 25 लाख की सहायता, आवास व सरकारी नौकरी देने का भरोसा।
- 02 अक्टूबर--एसपी, सीओ सहित पांच पुलिसकर्मी निलंबित।
- 03 अक्टूबर--मृतका के घर पहुंचे राहुल व प्रियंका गांधी, परिजनों को दी सांत्वना।
- 04 अक्टूबर प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश।
- 11 अक्टूबर--सीबीआई ने की मामले की जांच शुरू।
- 21 नवंबर--सीबीआई ने जेल में बंद चारों अभियुक्तों को पॉलीग्राफ टेस्ट व ब्रेन मैपिंग के लिए गुजरात ले गई।
- 18 दिसंबर--सीबीआई ने जांच करने के बाद दो हजार पन्नों की चार्जशीट विशेष न्यायालय (एससी-एसटी एक्ट) में की दाखिल।