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पानी की शक्ल में कहीं जहर तो नहीं पी रहे...

Sat, 09 Apr 2016 11:27 PM IST
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 09 Apr 2016 11:27 PM IST
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Not so much poison in the form of drinking water ...
पालिका प्रांगण में खंडहर पड़ी पानी जांचने की लैब। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो हाथरस
हाथरस। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रिपोर्ट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जिले के बाशिंदे पानी के नाम पर धीमा जहर पी रहे हैं। ऐसा पानी, जो न केवल उनकी सेहत को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी कमजोर बना रहा है। और तो और नगर पालिका के नलों में जिस पानी की सप्लाई हो रही है, उसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि वह सौ फीसदी शुद्ध है अथवा नहीं। इस पानी को पीकर यदि आप बीमार हो जाएं तो कोई हैरानी की बात नहीं है। जलकल संस्थान ने पिछले एक साल से पानी की जांच ही नहीं कराई है। 
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बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की जांच के बाद हाथरस सहित कई जिलों का पानी जहरीला पाया है और जांच के आदेश भी दिए गए हैं। हाथरस के पानी में पोटेशियम का मानक 30 मिली ग्राम प्रति लीटर, फ्लोराइड 1.5 मिग्रा, सोडियम 500 मिग्रा प्रति लीटर से अधिक आया है। खेदजनक बात यह है कि जलकल संस्थान द्वारा पिछले एक साल से पानी की जांच ही नहीं कराई गई है। इसका एक कारण यह भी है कि हाथरस में पानी जांचने के लिए कोई लैब ही नहीं है। पिछले कई दशक से नगर पालिका परिसर में बनी लैब खंडहर हालत में है। उसके उपकरण कहां हैं, यह भी किसी को नहीं पता। लैब नहीं होने के कारण यहां के पानी की जांच आगरा और अलीगढ़ में कराई जाती है। फिलहाल कुछ भी हो शहर के बाशिंदों को को पीने के लिए कैसा पानी मिल रहा है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। 
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क्लोरीन डालकर शुद्धता की खानापूरी
शहर में पांच पानी की बड़ी टंकियां हैं। इन्हीं टंकियों से पूरे शहर में पेयजल आपूर्ति दी जाती है। इन टंकियों की भी काफी समय से सफाई नहीं हुई है। जलकल संस्थान के कई नलकूप मिट्टीयुक्त पानी देते हैं। पानी को शुद्ध करने के लिए एक पानी की टंकी में 10 लीटर क्लोरीन डाला जाता है। क्लोरीन के जरिए ही पानी को शुद्ध माना जा रहा है। 
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- हमें तो आज ही पता चला है कि एक साल से पानी की जांच नहीं हुई है। अब तो पानी पीने में भी डर लगेगा। नगर पालिका को शुद्ध पानी की आपूर्ति का इंतजाम तुरंत करना चाहिए।
- मोहित कुमार, चामड़ गेट 

- नगर पालिका और जलकल संस्थान इस तरह लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं कर सकते। पानी की शुद्धता के लिए समय-समय पर पानी की जांच होनी चाहिए। नगरपालिका पानी जांचने के लिए लैब बनवाए। 
- दिलीप चौधरी, चूना वाला डंडा

-पानी की जांच के लिए लैब की आवश्यकता तो है ही। पालिका बोर्ड की बैठक में लैब निर्माण के लिए प्रस्ताव रखवा दिया जाएगा, जिससे हाथरस में ही पानी की जांच की जा सके। लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। 

- वासुदेव माहौर, चेयरमैन प्रतिनिधि

- एक साल से पानी की जांच नहीं हुई है। इसका कारण यहां लैब नहीं होना है। आगरा और अलीगढ़ से पानी की जांच कराई जाती है। पानी को शुद्ध बनाने के लिए क्लोरीन पानी की टंकियों में डाला जाता है। अंग्रेजों के जमाने की पाइप लाइन हैं, जो टूटने पर कहीं-कहीं गंदा पानी पहुंच जाता है। उसे तुरंत ही दुरुस्त भी करा दिया जाता है। 
- नंदकिशोर, जेई जलकल संस्थान     
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