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Hathras: सासनी के सांदलपुर में पकड़ी अवैध खाद फैक्टरी, 30 लाख कीमत के 2000 कट्टे बरामद

Wed, 15 Jan 2025 10:09 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Wed, 15 Jan 2025 10:09 PM IST
सार

जिस समय फैक्टरी पर छापा मारा, उस समय करीब तीन ट्रकों में माल बिना मार्का के कट्टों में भरकर भेजने की तैयारी की जा रही थी। टीम के पहुंचते ही मौके पर भगदड़ मच गई। कृषि विभाग ने 30 लाख कीमत के 2000 कट्टे बरामद किए हैं।

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Illegal fertilizer factory caught in Sasni Sandalpur
जिला कृषि अधिकारी ने छापे मारी कर पकड़ी अवैध खाद - फोटो : विभाग

विस्तार

हाथरस में कृषि विभाग ने सासनी क्षेत्र के गांव सांदलपुर में छापा चल रही खाद बनाने की अवैध फैक्टरी पकड़ी है। यहां बिना लाइसेंस खाद का भंडारण किया गया था और उन्हें बिना मार्का के कट्टों में भरकर ट्रकों में लादा जा रहा था। मशीनें व करीब 2000 कट्टे डीएपी, यूरिया और पोटाश के बरामद हुए हैं। इन्हें केमिकल फैक्टरियों में सप्लाई किए जाने का अंदेशा जताया जा रहा है। 

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कृषि विभाग ने 15 जनवरी शाम पुलिस को साथ लेकर जिस समय फैक्टरी पर छापा मारा, उस समय करीब तीन ट्रकों में माल बिना मार्का के कट्टों में भरकर भेजने की तैयारी की जा रही थी। टीम के पहुंचते ही मौके पर भगदड़ मच गई। फैक्टरी में खुले में डीएपी पड़ा हुआ था। करीब 400 कट्टे डीएपी के पैक हो चुके थे। ट्रकों में भी डीएपी लदा हुआ था। एक ओर यूरिया का पाउडर बनाया जा रहा था। यूरिया पाउडर बनाने के लिए मशीनें लगी हुई थीं। कृषि विभाग की टीम ने यूरिया, डीएपी और पोटाश के करीब 2000 कट्टों को पांच ट्रकों में भरवा लिया। कृषि विभाग अधिकारियों का कहना है कि फैक्टरी संचालकों के पास न तो भंडारण का और न ही उत्पादन संबंधी लाइसेंस है। 
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जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने बताया कि पांच ट्रक माल बरामद हुआ है। इसे रुहेरी के राजकीय गोदाम में अपनी सुपुर्दगी में रख लिया है। अभी माल का आकलन किया जा रहा है, इसकी कीमत करीब करीब 30 लाख रुपये हो सकती है। मौके पर फैक्टरी संचालक मौजूद नहीं मिले हैं। यहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि अनुज भार्गव नाम के व्यक्ति की यह फैक्टरी है।

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किसानों को दिए जाने वाले डीएपी को फैक्टरियों में बेचे जाने का अंदेशा

रबी की  बुवाई से पहले डीएपी की जबरदस्त किल्लत थी और जगह-जगह हंगामे और प्रदर्शन हो रहे थे। यहां भारी मात्रा मिले डीएपी मिलने से  साफ हो रहा है कि डीएपी की कालाबाजारी हो रही थी। किसानों के नाम पर सस्ता खाद खरीदकर उसे केमिकल फैक्टरियों में बेचा जा रहा था। 

दरअसल, किसानों को दिए जाने वाले डीएपी और अन्य खाद पर अनुदान दिया जाता है। किसानों को डीएपी का कट्टा 1350 में मिलता है। इसमें 1650 रुपये का अनुदान होता है। औद्योगिक इकाइयों को अनुदान नहीं दिया जाता। उन्हें डीएपी का कट्टा 2950 रुपये में दिया जाता है। यूरिया का कट्टा किसानों को 266 में मिलता है, जिस पर 1650 रुपये का अनुदान होता है। यह अनुदान औद्योगिक इकाइयों को नहीं मिलता। ऐसे में माना जा रहा है कि किसानों के नाम पर खाद को खरीदा गया और उसे बिना मार्का के कट्टों में पैक कर कंपनियों को सप्लाई किया जा रहा था। 

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