काश विनीत को कोई समझा देता, बेटियां बोझ नहीं होतीं: छोटे परिवार में बसती है खुशहाली, यह भी किसी ने नहीं समझाया
पांचवीं बेटी होने के बाद विनीत तनाव में रहने लगा था। लेकिन उसे यह समझाने वाला कोई नहीं था कि बेटियां बोझ नहीं हैं। आज बेटियां हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं। अगर शुरूआत में ही किसी ने बता दिया होता कि छोटा परिवार खुशहाल होता है तो शायद बेटे की चाहत में उसके पांच बेटियां न होतीं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लता मंगेशकर, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स और मैरी कॉम। इनकी कहानियां विनीत को किसी ने सुनाई होतीं तो वह पटरी पर गर्दन न रखता। छोटे परिवार में ही खुशहाली बसती है, यह भी उसे किसी ने नहीं बताया होगा। बेटा की तारेगा, इस रूढि़ ने उसे जकड़ लिया और बेटियां उसे बोझ लगनी लगीं। अब जरा सोचिए यह पांचवीं बेटी जब बड़ी होगी तो अपने पिता को किस तरह याद करेगी?
बहेटा गांव निवासी विनीत बेटे की चाहत में जगह-जगह भटकता रहा। हर मन्नत मांगी। जिसने जो बता दिया वह किया भी। पत्नी मालती से भी कहता था कि उसे तो बेटा ही चाहिए लेकिन वह यह नहीं समझ सका कि बेटा और बेटी भला किसी के हाथ में होता है। परिवार वालों का कहना है कि जब पहली बेटी रीनू हुई तो विनीत बहुत खुश था। घर में पूजा कराई।
परिवार के लोगों को जोड़कर नामकरण संस्कार कराया। वह सबसे कहता था कि दूसरा बेटा होगा तो परिवार कंप्लीट हो जाएगा। लेकिन उसके दूसरी बेटी रीनू हो गई। एक-एक करके पांच बेटियों का पिता बन गया विनीत। घर वालों का कहना है कि पांचवीं बेटी होने के बाद वह तनाव में रहने लगा था। लेकिन उसे यह समझाने वाला कोई नहीं था कि बेटियां बोझ नहीं हैं। आज बेटियां हर क्षेत्र में नाम कमा रही हैं। अगर शुरूआत में ही किसी ने बता दिया होता कि छोटा परिवार खुशहाल होता है तो शायद बेटे की चाहत में उसके पांच बेटियां न होतीं।
पांचवीं बेटी का आज था नामकरण संस्कार..घर में होनी थी पूजा
रविवार की सुबह को पांचवीं बेटी का नामकरण संस्कार होना था। घर में पूजा भी रखी गई थी। सुबह को साढ़े नौ बजे पंडित जी को बुलाया गया था। लेकिन रविवार की सुबह 7 पर ही विनीत की मौत की सूचना आ गई।
पांच बेटियों के सिर से उठ गया बाप का साया
विनीत की बड़ी बेटी रीनू पंद्रह साल की है जबकि बबली (13), सोना (11) और डिंपल नौ साल की है। जबकि पांचवीं बेटी नौ दिन की है। पिता की मौत से पांच बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया। पति के शव पर बिलख रही मालती बार बार यही कह रही थी...कौन देखभाल करेगा उसकी पांच बेटियों की। बेटियां भी पिता की याद में बिलख रही थीं।