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मीटर में चिप लगवाने वाले उपभोक्ता रडार पर
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
मीटर की रीडिंग कम करने के लिए चिप लगवाने वाले उपभोक्ता अब बिजली विभाग के रडार पर हैं। पकड़े गए गिरोह के सदस्यों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने 100 से ज्यादा मीटरों में चिप लगाया है। विभागीय अधिकारी ऐसे मीटर वाले उपभोक्ताओं की पड़ताल में जुटे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार की रात्रि में ऐसे गिरोह के दो सदस्य पकड़े गए थे, जोकि विद्युत मीटर रीडिंग कम करने की डिवाइस लगाते थे। इस गिरोह ने कितने मीटरों में यह कारस्तानी की, इसे लेकर अब छानबीन की जा रही है। बिजली स्टोर से जनवरी से अब तक काफी संख्या में मीटर अलग अलग खंडों के लिए आवंटित किए गए।
इस दौरान शहर में काफी उपभोक्ताओं के यहां नए मीटर भी लगाए गए हैं। विभागीय अधिकारी हाल में लगे मीटरों का डाटा एकत्रित कर रहे हैं। यह भी देख रहे है कि मीटर आखिर क्यों बदला गया है। शहर में करीब सौ ऐसे मीटर लगे होने की आशंका है, जिनमें चिप होने का अधिकारियों को संदेह है।
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इसे लेकर अधीक्षण अभियंता ने मुख्य अभियंता को उच्च स्तरीय जांच के लिए भी लिखा है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से प्रत्येक बिंदु पर पड़ताल जारी है। मामले में अधीक्षण अभियंता एमपी सिंह का कहना है कि अभी यह नहीं कह सकते हैं कि कितने मीटरों में चिप का प्रयोग हो रहा है। इसकी जांच की जा रही है। उच्च स्तरीय जांच के लिए मुख्य अभियंता को पत्र लिखा गया है।
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मीटर की रीडिंग कम करने के लिए चिप लगवाने वाले उपभोक्ता अब बिजली विभाग के रडार पर हैं। पकड़े गए गिरोह के सदस्यों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने 100 से ज्यादा मीटरों में चिप लगाया है। विभागीय अधिकारी ऐसे मीटर वाले उपभोक्ताओं की पड़ताल में जुटे हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार की रात्रि में ऐसे गिरोह के दो सदस्य पकड़े गए थे, जोकि विद्युत मीटर रीडिंग कम करने की डिवाइस लगाते थे। इस गिरोह ने कितने मीटरों में यह कारस्तानी की, इसे लेकर अब छानबीन की जा रही है। बिजली स्टोर से जनवरी से अब तक काफी संख्या में मीटर अलग अलग खंडों के लिए आवंटित किए गए।
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इस दौरान शहर में काफी उपभोक्ताओं के यहां नए मीटर भी लगाए गए हैं। विभागीय अधिकारी हाल में लगे मीटरों का डाटा एकत्रित कर रहे हैं। यह भी देख रहे है कि मीटर आखिर क्यों बदला गया है। शहर में करीब सौ ऐसे मीटर लगे होने की आशंका है, जिनमें चिप होने का अधिकारियों को संदेह है।
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इसे लेकर अधीक्षण अभियंता ने मुख्य अभियंता को उच्च स्तरीय जांच के लिए भी लिखा है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से प्रत्येक बिंदु पर पड़ताल जारी है। मामले में अधीक्षण अभियंता एमपी सिंह का कहना है कि अभी यह नहीं कह सकते हैं कि कितने मीटरों में चिप का प्रयोग हो रहा है। इसकी जांच की जा रही है। उच्च स्तरीय जांच के लिए मुख्य अभियंता को पत्र लिखा गया है।