{"_id":"580904d24f1c1b716b7052c4","slug":"on-the-night-of-conspicuous-with-the-sp-and-the-bjp","type":"story","status":"publish","title_hn":"सपा और भाजपा की रार पर सबकी नजर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सपा और भाजपा की रार पर सबकी नजर
अमर उजाला, हाथरस
Updated Thu, 20 Oct 2016 11:35 PM IST
विज्ञापन
तीन सालों में प्रदेश के आठ मुख्य संसदीय सचिवों ने पेट्रोल पर एक करोड़ से अधिक की राशि खर्च कर दी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विकास शर्मा
विधानसभा चुनाव को लेकर भारत निर्वाचन आयोग की सक्रियता के बाद जिले में सियासी हलचलें भी तेज होती जा रही हैं। सपा परिवार का विवाद और स्थानीय स्तर पर भाजपा की अंतर्कलह पर विपक्षी दलों की नजर है। उधर बसपा ने आगरा और लखनऊ में रैलियों के साथ अपनी तैयारियों का आगाज कर दिया है। वहीं 27 साल-यूपी बेहाल यात्रा के जरिए कांग्रेस भी सियासी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
शहर सीट पर पहले सपा और फिर बसपा द्वारा प्रत्याशी बदलने को लेकर सियासी समीकरण तेजी से बदले हैं। भाजपा, रालोद और कांग्रेस में अभी तक टिकट के लिए घमासान जारी है।
बसपा सुप्रीमो मायावती की आगरा में रैली हुई, जिसमें आगरा और अलीगढ़ मंडलों से भीड़ जुटाकर पार्टी ने विरोधियों को चुनावी जंग के लिए तैयारी का साफ संदेश दे दिया। पार्टी ने हालांकि प्रत्याशी तो तीनों ही महीनों पहले घोषित कर दिए थे, लेकिन अब हाथरस सीट पर मौजूदा विधायक के टिकट कटने का आसार हैं।
विज्ञापन
उनकी जगह नए प्रत्याशी के चयन पर मंथन चल रहा है। उधर सूबे की सियासत में बेहद महत्वपूर्ण हो चुके दलित वोटरों पर डोरे डालने के लिए बसपा की धम्म चेतना यात्रा भी यहां आई। हालांकि इस यात्रा को दलितों के ही विरोध का शिकार होना पड़ गया।
भाजपा में सांसद और जिलाध्यक्ष के बीच रार पर सबकी नजर है। सांसद श्रम मंत्रालय की स्थायी समिति की बैठक के सिलसिले में पुणे में हैं और उनके 18 अक्तूबर की शाम तक यहां लौटने की उम्मीद है। उनके लौटने के बाद यह विवाद और बढ़ने की उम्मीद है। सांसद इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ केस दायर करने की बात कह चुके हैं।
विपक्षी दलों के नेता भी इससे जुड़ी हर गतिविधि पर नगर लगाए हुए हैं। दूसरे दौर में भाजपा विधानसभा मुख्यालयों पर बूथ सम्मेलनों का आयोजन करा चुकी है। इन सम्मेलनों में देश और प्रदेश के बड़े नेताओं को बुलाकर कार्यकर्ताओं में जोश जगाने की कोशिश की गई।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच जारी तकरार से स्थानीय नेता भी संशय में हैं। इसका प्रभाव चुनाव की तैयारियों पर भी साफ दिख रहा है। पिछले कुछ दिनों से उसकी चुनावी तैयारियां बेहद सुस्त नजर आ रही हैं, लेकिन पार्टी के नेताओं को भरोसा है कि चुनाव की घोषणा तक सबकुछ ठीक हो जाएगा।
उधर सपा ने भी इस बार बसपा की तरह समय से प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। हाथरस सुरक्षित सीट पर तो उसका एक प्रत्याशी हाल ही में बदल भी चुका है। सपा ने पहले गांव-गांव साइकिल यात्राओं के जरिए सियासी माहौल तैयार करने की कोशिश की। पिछले दिनों सपा विधानसभा स्तर पर सम्मेलनों का आयोजन कर कार्यकर्ताआें को चुनाव के लिए तैयार रहने का संदेश दे चुकी है।
चौ. अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल का सादाबाद और हाथरस विधानसभा क्षेत्र में जाट वोट बैंक अच्छी-खासी तादाद में ह्रै। लेकिन चुनावी तैयारियों के मामले में यह पार्टी अभी पिछड़ी ही लग रही है। प्रत्याशी चयन की तो बात छोड़ दें, अभी तक जिले में पार्टी के नेताओं ने कोई ऐसा कार्यक्रम नहीं किया है, जिससे यह महसूस हो कि वह चुनाव के लिए तैयार है। सादाबाद में जरूर रालोद मुखिया के बेटे जयंत चौधरी की नुक्कड़ सभाएं हो चुकी हैं।
चौ. अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल का सादाबाद और हाथरस विधानसभा क्षेत्र में जाट वोट बैंक अच्छी-खासी तादाद में ह्रै। लेकिन चुनावी तैयारियों के मामले में यह पार्टी अभी पिछड़ी ही लग रही है। प्रत्याशी चयन की तो बात छोड़ दें, अभी तक जिले में पार्टी के नेताओं ने कोई ऐसा कार्यक्रम नहीं किया है, जिससे यह महसूस हो कि वह चुनाव के लिए तैयार है। सादाबाद में जरूर रालोद मुखिया के बेटे जयंत चौधरी की नुक्कड़ सभाएं हो चुकी हैं।
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव को लेकर भारत निर्वाचन आयोग की सक्रियता के बाद जिले में सियासी हलचलें भी तेज होती जा रही हैं। सपा परिवार का विवाद और स्थानीय स्तर पर भाजपा की अंतर्कलह पर विपक्षी दलों की नजर है। उधर बसपा ने आगरा और लखनऊ में रैलियों के साथ अपनी तैयारियों का आगाज कर दिया है। वहीं 27 साल-यूपी बेहाल यात्रा के जरिए कांग्रेस भी सियासी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
शहर सीट पर पहले सपा और फिर बसपा द्वारा प्रत्याशी बदलने को लेकर सियासी समीकरण तेजी से बदले हैं। भाजपा, रालोद और कांग्रेस में अभी तक टिकट के लिए घमासान जारी है।
विज्ञापन
बसपा सुप्रीमो मायावती की आगरा में रैली हुई, जिसमें आगरा और अलीगढ़ मंडलों से भीड़ जुटाकर पार्टी ने विरोधियों को चुनावी जंग के लिए तैयारी का साफ संदेश दे दिया। पार्टी ने हालांकि प्रत्याशी तो तीनों ही महीनों पहले घोषित कर दिए थे, लेकिन अब हाथरस सीट पर मौजूदा विधायक के टिकट कटने का आसार हैं।
विज्ञापन
उनकी जगह नए प्रत्याशी के चयन पर मंथन चल रहा है। उधर सूबे की सियासत में बेहद महत्वपूर्ण हो चुके दलित वोटरों पर डोरे डालने के लिए बसपा की धम्म चेतना यात्रा भी यहां आई। हालांकि इस यात्रा को दलितों के ही विरोध का शिकार होना पड़ गया।
भाजपा में सांसद और जिलाध्यक्ष के बीच रार पर सबकी नजर है। सांसद श्रम मंत्रालय की स्थायी समिति की बैठक के सिलसिले में पुणे में हैं और उनके 18 अक्तूबर की शाम तक यहां लौटने की उम्मीद है। उनके लौटने के बाद यह विवाद और बढ़ने की उम्मीद है। सांसद इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ केस दायर करने की बात कह चुके हैं।
विपक्षी दलों के नेता भी इससे जुड़ी हर गतिविधि पर नगर लगाए हुए हैं। दूसरे दौर में भाजपा विधानसभा मुख्यालयों पर बूथ सम्मेलनों का आयोजन करा चुकी है। इन सम्मेलनों में देश और प्रदेश के बड़े नेताओं को बुलाकर कार्यकर्ताओं में जोश जगाने की कोशिश की गई।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच जारी तकरार से स्थानीय नेता भी संशय में हैं। इसका प्रभाव चुनाव की तैयारियों पर भी साफ दिख रहा है। पिछले कुछ दिनों से उसकी चुनावी तैयारियां बेहद सुस्त नजर आ रही हैं, लेकिन पार्टी के नेताओं को भरोसा है कि चुनाव की घोषणा तक सबकुछ ठीक हो जाएगा।
उधर सपा ने भी इस बार बसपा की तरह समय से प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। हाथरस सुरक्षित सीट पर तो उसका एक प्रत्याशी हाल ही में बदल भी चुका है। सपा ने पहले गांव-गांव साइकिल यात्राओं के जरिए सियासी माहौल तैयार करने की कोशिश की। पिछले दिनों सपा विधानसभा स्तर पर सम्मेलनों का आयोजन कर कार्यकर्ताआें को चुनाव के लिए तैयार रहने का संदेश दे चुकी है।
चौ. अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल का सादाबाद और हाथरस विधानसभा क्षेत्र में जाट वोट बैंक अच्छी-खासी तादाद में ह्रै। लेकिन चुनावी तैयारियों के मामले में यह पार्टी अभी पिछड़ी ही लग रही है। प्रत्याशी चयन की तो बात छोड़ दें, अभी तक जिले में पार्टी के नेताओं ने कोई ऐसा कार्यक्रम नहीं किया है, जिससे यह महसूस हो कि वह चुनाव के लिए तैयार है। सादाबाद में जरूर रालोद मुखिया के बेटे जयंत चौधरी की नुक्कड़ सभाएं हो चुकी हैं।
चौ. अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल का सादाबाद और हाथरस विधानसभा क्षेत्र में जाट वोट बैंक अच्छी-खासी तादाद में ह्रै। लेकिन चुनावी तैयारियों के मामले में यह पार्टी अभी पिछड़ी ही लग रही है। प्रत्याशी चयन की तो बात छोड़ दें, अभी तक जिले में पार्टी के नेताओं ने कोई ऐसा कार्यक्रम नहीं किया है, जिससे यह महसूस हो कि वह चुनाव के लिए तैयार है। सादाबाद में जरूर रालोद मुखिया के बेटे जयंत चौधरी की नुक्कड़ सभाएं हो चुकी हैं।