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मानवाधिकार आयोग पहुंचा नलकूप घोटाला
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2016 11:26 PM IST
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हाथरस। विद्युत वितरण खंड तृतीय के अंतर्गत आने वाले सलेमपुर क्षेत्र के डार्क जोन में फर्जी नलकूप कनेक्शन जारी करने का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। भारत निर्माण शिक्षा संस्थान ने इस मामले को लेकर बेहद गंभीरता दिखाई है और आयोग से इस मामले में विद्युत विभाग द्वारा निर्दोष किसानों के खिलाफ जबरन एफआईआर दर्ज कराए जाने की शिकायत की है।
संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष संजय वर्मा ने आयोग के भेजे गए शिकायती पत्र में कहा है कि यूपी के हाथरस जनपद के कुछ क्षेत्रों को शासन द्वारा निरंतर गिरते जल स्तर के कारण डार्क जोन घोषित कर रखा है। इन क्षेत्रों में ट्यूबवेल और सबमर्सिबल कनेक्शन प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद विद्युत विभाग द्वारा वितरण खंड तृतीय के अधिकारी और कर्मचारियों ने आपस में मिलीभगत कर डार्क जोन में किसानों से मोटी रकम लेकर उन्हें नलकूप कनेक्शन दे दिए और कनेक्शनधारकों को कनेक्शन के कागजात ही नहीं दिए, बल्कि उनके खेत तक खंभे लगवाकर, विद्युत लाइन खिंचवाकर बाकायदा उनके नलकूप चालू भी कर दिए। कनेक्शनधारी अपने विद्युत बिलों का भुगतान भी कार्यालय में करते रहे। एक हफ्ते पहले जब खंड के उच्चाधिकारियों ने डार्कजोन में लगे नलकूप संयोजनों की जांच की तो प्रथम चरण में ही 30 कनेक्शनधारकों के खिलाफ फर्जी कागजातों के आधार पर नलकूप चलाने की एफआईआर दर्ज करवा दी गई और दो बाबू भी निलंबित कर दिए। विभाग ने अपने अधिकारियों को बचाने के लिए मनमाने तरीके से निर्दोष किसानों के खिलाफ एफआईआर करा दी है, जबकि किसानों को नलकूप कनेक्शन कागजात ही नहीं, बल्कि खंभे तार और अन्य सामग्री विभाग ने ही उपलब्ध कराई है। इस प्रकरण से यह स्पष्ट है कि इस घोटाले में विद्युत विभाग के बडे़ अधिकारी भी संलिप्त हैं। पत्र में निर्दोष किसानों के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर को निरस्त कराने और दोषी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
मामले की जांच पूरी हो चुकी है। उम्मीद है कि सोमवार तक सभी अधिशासी अभियंताओं की जांच रिपोर्ट मिल जाएगी, जिसके बाद स्पष्ट हो सकेगा कि जिले में कितने और फर्जी नलकूप कनेक्शन हैं।
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-राकेश वर्मा, अधीक्षण अभियंता हाथरस
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संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष संजय वर्मा ने आयोग के भेजे गए शिकायती पत्र में कहा है कि यूपी के हाथरस जनपद के कुछ क्षेत्रों को शासन द्वारा निरंतर गिरते जल स्तर के कारण डार्क जोन घोषित कर रखा है। इन क्षेत्रों में ट्यूबवेल और सबमर्सिबल कनेक्शन प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद विद्युत विभाग द्वारा वितरण खंड तृतीय के अधिकारी और कर्मचारियों ने आपस में मिलीभगत कर डार्क जोन में किसानों से मोटी रकम लेकर उन्हें नलकूप कनेक्शन दे दिए और कनेक्शनधारकों को कनेक्शन के कागजात ही नहीं दिए, बल्कि उनके खेत तक खंभे लगवाकर, विद्युत लाइन खिंचवाकर बाकायदा उनके नलकूप चालू भी कर दिए। कनेक्शनधारी अपने विद्युत बिलों का भुगतान भी कार्यालय में करते रहे। एक हफ्ते पहले जब खंड के उच्चाधिकारियों ने डार्कजोन में लगे नलकूप संयोजनों की जांच की तो प्रथम चरण में ही 30 कनेक्शनधारकों के खिलाफ फर्जी कागजातों के आधार पर नलकूप चलाने की एफआईआर दर्ज करवा दी गई और दो बाबू भी निलंबित कर दिए। विभाग ने अपने अधिकारियों को बचाने के लिए मनमाने तरीके से निर्दोष किसानों के खिलाफ एफआईआर करा दी है, जबकि किसानों को नलकूप कनेक्शन कागजात ही नहीं, बल्कि खंभे तार और अन्य सामग्री विभाग ने ही उपलब्ध कराई है। इस प्रकरण से यह स्पष्ट है कि इस घोटाले में विद्युत विभाग के बडे़ अधिकारी भी संलिप्त हैं। पत्र में निर्दोष किसानों के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर को निरस्त कराने और दोषी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
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मामले की जांच पूरी हो चुकी है। उम्मीद है कि सोमवार तक सभी अधिशासी अभियंताओं की जांच रिपोर्ट मिल जाएगी, जिसके बाद स्पष्ट हो सकेगा कि जिले में कितने और फर्जी नलकूप कनेक्शन हैं।
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-राकेश वर्मा, अधीक्षण अभियंता हाथरस