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Hathras News: समापन से पहले ही उखड़े रेवती मैया पंडाल के झूले, मायूस लौटे बच्चे
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दाऊजी मेले के रेवती मैया पंडाल में मंगलवार की सुबह उखड़ते झूले। संवाद
- फोटो : Samvad
दाऊजी मेले के समापन से पहले ही मेला परिसर से रौनक सिमटने लगी है। मेले का मुख्य आकर्षण रहने वाले रेवती मैया पंडाल के झूलों को संचालकों ने तय समय से पहले ही उखाड़ना शुरू कर दिया। सोमवार की देर रात से ही झूलों के कल-पुर्जे खोलने और ट्रकों में लादने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इससे मंगलवार को मेले में पहुंचे बच्चों व परिजनों को मायूस होना पड़ा।
मेले के अंतिम दिनों में आम तौर पर भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन इस बार झूला कारोबारियों ने समापन तिथि पूरी होने से पहले ही डेरा समेटना शुरू कर दिया। मंगलवार को रेवती मैया पंडाल पूरी तरह खाली और वीरान नजर आया। यहां लगे बड़े झूले, चरखी और नाव आदि को उतार लिया गया।
झूला संचालकों के अनुसार अन्य जनपदों में आगामी मेलों और नवरात्र-दशहरा उत्सवों के चलते उन्हें समय से पहले अपनी मशीनरी समेटनी पड़ रही है। बुधवार तक मेला परिसर के सभी झूलों को पूरी तरह खोलकर हटा दिया जाएगा। झूलों के साथ-साथ मेले में दूर-दराज से आए व्यापारी भी अपनी दुकानें समेटने में जुट गए हैं। हालांकि, महिला बाजार और क्रॉकरी की कुछ दुकानों के संचालक एक या दो दिन और अपनी दुकानें संचालित कर सकते हैं, ताकि बचा हुआ स्टॉक निकाला जा सके। 20 दिनों तक गुलजार रहने वाले मेला परिसर में अब सन्नाटा पसरने लगा है।
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मेले के अंतिम दिनों में आम तौर पर भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन इस बार झूला कारोबारियों ने समापन तिथि पूरी होने से पहले ही डेरा समेटना शुरू कर दिया। मंगलवार को रेवती मैया पंडाल पूरी तरह खाली और वीरान नजर आया। यहां लगे बड़े झूले, चरखी और नाव आदि को उतार लिया गया।
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झूला संचालकों के अनुसार अन्य जनपदों में आगामी मेलों और नवरात्र-दशहरा उत्सवों के चलते उन्हें समय से पहले अपनी मशीनरी समेटनी पड़ रही है। बुधवार तक मेला परिसर के सभी झूलों को पूरी तरह खोलकर हटा दिया जाएगा। झूलों के साथ-साथ मेले में दूर-दराज से आए व्यापारी भी अपनी दुकानें समेटने में जुट गए हैं। हालांकि, महिला बाजार और क्रॉकरी की कुछ दुकानों के संचालक एक या दो दिन और अपनी दुकानें संचालित कर सकते हैं, ताकि बचा हुआ स्टॉक निकाला जा सके। 20 दिनों तक गुलजार रहने वाले मेला परिसर में अब सन्नाटा पसरने लगा है।
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