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रिटायर्ड शिक्षक ने राष्ट्रपति प्रधानमंत्री से मांगी इच्छामृत्यु
अमर उजाला ब्यूरो/ हाथरस।
Updated Tue, 02 May 2017 11:29 PM IST
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पूर्व माध्यमिक विद्यालय पचावरी के रिटायर्ड प्रधानाध्यापक त्रिलोकीनाथ ने राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राज्यपाल को पत्र भेजकर पांच सितंबर 2017 को उन्हें मृत्युदंड या इच्छामृत्यु मांगी है। उनका कहना है कि वह बेसिक शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार से आजिज आ चुके हैं।
उन्हाेंने शिकायती पत्र में कहा है कि जीवन पर्यंत सेवा करने के उपरांत वित्त एवं लेखा कार्यालय (बेसिक शिक्षा) अलीगढ़, मथुरा और हाथरस ने उनके जीवन की गाढ़ी कमाई को नष्ट कर दिया है। वह विभागीय दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। अब वह और घुट-घुटकर नहीं जी सकते। उन्होंने जीवन पर्यंत ईमानदारी धर्मनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में सहयोग किया है। पत्र में उन्हाेंने कहा है कि विभाग ने मनमानी करते हुए चार साल बाद वेतन इकट्ठा कर वेतन लिमिट बढ़ाकर टैक्स काटकर भुगतान किया, लेकिन वेतन बिल को छठवें वेतन आयोग के अनुरूप संशोधित नहीं किया गया है, क्योंकि उन्होंने सुविधा शुल्क नहीं दिया।
उनके सभी फंड, जमा वेतन निधियों और बोनस को प्रतिवर्ष अनियमित बनाकर वित्तीय वर्ष के अनुसार जमा ही नहीं किया, इसलिए निधियों और ब्याज में भारी हेरफेर कर घाटा दिया गया। उनके बुढ़ापे को असुरक्षित कर दिया गया है। बुढ़ापे की निधियों को बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा कार्यालय अलीगढ़ मथुरा और हाथरस एवं एबीएसए कार्यालय सादाबाद और नियुक्तिधिकारी बीएसए कार्यालय हाथरस ने लूट लिया है। अधिकारी जिम्मेदारी से बच रहे हैं, उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। आरटीआई के तहत भी उन्हें सटीक जानकारी नहीं दी गई। न कोई दस्तावेज दे रहे हैं और न फंड पास बुक उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि वित्तीय वर्ष 16-17 बीत चुका है।
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उन्हाेंने शिकायती पत्र में कहा है कि जीवन पर्यंत सेवा करने के उपरांत वित्त एवं लेखा कार्यालय (बेसिक शिक्षा) अलीगढ़, मथुरा और हाथरस ने उनके जीवन की गाढ़ी कमाई को नष्ट कर दिया है। वह विभागीय दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। अब वह और घुट-घुटकर नहीं जी सकते। उन्होंने जीवन पर्यंत ईमानदारी धर्मनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में सहयोग किया है। पत्र में उन्हाेंने कहा है कि विभाग ने मनमानी करते हुए चार साल बाद वेतन इकट्ठा कर वेतन लिमिट बढ़ाकर टैक्स काटकर भुगतान किया, लेकिन वेतन बिल को छठवें वेतन आयोग के अनुरूप संशोधित नहीं किया गया है, क्योंकि उन्होंने सुविधा शुल्क नहीं दिया।
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उनके सभी फंड, जमा वेतन निधियों और बोनस को प्रतिवर्ष अनियमित बनाकर वित्तीय वर्ष के अनुसार जमा ही नहीं किया, इसलिए निधियों और ब्याज में भारी हेरफेर कर घाटा दिया गया। उनके बुढ़ापे को असुरक्षित कर दिया गया है। बुढ़ापे की निधियों को बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा कार्यालय अलीगढ़ मथुरा और हाथरस एवं एबीएसए कार्यालय सादाबाद और नियुक्तिधिकारी बीएसए कार्यालय हाथरस ने लूट लिया है। अधिकारी जिम्मेदारी से बच रहे हैं, उनकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। आरटीआई के तहत भी उन्हें सटीक जानकारी नहीं दी गई। न कोई दस्तावेज दे रहे हैं और न फंड पास बुक उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि वित्तीय वर्ष 16-17 बीत चुका है।
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