फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Raja Mahendra Pratap's birth anniversary today, demand for Bharat Ratna remains unfulfilled

Hathras News: राजा महेंद्र प्रताप की जयंती आज, भारत रत्न देने की मांग अधूरी

Sun, 30 Nov 2025 11:35 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Nov 2025 11:35 PM IST
विज्ञापन
Raja Mahendra Pratap's birth anniversary today, demand for Bharat Ratna remains unfulfilled
मुरसान की सब्जी मंडी  में नगर पंचायत के व्यवसायिक परिसर के पीछे खड़ी राजा महेंद्र प्रताप की प्र - फोटो : samvad
मुरसान रियासत के राजा महेंद्र प्रताप सिंह की जयंती आज मनाई जाएगी। उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। विदेश में रहकर हिंद सरकार का गठन किया और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। उनके अविस्मरणीय योगदान के बावजूद उन्हें भारत रत्न नहीं मिल सका, जिसकी मांग आज भी की जा रही है।
विज्ञापन

राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जन्म एक दिसंबर 1886 को मुरसान के राजा घनश्याम सिंह के घर में हुआ था। हाथरस के राजा हरनारायण सिंह ने उन्हें दत्तक पुत्र के रूप में गोद लिया था, इसलिए उनकी प्रारंभिक शिक्षा हाथरस में हुई। आगे की पढ़ाई के लिए वह अलीगढ़ पहुंचे, जहां से उन्होंने हाईस्कूल की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मोहम्मडन ओरिएंटल कॉलेज (एएमयू) से बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई की, आजादी की जंग शुरू होने के चलते वह आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर सके। इसी दौरान उनका विवाह महाराजा जींद की छोटी बहन बलवीर कौर से हुआ। इसके बाद वह पूरी तरह से देश की आजादी की जंग में कूद पड़े। राजा महेंद्र प्रताप 1946-47 में स्वदेश लौटे। 29 अप्रैल 1979 को देश का यह महान सपूत दुनिया को अलविदा कह गया।
विज्ञापन




काबुल में आजाद हिंद के प्रथम राष्ट्रपति बने
राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने विदेश में रहकर देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। काबुल में स्थापित आजाद हिंद सरकार के प्रथम राष्ट्रपति बने थे। उन्होंने वर्ष 1914 में देहरादून में राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन से मुलाकात के बाद यह निश्चय किया था कि वे विदेशों में रहकर देश की आजादी के लिए काम करेंगे। वह 2 अक्तूबर 1915 को अफगानिस्तान पहुंचे, जहां के बादशाह ने उनका शाही मेहमान के रूप में स्वागत किया। वर्ष 1916 की शुरुआत में राजा महेंद्र प्रताप ने काबुल में आजाद हिंद सरकार की स्थापना की और इसके पहले राष्ट्रपति बने। इस दौरान उन्होंने छह हजार अफगान सैनिकों की एक सेना को संगठित किया और अंग्रेजी सरकार पर आक्रमण किया। अफगानिस्तान के बाद वह जापान गए। वहां उन्होंने आजाद हिंद सेना की स्थापना की और जापान के साथ मिलकर अंग्रेजों पर कई आक्रमण किए।
विज्ञापन
विज्ञापन






ब्रिटिश सरकार ने घोषित किया था राजद्रोही
राजा महेंद्र प्रताप सिंह को ब्रिटिश सरकार ने राजद्रोही घोषित किया था। उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों से अंग्रेज परेशान थे, जिसके चलते यह कदम उठाया गया था। वर्ष 1923 में वायसराय कौंसिल में अंग्रेजी सरकार की ओर से उन्हें आधिकारिक तौर पर बागी और राजद्रोही करार दिया गया था। इस घोषणा के परिणामस्वरूप उनकी देहरादून, मुरसान और अलीगढ़ स्थित संपत्तियों को जब्त कर लिया गया था।

-------
राजा की प्रतिमा के आसपास है गंदगी
राजा महेंद्र प्रताप सिंह की 139वीं जयंती पहली दिसंबर को मनाई जाएगी। इसके उपलक्ष्य में विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, लेकिन मुरसान स्थित उनकी प्रतिमा पूरे वर्ष उपेक्षा का शिकार रहती है। यह प्रतिमा कस्बे की सब्जी मंडी के पास नगर पंचायत के व्यावसायिक परिसर के पीछे स्थित है। प्रतिमा के आसपास झाड़ियां और गंदगी है। इसके आसपास का क्षेत्र जीर्णोद्धार की प्रतीक्षा में है। जयंती के अवसर पर नगर पंचायत द्वारा प्रतिमा के आसपास सफाई कराई जाती है। जयंती समारोह समाप्त होने के बाद प्रतिमा की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed