हाथरस सत्संग हादसा: केवल 69 पुलिसकर्मी लगाए, सेवादारों के भरोसे छोड़ दी थी तीन लाख की भीड़
दो जुलाई को सुबह से ही लोग सत्संग पहुंचना शुरू हो गए थे। ढाई से तीन लाख लोगों की भीड़ जुट गई थी। बरसात का मौसम था, दो जुलाई को उमस व गर्मी थी। अंदर पंखों या कूलर की व्यवस्था नहीं थी। करीब ढाई से तीन घंटे तक लोग ऐसे दमघोटू माहौल में पंडाल के अंदर सत्संग में भोले बाबा का प्रवचन सुनते रहे। सत्संग समाप्त होते ही एक साथ लोग खड़े हो गए और वे निकलकर खुले में जाकर सांस लेना चाहते थे।
विस्तार
हाथरस के सिकंदराराऊ सत्संग हादसे में हर स्तर पर लापरवाही बरती गई थी। न कोई निरीक्षण किया और न ही गंभीरता से जांच कराई, एलआईयू की रिपोर्ट की भी अनदेखी की गई और कार्यालय में बैठकर अनुमति जारी कर दी थी। सत्संग में ढाई से तीन लाख की भीड़ जुटी, तब भी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की नींद नहीं टूटी। मात्र 69 पुलिस कर्मी लगाए गए थे, इन्हें सत्संग पंडाल के बाहर लगाया गया था। पंडाल के अंदर भीड़ नियंत्रण की पूरी व्यवस्था सेवादारों के भरोसे छोड़ दी गई थी।
दो जुलाई को सुबह से ही लोग सत्संग पहुंचना शुरू हो गए थे। हाथरस ही नहीं, आसपास के जिलों अलीगढ़, एटा, कासगंज, मैनपुरी और हरियाणा व राजस्थान से लोग पहुंचे। ढाई से तीन लाख लोगों की भीड़ जुट गई थी। तब भी अफसरों ने गंभीरता नहीं दिखाई गई। बरसात का मौसम था, दो जुलाई को उमस व गर्मी थी। अंदर पंखों या कूलर की व्यवस्था नहीं थी। करीब ढाई से तीन घंटे तक लोग ऐसे दमघोटू माहौल में पंडाल के अंदर सत्संग में भोले बाबा का प्रवचन सुनते रहे। सत्संग समाप्त होते ही एक साथ लोग खड़े हो गए और वे निकलकर खुले में जाकर सांस लेना चाहते थे। इसी आपाधापी मची और पुलिस पंडाल से बाहर तैनात थी, अंदर की व्यवस्था पूरी तरह से सेवादारों के हाथ में थी, उन्हें भीड़ नियंत्रण का कोई अनुभव नहीं था। इसी दौरान भोले बाबा का काफिला निकलने लगा तो सेवादारों ने उन्हें रोक दिया। भीड़ का दबाव गैलरी की ओर बढ़ा तो उन्होंने लोगों को लाठियों से धकियाकर रोक दिया। काफिले के निकलते ही वह पीछे हट गए और भगदड़ मच गई, पंडाल के बाहर सड़क की ओर बनी खाई में पानी भरा था और फिसलन थी। लोग गिरते गए और कुचलते गए। 121 लोगों की हादसे में जान चली गई।
न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट में साजिश की संभावना से इन्कार नहीं किया गया है। क्या कमियां रहीं, क्या सावधानी बरतनी चाहिए, इसका उल्लेख किया गया है। आगे किस तरह से सत्संग का आयोजन किया जाना है, भविष्य में आयोजनों में सुझावों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। पूरी तरह से कानून का पालन करेंगे। अभी पूरी रिपोर्ट का अध्ययन किया जाएगा।- एपी सिंह, सत्संग आयोजकों के अधिवक्ता
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भीड़ की संख्या को लेकर भी विरोधाभासी थी रिपोर्ट
न्यायिक जांच आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अनुमति देने में गंभीरता नहीं बरती गई। सत्संग के आयोजक देव प्रकाश मधुकर ने 18 जून 2024 को उप जिलाधिकारी सिकंदराराऊ से मानव मंगल मिलन समागम कराने के लिए अनुमति मांगी थी। इसमें उन्होंने 80 हजार लोगों की भीड़ एकत्रित होने की संभावना जताई थी। इस पर एसडीएम ने सीओ और एसएचओ से जांच कर स्पष्ट आख्या मांगी थी। इंस्पेक्टर सिकंदराराऊ आशीष कुमार सिंह ने 29 जून 2024 को अपनी आख्या में एक लाख लोगों की भीड़ जुटने की संभावना जताई। एलआईयू ने अपनी रिपोर्ट में दो लाख की भीड़ जुटने का अनुमान लगाते हुए रिपोर्ट दी। इसके बाद भी एक एसएचओ, चार इंस्पेक्टर, छह दरोगा, दो महिला दरोगा,चार ट्रैफिक पुलिस कर्मी और डेढ़ सेक्शन पीएसी सहित कुल 69 पुलिस कर्मी ही लगाए गए थे। 55 पुलिसकर्मी और एक प्लाटून पीएसी की भी अतिरिक्त मांग की गई थी, लेकिन यह नहीं मिली थी।
भीड़ की संख्या को लेकर भी विरोधाभासी थी रिपोर्ट
सत्संग में मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हुई। पुलिस ने 11 आरोपियों के खिलाफ 3200 पेज की चार्जशीट दाखिल की है, इसमें 676 गवाह बनाए गए हैं। मुख्य आरोपी देव प्रकाश मुधकर, मेघ सिंह, मुकेश कुमार, मंजू देवी, मंजू यादव, राम लड़ेते, उपेंद्र सिंह,संजू कुमार, राम प्रकाश शाक्य, दुर्वेश कुमार, दलवीर सिंह के खिलाफ न्यायालय में मामला चल रहा है। इनमें से आठ आरोपियों की जमानत हो चुकी हैं। तीन आरोपियों देव प्रकाश मधुकर, मेघ सिंह व मुकेश की जमानत याचिका उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
हाथरस हादसे पर गर्मा गई थी सियासत, सीएम योगी-राहुल गांधी पहुंचे थे
हाथरस सत्संग हादसे के बाद प्रदेश की सियासत गर्मा गई थी और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया था। हादसे के बाद स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक सहित दो मंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी को तुरंत हाथरस भेज दिया गया था। अगले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं हाथरस पहुंचे थे। महिला आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष रेखा शर्मा भी हाथरस पहुंची थी। तीन दिन बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी हाथरस पहुंचकर मृतकों के परिजनों और घायलों से मिले थे। इंतजामों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा था। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष भोले बाबा का नाम लेने से सभी बचते रहे थे।
ये कमियां भी मिलीं
- कार्यक्रम स्थल पर वायरलेस से संपर्क की सुविधा नहीं थी, केवल मोबाइल ही साधन था, जिसका नेटवर्क नहीं आ रहा था।
- श्रद्धालुओं की भीड़ के मुकाबले पुलिस बल की संख्या नगण्य थी, किसी भी स्थान व ड्यूटी का कोई प्रभारी नहीं था।
- पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के संबंध में ब्रीफ नहीं किया गया, उन्हें पता नहीं था कि विपरीत परिस्थिति में क्या करना है।
- प्रभारी निरीक्षक ने सभी यातायात कर्मियों को एक ही जगह नियुक्त कर दिया। यह पीएसी बल के साथ भी किया गया।
- राजस्व कर्मी भी मनमर्जी से ड्यूटी कर रहे थे। उनकी उपस्थिति की कोई व्यवस्था तक नहीं की गई थी।
- गाड़ियों को पार्किंग में खड़ा करने की व्यवस्था नहीं थी। वाहनों को डायवर्ट करने का भी प्रयास नहीं किया गया।
- भयंकर गर्मी और उमस के बावजूद पानी और छाया की व्यवस्था नहीं थी, दो टैंकर हाईवे पर थे, जिससे फिसलन हो गई।
-बाबा के आने-जाने की अलग व्यवस्था नहीं की गई। पुलिस ने सतर्कता का परिचय नहीं दिया।
- सत्संग स्थल पर मेडिकल कंट्रोल रूम नहीं बनाया गया। एंबुलेंस की सुविधा भी पर्याप्त नहीं थी।
- कार्यक्रम की फोटो खींचने और वीडियो बनाने वालों को डरा-धमका कर उसे डिलीट करा दिया गया।