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विद्युत कटौती की मार से उद्योग-धंधों पर असर
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Apr 2016 11:45 PM IST
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हाथरस। गर्मी के मौसम में बिजली का सितम बढ़ रहा है। शहर और कस्बे के लोगों को बमुश्किल 10 से 12 घंटे की आपूर्ति मिल रही है, जिससे उद्योग-धंधे तो चौपट हो ही गए हैं। घरेलू कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। बिजली नहीं आने से कई इलाकों में पानी का संकट भी व्याप्त हो गया है, जिससे लोगों में काफी रोष बना हुआ है।
बीते एक हफ्ते से मुरादाबाद कंट्रोल रूम और स्थानीय स्तर से बिजली कटौती का दंश बढ़ गया है। शहर ही नहीं, टीटीजेड से जुड़े इलाकों में भी सुप्रीम कोर्ट के 24 घंटे बिजली देने के आदेशों की परवाह किए बगैर जमकर बिजली कटौती की जा रही है। टीटीजेड इलाकों में उपभोक्ता बढ़ी हुई दरों पर विभाग को बिजली का बिल अदा कर रहे हैं, लेकिन बिजली एक गांव की आपूर्ति के बराबर भी नहीं दी जा रही। ऐसे में एक तरफ लोगों में विभाग के प्रति गुस्सा है तो दूसरी तरफ बिजली नहीं मिलने से उद्योग-धंधे चौपट हो रहे हैं। खासकर बिजली कटौती का असर शहर के अचार मुरब्बा बनाने के कारोबार, दालमील मिलों व रेडीमेड गारमेंट के व्यवसाय पर पड़ रहा है। अन्य छोटे-छोटे उद्योग भी बिजली कटौती से प्रभावित हो रहे हैं। सादाबाद में कस्बा बिसावर का घुंघरू उद्योग भी बेदम हो गया है। कस्बा सासनी के ढलाई और कांच के कारखानों में भी बिजली की काफी कमी महसूस की जा रही है। इधर, आम लोग और गृहणियां भी बिजली कटौती से परेशान हैं। रात में बिजली नहीं आने से मच्छरों के आतंक का सामना करना पड़ रहा है तो दोपहर में लोग पसीने से तर-बतर हो रहे हैं। बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के साधन भी फेल होने लगे हैं। एसई राकेश वर्मा ने बताया कि गर्मी में बिजली की डिमांड बढ़ रही है, उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली दिए जाने की कोशिश है।
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बीते एक हफ्ते से मुरादाबाद कंट्रोल रूम और स्थानीय स्तर से बिजली कटौती का दंश बढ़ गया है। शहर ही नहीं, टीटीजेड से जुड़े इलाकों में भी सुप्रीम कोर्ट के 24 घंटे बिजली देने के आदेशों की परवाह किए बगैर जमकर बिजली कटौती की जा रही है। टीटीजेड इलाकों में उपभोक्ता बढ़ी हुई दरों पर विभाग को बिजली का बिल अदा कर रहे हैं, लेकिन बिजली एक गांव की आपूर्ति के बराबर भी नहीं दी जा रही। ऐसे में एक तरफ लोगों में विभाग के प्रति गुस्सा है तो दूसरी तरफ बिजली नहीं मिलने से उद्योग-धंधे चौपट हो रहे हैं। खासकर बिजली कटौती का असर शहर के अचार मुरब्बा बनाने के कारोबार, दालमील मिलों व रेडीमेड गारमेंट के व्यवसाय पर पड़ रहा है। अन्य छोटे-छोटे उद्योग भी बिजली कटौती से प्रभावित हो रहे हैं। सादाबाद में कस्बा बिसावर का घुंघरू उद्योग भी बेदम हो गया है। कस्बा सासनी के ढलाई और कांच के कारखानों में भी बिजली की काफी कमी महसूस की जा रही है। इधर, आम लोग और गृहणियां भी बिजली कटौती से परेशान हैं। रात में बिजली नहीं आने से मच्छरों के आतंक का सामना करना पड़ रहा है तो दोपहर में लोग पसीने से तर-बतर हो रहे हैं। बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के साधन भी फेल होने लगे हैं। एसई राकेश वर्मा ने बताया कि गर्मी में बिजली की डिमांड बढ़ रही है, उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली दिए जाने की कोशिश है।
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