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हाथरस : दूतावास में नहीं उठ रहा फोन, खाने की भी व्यवस्था नहीं

Sun, 27 Feb 2022 12:44 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 27 Feb 2022 12:44 AM IST
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Hathras: The phone is not picking up in the embassy, there is no arrangement for food
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ/सादाबाद (हाथरस)।
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यूरोपीय देश यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध के बीच यूक्रेन में फंसे भारत के मेडिकल छात्रों की सलामती को लेकर उनके परिवार वालों की चिंता लगातार बढ़ रही है। शनिवार को कस्बे के कुछ मेडिकल छात्रों ने यूक्रेन के वर्तमान हालातों को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। इसे देखने के बाद छात्रों के परिजनों की बेचैनी और बढ़ गई है। वीडियो में छात्र कह रहे हैं कि वह पोलैंड सीमा तक तो पहुंच गए हैं, लेकिन यहां खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। कुछ लोगों की सेहत भी खराब हो रही है, लेकिन उनके लिए दवाओं का इंतजाम नहीं है। भारतीय दूतावास के दफ्तर में फोन नहीं उठ रहा, इसलिए वह खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
इधर, इन छात्रों के परिजन इनके स्वदेश लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उनकी नजर छात्रों की सकुशल वापसी के लिए चल रहे भारत सरकार के प्रयासों पर भी टिकी है। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के बाद यूक्रेन की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। वहां रहने वाले अन्य देशों के विद्यार्थी इन हालातों से बुरी तरह प्रभावित हैं। खाने-पीने और दवा आदि की व्यवस्थाएं ध्वस्त हे चुकी हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के पास स्वदेश वापसी ही एकमात्र विकल्प रह गया है। कस्बे के छह से अधिक छात्र-छात्राएं यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे हुए हैं। कुछ छात्र-छात्राएं ऐसे इलाके में फंसे हैं, जहां से वह उनके परिजनों से संपर्क भी नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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यूक्रेन की बदलती तस्वीर लगातार अभिभावकों की परेशानी बढ़ा रही है। शनिवार को कस्बे के एक छात्र आलोक चौधरी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है। वीडियो को देखने के बाद यह साफ हो गया है कि यूक्रेन में स्थिति बेहद खराब है। आलोक व उनके दोस्त वीडियो में बता रहे हैं कि वह करीब 35 किलोमीटर पैदल चलकर पोलैंड सीमा तक तो पहुंच गए हैं, लेकिन यहां न खाने की व्यवस्था है और न पीने के पानी की। हालांकि भारतीय दूतावास मेडिकल विद्यार्थियों की निगरानी कर रहा है, लेकिन यूक्रेन के लगातार बदतर हो रहे हालातों के चलते बच्चों तक मदद नहीं पहुंच पा रही है।
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कस्बे के एक अन्य छात्र कुलदीप उपाध्याय ने वीडियो शेयर कर बताया कि वह काफी भारतीय छात्रों के साथ कीव शहर के निकट ही एक स्कूल के भवन में ठहरे हुए हैं। इस भवन में पहुंचने से पहले उन्हें काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा। भारतीय दूतावास की निगरानी में स्कूल के भवन में ठहरने के बाद इन मेडिकल विद्यार्थियों ने कुछ राहत जरूर महसूस की है, लेकिन वह चाहते हैं कि सरकार उन्हें जल्द से जल्द उनके घर पहुंचाए। दूसरी ओर इस तरह के वीडियो सामने आने के बाद विद्यार्थियों के अभिभावकों की बेचैनी और ज्यादा बढ़ गई है। वह लगातार सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि सभी भारतीय मेडिकल विद्यार्थियों को देश वापस लाने के लिए तेजी से प्रयास किए जाएं। सरकार द्वारा इस तरह के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने यूक्रेन में फंसे मेडिकल विद्यार्थियों की सूची तैयार कर ली है। इसे शासन को भेजा गया है, जिससे मेडिकल विद्यार्थियों को सकुशल वापस लाने में मदद मिल सके। संवाद
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