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भेदभाव की शिकायत पर प्रधानाचार्य पर गाज
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2016 12:01 AM IST
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जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की जांच टीम रिकॉर्ड की जांच करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
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हाथरस। शहर के बागला इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य राधेश्याम वार्ष्णेय पर दलित छात्रों के साथ भेदभाव करने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि कॉलेज में नौवीं कक्षा के दलित और पिछड़े छात्रों का अलग सेक्शन बनाया गया। इन छात्रों को पढ़ाने का जिम्मा भी दलित शिक्षकों को दिया गया। आरोप यह भी है कि आरक्षित वर्ग के छात्रों की कक्षा में न तो पंखा है और न पीने के पानी की सुविधा। इस संबंध में कांग्रेस के अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष योगेश कुमार ओके ने आला अधिकारियों से शिकायत की थी। गुरुवार को डीआईओएस जेके मलिक, एसडीएम सदर केहरी सिंह और सीओ सिटी प्रीति सिंह ने कॉलेज पहुंचकर आरोपों की जांच-पड़ताल की। अधिकारियों ने जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही माना है और जांच होने तक प्रधानाचार्य को पद से हटा दिया गया है। आरोपों के गंभीर प्रवृति का होने के कारण प्रधानाचार्य के निलंबन की संस्तुति भी प्रबंध कमेटी से की गई है। जांच होने तक दौरान वरिष्ठ शिक्षक राजेश कुमार शुक्ला को प्रभारी प्रधानाचार्य का कार्यभार सौंपा गया है।
कांग्रेस नेता योगेश कुमार ओके ने डीआईओएस से शिकायत करते हुए कहा था कि पीबीएएस इंटर कॉलेज में दलित और पिछडे़ वर्ग के बच्चों के साथ पढ़ाई में दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है। शिकायत में कांग्रेस नेता ने कहा था कि विद्यालय प्रशासन ने विद्यालय में पढ़ने वाले एससी और ओबीसी के विद्यार्थियों के लिए अलग सेक्शन बना रखा है। यहां बिजली पानी की कोई सुविधा नहीं हैं। विद्यालय प्रशासन के इस रवैये से विद्यार्थियों के बीच भेदभाव पैदा हो रहा है। उन्होंने डीआईओएस से इस मामले में जांच कराकर विधिवत रूप से कार्रवाई करने की मांग की थी।
गुरुवार को डीआईओएस जितेंद्र कुमार मलिक अपने स्टाफ के साथ कॉलेज पहुंचे और रजिस्टर खंगाले। इस दौरान एसडीएम और सीओ भी मौजूद रहे। घंटों तक चली जांच-पड़ताल के बाद जांच के बाद सामने आया कि अलग से बनाए गए सेक्शन के ज्यादातर छात्र दलित और पिछड़ा वर्ग के हैं। कुछ छात्रों ने इसे लेकर हंगामा भी किया। कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हाथरस गेट थाने का फोर्स कॉलेज बुला लिया गया। डीआईओएस जेके मलिक ने जांच के बाद मीडिया को बताया कि छात्रों के इस तरह जातिगत आधार पर बंटवारे को सही नहीं ठहराया जा सकता। यह शासन के नियमों के विपरीत है। प्रधानाचार्य पर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। उनके कार्य में लापरवाही पाई गई है और पारदर्शिता का अभाव मिला है। उन्हें जांच होने तक पद से हटाया गया है। चूंकि प्रधानाचार्य को प्रबंध कमेटी ही निलंबित कर सकती है, इसलिए कमेटी से उन्हें निलंबित करने को कहा गया है।
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मुझ पर लगाए गए आरोप एकदम निराधार हैं। जातिगत आधार पर कभी कोई सेक्शन नहीं बनाया गया। जैसे-जैसे छात्रों ने प्रवेश लिया उन्हें सेक्शन दे दिया गया। ऐसा बताया गया है कि एक सेक्शन में दलित छात्र ज्यादा हो गए हैं। कॉलेज में राजनीति जोरों पर है। इसके पीछे किसी तरह की साजिश भी हो सकती है। जांच प्रभावित नहीं हो, इसलिए मुझे हटाया गया है। जांच में सब साफ हो जाएगा। रिकॉर्ड झूठ नहीं बोलते।
-राधेश्याम वार्ष्णेय, निवर्तमान प्रधानाचार्य, बागला इंटर कॉलेज
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कांग्रेस नेता योगेश कुमार ओके ने डीआईओएस से शिकायत करते हुए कहा था कि पीबीएएस इंटर कॉलेज में दलित और पिछडे़ वर्ग के बच्चों के साथ पढ़ाई में दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है। शिकायत में कांग्रेस नेता ने कहा था कि विद्यालय प्रशासन ने विद्यालय में पढ़ने वाले एससी और ओबीसी के विद्यार्थियों के लिए अलग सेक्शन बना रखा है। यहां बिजली पानी की कोई सुविधा नहीं हैं। विद्यालय प्रशासन के इस रवैये से विद्यार्थियों के बीच भेदभाव पैदा हो रहा है। उन्होंने डीआईओएस से इस मामले में जांच कराकर विधिवत रूप से कार्रवाई करने की मांग की थी।
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गुरुवार को डीआईओएस जितेंद्र कुमार मलिक अपने स्टाफ के साथ कॉलेज पहुंचे और रजिस्टर खंगाले। इस दौरान एसडीएम और सीओ भी मौजूद रहे। घंटों तक चली जांच-पड़ताल के बाद जांच के बाद सामने आया कि अलग से बनाए गए सेक्शन के ज्यादातर छात्र दलित और पिछड़ा वर्ग के हैं। कुछ छात्रों ने इसे लेकर हंगामा भी किया। कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हाथरस गेट थाने का फोर्स कॉलेज बुला लिया गया। डीआईओएस जेके मलिक ने जांच के बाद मीडिया को बताया कि छात्रों के इस तरह जातिगत आधार पर बंटवारे को सही नहीं ठहराया जा सकता। यह शासन के नियमों के विपरीत है। प्रधानाचार्य पर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। उनके कार्य में लापरवाही पाई गई है और पारदर्शिता का अभाव मिला है। उन्हें जांच होने तक पद से हटाया गया है। चूंकि प्रधानाचार्य को प्रबंध कमेटी ही निलंबित कर सकती है, इसलिए कमेटी से उन्हें निलंबित करने को कहा गया है।
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मुझ पर लगाए गए आरोप एकदम निराधार हैं। जातिगत आधार पर कभी कोई सेक्शन नहीं बनाया गया। जैसे-जैसे छात्रों ने प्रवेश लिया उन्हें सेक्शन दे दिया गया। ऐसा बताया गया है कि एक सेक्शन में दलित छात्र ज्यादा हो गए हैं। कॉलेज में राजनीति जोरों पर है। इसके पीछे किसी तरह की साजिश भी हो सकती है। जांच प्रभावित नहीं हो, इसलिए मुझे हटाया गया है। जांच में सब साफ हो जाएगा। रिकॉर्ड झूठ नहीं बोलते।
-राधेश्याम वार्ष्णेय, निवर्तमान प्रधानाचार्य, बागला इंटर कॉलेज