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अलीगढ़ जीटी रोड पर न्याय भवन को लेकर फंसा पेच, रक्षा विभाग ने लगाया अड़ंगा
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निर्माणाधीन न्यायालय भवन स्थल के कागजात की जांच करते एडीजे, एडीएम, सिविल जज एवं रक्षा संपदा अधिका
- फोटो : SIKANDHRA RAHU
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संवाद न्यूज एजेंसी, सिकंदराराऊ।
अलीगढ़ रोड पर सेना के स्वामित्व वाली जमीन पर बन रहे न्याय भवन स्थल के स्वामित्व को लेकर पेच फंस गया है। रक्षा संपत्ति अधिकारी आगरा ने उच्च न्यायालय के निर्देश पर एडीएम, एसडीएम एवं एडीजे के साथ वार्ता की। एडीएम जेपी सिंह का कहना था कि जमीन नियमानुसार हस्तांतरित हुई है।
बता दें कि जीटी रोड पर न्याय भवन बनाने के लिए पांच एकड़ भूमि का प्रस्ताव जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को गया था। शासन से प्रस्ताव मंजूर हो गया तथा प्रदेश सरकार ने न्याय विभाग को लगभग एक करोड़ रुपये से बाउंड्रीवॉल निर्माण को स्वीकृत कर दिया। लगभग कई महीने से बाउंड्रीवाल निर्माण का कार्य चल रहा था। रक्षा संपत्ति अधिकारी विनय कुमार आदि ने हाईकोर्ट को पत्र लिखा कि जमीन नियमानुसार रक्षा विभाग से हस्तांतरित नहीं की गई है। हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए जिला जज को पत्र लिखा। इसके आधार पर बृहस्पतिवार को एडीजे वीडी भारती, एडीएम जेपी सिंह, सिविल जज बलराम सिंह पवार, एसडीएम विजय शर्मा से काफी देर तक गेस्ट हाउस पर बातचीत की तथा कागजात खंगाले। रक्षा संपत्ति अधिकारी का कहना था कि जगह स्थानांतरित होनी चाहिए लेकिन ऐसा न कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। एडीएम का कहना था कि 1937 में यह पूरी खेवट कलक्टर साहब बहादुर के नाम पर थी। इसके बाद इस पर सेना का स्वामित्व हो गया। रक्षा विभाग केवल काबिज है इस जगह का मालिक नहीं। इसलिए कलक्टर को इसे प्रस्ताव शासन को भेज कर हस्तांतरण का हक है। यहां के बाद एडीजे के साथ रक्षा संपत्ति अधिकारी जिलाधिकारी तथा जिला जज से मिलने चले गए।
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अलीगढ़ रोड पर सेना के स्वामित्व वाली जमीन पर बन रहे न्याय भवन स्थल के स्वामित्व को लेकर पेच फंस गया है। रक्षा संपत्ति अधिकारी आगरा ने उच्च न्यायालय के निर्देश पर एडीएम, एसडीएम एवं एडीजे के साथ वार्ता की। एडीएम जेपी सिंह का कहना था कि जमीन नियमानुसार हस्तांतरित हुई है।
बता दें कि जीटी रोड पर न्याय भवन बनाने के लिए पांच एकड़ भूमि का प्रस्ताव जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को गया था। शासन से प्रस्ताव मंजूर हो गया तथा प्रदेश सरकार ने न्याय विभाग को लगभग एक करोड़ रुपये से बाउंड्रीवॉल निर्माण को स्वीकृत कर दिया। लगभग कई महीने से बाउंड्रीवाल निर्माण का कार्य चल रहा था। रक्षा संपत्ति अधिकारी विनय कुमार आदि ने हाईकोर्ट को पत्र लिखा कि जमीन नियमानुसार रक्षा विभाग से हस्तांतरित नहीं की गई है। हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए जिला जज को पत्र लिखा। इसके आधार पर बृहस्पतिवार को एडीजे वीडी भारती, एडीएम जेपी सिंह, सिविल जज बलराम सिंह पवार, एसडीएम विजय शर्मा से काफी देर तक गेस्ट हाउस पर बातचीत की तथा कागजात खंगाले। रक्षा संपत्ति अधिकारी का कहना था कि जगह स्थानांतरित होनी चाहिए लेकिन ऐसा न कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। एडीएम का कहना था कि 1937 में यह पूरी खेवट कलक्टर साहब बहादुर के नाम पर थी। इसके बाद इस पर सेना का स्वामित्व हो गया। रक्षा विभाग केवल काबिज है इस जगह का मालिक नहीं। इसलिए कलक्टर को इसे प्रस्ताव शासन को भेज कर हस्तांतरण का हक है। यहां के बाद एडीजे के साथ रक्षा संपत्ति अधिकारी जिलाधिकारी तथा जिला जज से मिलने चले गए।
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