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चतुरा मामले में डीएम-एसपी समेत सात अफसरों को नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Sat, 08 Jul 2017 11:40 PM IST
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सिविल जज वरिष्ठ प्रभाग के न्यायालय ने सट्टा कारोबार के आरोपी चतुर्भुज गुप्ता उर्फ चतुरा निवासी सिद्धार्थ नगरकी पत्नी मीनू गुप्ता के गेस्ट हाउस पर कुर्की नोटिस चस्पा किए जाने पर गंभीर रुख अपनाया है।
न्यायालय ने इस मामले में जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक सुशील घुले, अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार, उपजिलाधिकारी सदर, सीओ सिटी, तहसीलदार सदर और प्रभारी निरीक्षक कोतवाली हाथरस गेट को नोटिस भेजा है। न्यायालय ने पांच अगस्त को सभी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय में शनिवार को इस मामले में सुनवाई हुई। न्यायालय में मीनू गुप्ता के अधिवक्ता अजय भारद्वाज ने इस दौरान नियम 39 के 2(अ) व्यवहार प्रक्रिया संहिता के तहत जिले के सात पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय के आदेश की अवमानना का वाद दायर किया था।
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अधिवक्ता ने कहा था कि इन प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने उनके मुवक्किल और उसके पति के नाम से झूठे मुकदमे दर्ज कर उसको अपराधी घोषित करने के प्रयास किए हैं, जिससे उसकी संपत्ति की कुर्की आदि की कार्रवाई की जा सके। न्यायालय ने मीनू गुप्ता के अधिवक्ता को सुना। अधिवक्ता ने इस दौरान इस संपत्ति पर पूर्व से चल रहे सिविल जज वरिष्ठ प्रभाग के एक स्टे के बारे में भी न्यायालय को जानकारी दी, जिस पर न्यायालय ने इन अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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न्यायालय ने इस मामले में जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक सुशील घुले, अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार, उपजिलाधिकारी सदर, सीओ सिटी, तहसीलदार सदर और प्रभारी निरीक्षक कोतवाली हाथरस गेट को नोटिस भेजा है। न्यायालय ने पांच अगस्त को सभी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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न्यायालय में शनिवार को इस मामले में सुनवाई हुई। न्यायालय में मीनू गुप्ता के अधिवक्ता अजय भारद्वाज ने इस दौरान नियम 39 के 2(अ) व्यवहार प्रक्रिया संहिता के तहत जिले के सात पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय के आदेश की अवमानना का वाद दायर किया था।
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अधिवक्ता ने कहा था कि इन प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने उनके मुवक्किल और उसके पति के नाम से झूठे मुकदमे दर्ज कर उसको अपराधी घोषित करने के प्रयास किए हैं, जिससे उसकी संपत्ति की कुर्की आदि की कार्रवाई की जा सके। न्यायालय ने मीनू गुप्ता के अधिवक्ता को सुना। अधिवक्ता ने इस दौरान इस संपत्ति पर पूर्व से चल रहे सिविल जज वरिष्ठ प्रभाग के एक स्टे के बारे में भी न्यायालय को जानकारी दी, जिस पर न्यायालय ने इन अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।