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चुनावी रेवड़ी बन गए सरकारी हैंडपंप 

Sat, 04 Jun 2016 11:47 PM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 04 Jun 2016 11:47 PM IST
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हाथरस। विधानसभा चुनाव 2017 से पहले शासन द्वारा विधायकों को 100-100 हैंडपंप दिए हैं। यह हैंडपंप तीनों विधानसभा क्षेत्र में चुनावी रेवड़ी की तरह बांटे जा रहे हैं। जनप्रतिनिधि इन हैंडपंपों को जनता के पीने के पानी की समस्या को देखते हुए नहीं, अपने-अपने वोट बैंक को ध्यान में रखकर बांट रहे हैं। जहां जरूरत है, वहां हैंडपंप लग नहीं रहे। जहां जरूरत नहीं हैं, वहां अपने वोट बैंक की तादाद को देखते हुए आंख मूंदकर हैंडपंप लगवाने या फिर पुरानों की रिबोरिंग कराने की सिफारिश की जा रही है।
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प्रदेश की सपा सरकार ने चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने की खुशी में सभी विधायकों को 100-100 हैंडपंपों का तोहफा दिया था। शासन ने इसके लिए पिछले सालों में हैंडपंपों की स्थापना की नियमावली में भी परिवर्तन कर दिया है। पूर्व में प्रशासनिक अधिकारी जनता की समस्याओं को देखते हुए अपने विवेक का इस्तेमाल कर हैंडपंपों की स्थापना करा सकते थे, लेकिन इस बार नियमावली में परिवर्तन कर दिया गया है। इसके अनुसार जिले में लगने वाले हैंडपंपों की स्थापना इकाई तो जल निगम को ही रखा गया है, लेकिन यह नल कहां लगेंगे, इस स्थान का निर्धारण करने का अधिकार सिर्फ जनप्रतिनिधियों को दिया गया है। जनप्रतिनिधि कहां नल लगवाएंगे, इसका प्रस्ताव वह मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से जल निगम के एक्सईएन को देंगे। उसके बाद ही हैंडपंपों की जल निगम स्थापित करा सकेगा। शासन के इस बदले हुए शासनादेश का माननीय अब राजनीतिक रूप से पूरा लाभ लेना चाहते हैं। उनकी इसी उधेड़बुधन के चलते जिले में अभी तक हैंडपंपों के अधिष्ठापन और रिबोरिंग का काम शुरू नहीं हो सका है, जबकि गर्मी का मौसम निकला जा रहा है। जनप्रतिनिधि चाहते हैं कि वह चुनाव में वोट मांगने जाएं तो इन हैंडपंपों को वह अपने फायदे के लिए प्रचारित कर सकें और बदले में मतदाताओं की सहानुभूति बटोर सकें, लेकिन जनप्रतिनिधियों की इस मनमानी का खामियाजा उन क्षेत्रों के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है, जहां वर्तमान में नए हैंडपंप या पुरानों की रिबोरिंग की सख्त जरूरत है, लेकिन सिर्फ इस वजह से वहां हैंडपंप नहीं लग पा रहे, क्योंकि उन क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों का वोट नहीं है।
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