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कागजों पर ठिकाने लगा करोड़ों का बजट
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2016 12:15 AM IST
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हाथरस। वित्तीय वर्ष का अंत नजदीक आते ही जिले के सरकारी विभागों में चालू वित्तीय वर्ष के खातों को बंद करने की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है। हर विभाग में इन-दिनों उपलब्ध बजट के आहरण और अवशेष बजट को सरेंडर करने का काम चल रहा है। आम दिनों के मुकाबले दफ्तरों में देर रात तक काम किया जा रहा है। कोषागार पर भी कामकाज का दवाब काफी बढ़ गया है। यहां भी रात-रात तक बजट के आहरण और सरेंडर की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है। सभी विभागों के सामने 31 मार्च से पहले बजट का हिसाब-किताब क्लीयर करने की चुनौती है।
मार्च की शुरुआत में जिले में सभी विभागों के पास तकरीबन 50 करोड़ रुपये से भी अधिक की धनराशि अवशेष बताई जा रही है। इसमें से हालांकि ज्यादातर धनराशि को इन विभागों ने चालू वित्तीय वर्ष में ही आहरित कर लिया है। इस धनराशि के सापेक्ष कामों के प्रस्ताव भी तैयार करके डीएम और सीडीओ से मंजूर करा लिए गए हैं। जो पैसा कार्यालय खर्च और अन्य मदों में खर्च होना है, उसके आय-व्यय का लेखा-जोखा भी कागजों पर तैयार करा लिया गया है। कुल मिलाकर जो बजट महीनों में विभागों पर खर्च नहीं हो सका, उसे अब चंद दिनों में कागजों पर ही ठिकाने लगा दिया गया है। जिस बजट को खर्च करने के लिए कोई काम ही नहीं बचा, उसे मजबूरी में सरेंडर कर दिया गया। हालांकि कई विभाग अभी भी बजट के आहरण और उसे ठिकाने लगाने की उधेड़बुन में लगे हैं। वह ऐसे काम और प्रस्ताव बनाने में लगे हैं, जिन पर ज्यादा से ज्यादा बजट का खर्चा दिखाया जा सके और कम से कम बजट को ही सरेंडर करने की नौबत आए।
पंचायतराज ने 35 लाख किए सरेंडर
पंचायतराज विभाग ने मार्च महीने में ही तकरीबन दो करोड़ के बजट को ठिकाने लगा दिया। सभी मदों को मिलाकर करीब 35 लाख रुपये का बजट सरेंडर भी कर दिया गया। अब विभाग के खाते में न तो कोई बैलेंस बचा है और न हीं कोई धनराशि खर्च करने को बाकी रह गई है। ग्राम्य विकास विभाग ने भी मनरेगा, इंदिरा आवास, लोहिया आवास, एनआरएलएम समेत कई योजनाओं का बजट आहरण कर लिया है। इस विभाग ने भी कार्यालय व्यय जैसी मदों का बजट ही सरेंडर किया है।
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कोषागार में देर रात तक काम
जिला कोषागार में इन-दिनों सुबह से शाम तक बजट आहरण और सरेंडर के बिलों के साथ सरकारी विभागों के कर्मचारियों का जमघट लगा रहता है। कोषागार का पूरा स्टाफ इन-दिनों इसी काम में जुटा है। काम तब तक चलता है, जब तक सभी बिल निपट नहीं जाएं। जैसे-जैसे 31 मार्च नजदीक आ रही है, ट्रेजरी पर काम का लोड भी बढ़ रहा है।
एओ ने किया 2.49 करोड़ रुपया सरेंडर
हाथरस। बीएसए और एओ के खुले झगड़े का खामियाजा जिले के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मी ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों भी भुगतेंगे, क्योंकि वित्त एवं लेखाधिकारी ने विभाग की सभी मदों के पैसे को सरेंडर कर दिया है। कुल 2,49,80,788 रुपया शासन को सरेंडर किया गया है।
उन्होंने वापस किए गए पैसे में वेतन मद, मंहगाई भत्ता, अन्य भत्ता, कार्यालय व्यय मद, यात्रा भत्ता, लेखन सामिग्री व्यय, चिकित्सा व्यय मद, बीपीएल बच्चों की यूनिफॉर्म, निशुल्क पाठय पुस्तक वितरण, स्काउटिंग, शिक्षा मित्रों का मानदेय, प्राथमिक स्तर पर खेलकूद, वार्षिक परीक्षाओं का व्यय आदि मदों का पैसा वापस कर दिया है, जिससे आने वाले समय में विभाग को शासन की विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए शासन की ओर देखना मजबूरी होगी। बजट वापस जाने का असर शिक्षकों के वेतन, एरियर व अन्य देयकों के अलावा स्कूल ड्रेस और पाठ्य पुस्तक वितरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर भी पड़ेगा। अब इन योजनाओं में बजट मिलने के लिए नए वित्तीय वर्ष तक इंतजार करना होगा। तब तक विभाग को असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
लिपिकों को एओ ने नहीं कराया ज्वाइन
हाथरस। बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी ने डीएम के आदेशों को भी ठेंगा दिखा दिया है। पिछले दिनों डीएम द्वारा तैनात किए गए लिपिकों को सोमवार को भी ज्वाइनिंग नहीं कराई गई, जबकि बीएसए ने डीएम के आदेश के बाद इन दोनों कर्मचारियों को अपने कार्यालय से कार्यमुक्त कर दिया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की इस तकरार से कर्मचारी खासे परेशान हैं।
वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में तैनात लिपिक प्रमोद कुमार की ब्लॉक कार्यालय सादाबाद में तैनाती करने एवं लिपिक विपिन भारद्वाज को निलंबित कर ब्लॉक सासनी से अटैच करने के बाद एओ कार्यालय में वित्तीय कामकाज करने के लिए कोई लिपिक नहीं था, जिससे एओ ने कार्य करने में कर्मचारियों के नहीं होने की बात कहकर डीएम को पत्र भेजा था। डीएम ने इसके बाद बीएसए कार्यालय में तैनात दो लिपिकों को एओ कार्यालय से संबद्ध कर दिया, जिससे विभागीय शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अवशेष भुगतान कराए जा सकें।
डीएम का आदेश मिलने के बाद जब सोमवार को दोनों लिपिक एओ कार्यालय पहुंचे तो एओ ने उन्हें अपने कार्यालय में योगदान नहीं कराया। उन्होंने इस संबंध में डीएम को पत्र भेजकर बीएसए पर राजकोषीय हितों के प्रति निष्ठावान एवं बीएसए के अनियमित भुगतान आदेशों के आधार पर भुगतान में सहयोग नहीं कर रहे कर्मियों पर फर्जी आरोप लगाकर झूठी कार्रवाई करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि अपात्रों को भुगतान कराने की मंशा से भेजे गए कर्मियों को राजकोषीय हितों की सुरक्षा की दृष्टि से कार्यालय में कार्य करने की अनुमति प्रदान नहीं की जा सकती है।
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मार्च की शुरुआत में जिले में सभी विभागों के पास तकरीबन 50 करोड़ रुपये से भी अधिक की धनराशि अवशेष बताई जा रही है। इसमें से हालांकि ज्यादातर धनराशि को इन विभागों ने चालू वित्तीय वर्ष में ही आहरित कर लिया है। इस धनराशि के सापेक्ष कामों के प्रस्ताव भी तैयार करके डीएम और सीडीओ से मंजूर करा लिए गए हैं। जो पैसा कार्यालय खर्च और अन्य मदों में खर्च होना है, उसके आय-व्यय का लेखा-जोखा भी कागजों पर तैयार करा लिया गया है। कुल मिलाकर जो बजट महीनों में विभागों पर खर्च नहीं हो सका, उसे अब चंद दिनों में कागजों पर ही ठिकाने लगा दिया गया है। जिस बजट को खर्च करने के लिए कोई काम ही नहीं बचा, उसे मजबूरी में सरेंडर कर दिया गया। हालांकि कई विभाग अभी भी बजट के आहरण और उसे ठिकाने लगाने की उधेड़बुन में लगे हैं। वह ऐसे काम और प्रस्ताव बनाने में लगे हैं, जिन पर ज्यादा से ज्यादा बजट का खर्चा दिखाया जा सके और कम से कम बजट को ही सरेंडर करने की नौबत आए।
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पंचायतराज ने 35 लाख किए सरेंडर
पंचायतराज विभाग ने मार्च महीने में ही तकरीबन दो करोड़ के बजट को ठिकाने लगा दिया। सभी मदों को मिलाकर करीब 35 लाख रुपये का बजट सरेंडर भी कर दिया गया। अब विभाग के खाते में न तो कोई बैलेंस बचा है और न हीं कोई धनराशि खर्च करने को बाकी रह गई है। ग्राम्य विकास विभाग ने भी मनरेगा, इंदिरा आवास, लोहिया आवास, एनआरएलएम समेत कई योजनाओं का बजट आहरण कर लिया है। इस विभाग ने भी कार्यालय व्यय जैसी मदों का बजट ही सरेंडर किया है।
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कोषागार में देर रात तक काम
जिला कोषागार में इन-दिनों सुबह से शाम तक बजट आहरण और सरेंडर के बिलों के साथ सरकारी विभागों के कर्मचारियों का जमघट लगा रहता है। कोषागार का पूरा स्टाफ इन-दिनों इसी काम में जुटा है। काम तब तक चलता है, जब तक सभी बिल निपट नहीं जाएं। जैसे-जैसे 31 मार्च नजदीक आ रही है, ट्रेजरी पर काम का लोड भी बढ़ रहा है।
एओ ने किया 2.49 करोड़ रुपया सरेंडर
हाथरस। बीएसए और एओ के खुले झगड़े का खामियाजा जिले के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मी ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों भी भुगतेंगे, क्योंकि वित्त एवं लेखाधिकारी ने विभाग की सभी मदों के पैसे को सरेंडर कर दिया है। कुल 2,49,80,788 रुपया शासन को सरेंडर किया गया है।
उन्होंने वापस किए गए पैसे में वेतन मद, मंहगाई भत्ता, अन्य भत्ता, कार्यालय व्यय मद, यात्रा भत्ता, लेखन सामिग्री व्यय, चिकित्सा व्यय मद, बीपीएल बच्चों की यूनिफॉर्म, निशुल्क पाठय पुस्तक वितरण, स्काउटिंग, शिक्षा मित्रों का मानदेय, प्राथमिक स्तर पर खेलकूद, वार्षिक परीक्षाओं का व्यय आदि मदों का पैसा वापस कर दिया है, जिससे आने वाले समय में विभाग को शासन की विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए शासन की ओर देखना मजबूरी होगी। बजट वापस जाने का असर शिक्षकों के वेतन, एरियर व अन्य देयकों के अलावा स्कूल ड्रेस और पाठ्य पुस्तक वितरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर भी पड़ेगा। अब इन योजनाओं में बजट मिलने के लिए नए वित्तीय वर्ष तक इंतजार करना होगा। तब तक विभाग को असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
लिपिकों को एओ ने नहीं कराया ज्वाइन
हाथरस। बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी ने डीएम के आदेशों को भी ठेंगा दिखा दिया है। पिछले दिनों डीएम द्वारा तैनात किए गए लिपिकों को सोमवार को भी ज्वाइनिंग नहीं कराई गई, जबकि बीएसए ने डीएम के आदेश के बाद इन दोनों कर्मचारियों को अपने कार्यालय से कार्यमुक्त कर दिया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की इस तकरार से कर्मचारी खासे परेशान हैं।
वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में तैनात लिपिक प्रमोद कुमार की ब्लॉक कार्यालय सादाबाद में तैनाती करने एवं लिपिक विपिन भारद्वाज को निलंबित कर ब्लॉक सासनी से अटैच करने के बाद एओ कार्यालय में वित्तीय कामकाज करने के लिए कोई लिपिक नहीं था, जिससे एओ ने कार्य करने में कर्मचारियों के नहीं होने की बात कहकर डीएम को पत्र भेजा था। डीएम ने इसके बाद बीएसए कार्यालय में तैनात दो लिपिकों को एओ कार्यालय से संबद्ध कर दिया, जिससे विभागीय शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अवशेष भुगतान कराए जा सकें।
डीएम का आदेश मिलने के बाद जब सोमवार को दोनों लिपिक एओ कार्यालय पहुंचे तो एओ ने उन्हें अपने कार्यालय में योगदान नहीं कराया। उन्होंने इस संबंध में डीएम को पत्र भेजकर बीएसए पर राजकोषीय हितों के प्रति निष्ठावान एवं बीएसए के अनियमित भुगतान आदेशों के आधार पर भुगतान में सहयोग नहीं कर रहे कर्मियों पर फर्जी आरोप लगाकर झूठी कार्रवाई करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने पत्र में कहा है कि अपात्रों को भुगतान कराने की मंशा से भेजे गए कर्मियों को राजकोषीय हितों की सुरक्षा की दृष्टि से कार्यालय में कार्य करने की अनुमति प्रदान नहीं की जा सकती है।