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छात्राएं बीमार, अब लापरवाह शिक्षिकाओं की होगी जांच
अमर उजाला, हाथरस
Updated Fri, 09 Dec 2016 11:37 PM IST
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कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के बीमार बच्चों के साथ अभिभावक।
- फोटो : अमर उजाला
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कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हाथरस की 23 बालिकाओं के बीमार होने से नाराज डीएम के तल्ख तेवरों से बेसिक शिक्षा विभाग सकते में आ गया है। डीएम के निर्देश पर पूरे प्रकरण की विभागीय जांच शुरू हो गई हैं।
मामले में विद्यालय की वार्डन प्रतिभा भारद्वाज की सेवा समाप्ति के लिए बीएसए ने विधिवत रूप से पत्रावली तैयार कर डीएम को भेज दी है। विद्यालय की शिक्षिकाएं भी इस मामले में जांच के घेरे में आ रही हैं। प्रशासन इसे लापरवाही भी मानकर चल रहा है।
जब से शासन ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के संचालन का जिम्मा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) से हटाकर बेसिक शिक्षा विभाग को सौंपा है, तब से इन विद्यालयों का ढर्रा पटरी से उतर गया है।
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अब तक कई बार इन विद्यालयों में इस प्रकार की घटनाएं होने के बाद वार्डन एवं शिक्षिकाओं के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई कुछ समय बाद शून्य होने से इनमें मनमानी और बढ़ गई है। कस्तूरबा गांधी की 24 छात्राओं के एक साथ बीमार होने की घटना ने इस सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
यह भी साबित कर दिया है कि सरकारी आवासीय विद्यालयों में बच्चों की देखभाल पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जाता। इससे पूर्व सहपऊ के कस्तूरबा स्कूल में भी इस तरह की घटना हो चुकी है। यही वजह है कि डीएम ने कस्तूरबा स्कूलों के बदहाल ढर्रे पर सख्ती दिखाई है और इसकी गंभीरता से जांच कराने का निर्णय लिया है।
अब सवाल यह है कि कहीं यह जांच औपचारिक बनकर रह जाएगी या फिर इस घटना के बाद कस्तूरबा स्कूलों के सूरत-ए-हाल में कुछ बदलाव दिखेगा।
हाथरस। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में 23 छात्राओं के बीमार होने की जानकारी मिलने के बाद सुबह से ही इनके अभिभावक बागला जिला अस्पताल और कस्तूरबा स्कूल पहुंच गए। हर कोई अपनी-अपनी बच्ची को लेने के लिए अस्पताल एवं विद्यालय के चक्कर काटने लगा। बीएसए ने भी जो अभिभावक बच्चियों को स्वस्थ होने के बाद अपने घर ले जाना चाहते थे, उन सभी को अपनी बच्चियों को साथ ले जाने की परमीशन दे दी, जिससे यह बालिकाएं कुछ दिन अपने अभिभावकों के साथ रहकर पूरी तरह तंदरुस्त हो सकें।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में गुरुवार को कक्षा छह से आठवीं तक की 23 छात्राओं की हालत बिगड़ने के बाद शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने विद्यालय से खाद्य पदार्थों के चार नमूने लिए। इन नमूनों को जांच के लिए लखनऊ लैब भेज दिया गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की अभिहित अधिकारी डॉ. श्वेता सैनी के निर्देशन में खाद्य सुरक्षाधिकारी राकेश कुमार और मुनेंद्र सिंह राना ने विद्यालय की रसोई आदि का निरीक्षण किया। इसके बाद वहां पर बन रहे पोहे और आटा, चावल और तेल के चार नमूने भरे। निर्देश दिए गए कि खाद्य सामग्री को एअर टाइट डिब्बों में बंद कर रखा जाए। खाना बनाने वाली रसोइया का फिटनेस प्रमाण पत्र न होने पर भी टीम ने आपत्ति जताई। खाद्य वस्तुओं के आसपास साफ-सफाई के विशेष इंतजाम रखने के निर्देश दिए गए।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं की हालत फूड प्वाइजनिंग से नहीं, बल्कि सर्दी के कारण बिगड़ी थी। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने छात्राआें की जांच कराने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। छात्राओं मे ल्यूकोसाइट काउंट कहीं कम पाया गया है। जांच में ज्यादातर छात्राएं निमोनिया और गैस से पीड़ित पाई गई हैं, जबकि तीन छात्राओं में टायफाइड भी पाया गया है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एमएल अग्रवाल के मुताबिक शुक्रवार को सभी छात्राओं में खून की कमी का पता लगाने के लिए उनका हीमोग्लोबिन जांचा गया। सर्दी की शिकायत पर टीएलसी (टोटल ल्यूकोसाइट काउंट) और डीएलसी (डिफ्रें शियल ल्यूकोसाइट काउंट) की भी जांच की गई। वायरल का पता लगाने के लिए विडाल टेस्ट किया गया। बुखार की शिकायत होने पर मलेरिया, डेंगू और टायफाइड का परीक्षण भी किया गया। इसके अलावा छात्राओं का एक्सरे कराया गया और पेट में तेज दर्द की शिकायत पर एक छात्रा का अल्ट्रासाउंड भी कराया गया।
ज्यादातर छात्राओं के ल्यूकोसाइट तय मानक से कहीं कम पाए गए। छात्राएं सर्दी की चपेट में पाई गईं। सीएमएस अग्रवाल के मुताबिक तीन दिन पहले पारा काफी लुढ़क गया था। भयंकर सर्दी में सबमर्सिबल के पानी से नहाने से भी इन छात्राओं की हालत बिगड़ी है। सीएमएस ने बताया कि टाइफाइड से ग्रस्त तीन छात्राओं को छोड़कर बाकी सबकी हालत सामान्य है। इन तीनों छात्राओं को अस्पताल में भर्ती रखा गया है। बाकी की छुट्टी कर दी गई है।
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मामले में विद्यालय की वार्डन प्रतिभा भारद्वाज की सेवा समाप्ति के लिए बीएसए ने विधिवत रूप से पत्रावली तैयार कर डीएम को भेज दी है। विद्यालय की शिक्षिकाएं भी इस मामले में जांच के घेरे में आ रही हैं। प्रशासन इसे लापरवाही भी मानकर चल रहा है।
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जब से शासन ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के संचालन का जिम्मा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) से हटाकर बेसिक शिक्षा विभाग को सौंपा है, तब से इन विद्यालयों का ढर्रा पटरी से उतर गया है।
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अब तक कई बार इन विद्यालयों में इस प्रकार की घटनाएं होने के बाद वार्डन एवं शिक्षिकाओं के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई कुछ समय बाद शून्य होने से इनमें मनमानी और बढ़ गई है। कस्तूरबा गांधी की 24 छात्राओं के एक साथ बीमार होने की घटना ने इस सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
यह भी साबित कर दिया है कि सरकारी आवासीय विद्यालयों में बच्चों की देखभाल पर जरा भी ध्यान नहीं दिया जाता। इससे पूर्व सहपऊ के कस्तूरबा स्कूल में भी इस तरह की घटना हो चुकी है। यही वजह है कि डीएम ने कस्तूरबा स्कूलों के बदहाल ढर्रे पर सख्ती दिखाई है और इसकी गंभीरता से जांच कराने का निर्णय लिया है।
अब सवाल यह है कि कहीं यह जांच औपचारिक बनकर रह जाएगी या फिर इस घटना के बाद कस्तूरबा स्कूलों के सूरत-ए-हाल में कुछ बदलाव दिखेगा।
हाथरस। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में 23 छात्राओं के बीमार होने की जानकारी मिलने के बाद सुबह से ही इनके अभिभावक बागला जिला अस्पताल और कस्तूरबा स्कूल पहुंच गए। हर कोई अपनी-अपनी बच्ची को लेने के लिए अस्पताल एवं विद्यालय के चक्कर काटने लगा। बीएसए ने भी जो अभिभावक बच्चियों को स्वस्थ होने के बाद अपने घर ले जाना चाहते थे, उन सभी को अपनी बच्चियों को साथ ले जाने की परमीशन दे दी, जिससे यह बालिकाएं कुछ दिन अपने अभिभावकों के साथ रहकर पूरी तरह तंदरुस्त हो सकें।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में गुरुवार को कक्षा छह से आठवीं तक की 23 छात्राओं की हालत बिगड़ने के बाद शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने विद्यालय से खाद्य पदार्थों के चार नमूने लिए। इन नमूनों को जांच के लिए लखनऊ लैब भेज दिया गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की अभिहित अधिकारी डॉ. श्वेता सैनी के निर्देशन में खाद्य सुरक्षाधिकारी राकेश कुमार और मुनेंद्र सिंह राना ने विद्यालय की रसोई आदि का निरीक्षण किया। इसके बाद वहां पर बन रहे पोहे और आटा, चावल और तेल के चार नमूने भरे। निर्देश दिए गए कि खाद्य सामग्री को एअर टाइट डिब्बों में बंद कर रखा जाए। खाना बनाने वाली रसोइया का फिटनेस प्रमाण पत्र न होने पर भी टीम ने आपत्ति जताई। खाद्य वस्तुओं के आसपास साफ-सफाई के विशेष इंतजाम रखने के निर्देश दिए गए।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं की हालत फूड प्वाइजनिंग से नहीं, बल्कि सर्दी के कारण बिगड़ी थी। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने छात्राआें की जांच कराने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। छात्राओं मे ल्यूकोसाइट काउंट कहीं कम पाया गया है। जांच में ज्यादातर छात्राएं निमोनिया और गैस से पीड़ित पाई गई हैं, जबकि तीन छात्राओं में टायफाइड भी पाया गया है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एमएल अग्रवाल के मुताबिक शुक्रवार को सभी छात्राओं में खून की कमी का पता लगाने के लिए उनका हीमोग्लोबिन जांचा गया। सर्दी की शिकायत पर टीएलसी (टोटल ल्यूकोसाइट काउंट) और डीएलसी (डिफ्रें शियल ल्यूकोसाइट काउंट) की भी जांच की गई। वायरल का पता लगाने के लिए विडाल टेस्ट किया गया। बुखार की शिकायत होने पर मलेरिया, डेंगू और टायफाइड का परीक्षण भी किया गया। इसके अलावा छात्राओं का एक्सरे कराया गया और पेट में तेज दर्द की शिकायत पर एक छात्रा का अल्ट्रासाउंड भी कराया गया।
ज्यादातर छात्राओं के ल्यूकोसाइट तय मानक से कहीं कम पाए गए। छात्राएं सर्दी की चपेट में पाई गईं। सीएमएस अग्रवाल के मुताबिक तीन दिन पहले पारा काफी लुढ़क गया था। भयंकर सर्दी में सबमर्सिबल के पानी से नहाने से भी इन छात्राओं की हालत बिगड़ी है। सीएमएस ने बताया कि टाइफाइड से ग्रस्त तीन छात्राओं को छोड़कर बाकी सबकी हालत सामान्य है। इन तीनों छात्राओं को अस्पताल में भर्ती रखा गया है। बाकी की छुट्टी कर दी गई है।