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हाथरस : आसपास के कई जिलों में रही रामवीर की मजबूत पकड़
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस की राजनीति में तो पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का दबदबा रहा ही, साथ ही आसपास के जिलों की राजनीति में उनकी काफी पकड़ रही। रामवीर राजनीति के माहिर खिलाड़ी थे। हाथरस के अलावा आगरा, अलीगढ़, एटा, बुलंदशहर और आसपास के कई जिलों की राजनीति में रामवीर दमदार चेहरा थे और एक समय में वह बसपा के दूसरे नंबर के नेता माने जाते थे।
जिले की तीनों विधानसभा सीटों को जीतकर रामवीर उपाध्याय ने रिकॉर्ड बनाया था। वह जिले के अकेले ऐसे राजनेता थे, जोकि पांच बार विधायक चुने गए और वह भी जिले की तीनों सीटों से। ब्राह्मण मतदाता रामवीर को वोट देते थे और दलितों का वोट बसपा के दम पर उन्हें मिलता था। ऐसे में रामवीर लगातार पांच बार चुनाव जीते।
इतना ही नहीं इसी फार्मूले के दम पर उन्होंने आगरा की राजनीति में पकड़ बनाई और उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय बसपा से वर्ष 2009 में सांसद चुनी गईं। इसके अलावा उनके छोटे भाई मुकुल उपाध्याय बसपा से ही अलीगढ़ की इगलास सीट से वर्ष 2002 में विधायक चुने गए। मुकुल उपाध्याय अलीगढ़ की स्थानीय निकाय सीट से एमएलसी भी चुने गए। ब्राह्मण समाज में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक दमदार चेहरा बनकर उभरे और कई जिलों की सियासत में उनका दखल रहा। संवाद
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हाथरस की राजनीति में तो पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का दबदबा रहा ही, साथ ही आसपास के जिलों की राजनीति में उनकी काफी पकड़ रही। रामवीर राजनीति के माहिर खिलाड़ी थे। हाथरस के अलावा आगरा, अलीगढ़, एटा, बुलंदशहर और आसपास के कई जिलों की राजनीति में रामवीर दमदार चेहरा थे और एक समय में वह बसपा के दूसरे नंबर के नेता माने जाते थे।
जिले की तीनों विधानसभा सीटों को जीतकर रामवीर उपाध्याय ने रिकॉर्ड बनाया था। वह जिले के अकेले ऐसे राजनेता थे, जोकि पांच बार विधायक चुने गए और वह भी जिले की तीनों सीटों से। ब्राह्मण मतदाता रामवीर को वोट देते थे और दलितों का वोट बसपा के दम पर उन्हें मिलता था। ऐसे में रामवीर लगातार पांच बार चुनाव जीते।
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इतना ही नहीं इसी फार्मूले के दम पर उन्होंने आगरा की राजनीति में पकड़ बनाई और उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय बसपा से वर्ष 2009 में सांसद चुनी गईं। इसके अलावा उनके छोटे भाई मुकुल उपाध्याय बसपा से ही अलीगढ़ की इगलास सीट से वर्ष 2002 में विधायक चुने गए। मुकुल उपाध्याय अलीगढ़ की स्थानीय निकाय सीट से एमएलसी भी चुने गए। ब्राह्मण समाज में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक दमदार चेहरा बनकर उभरे और कई जिलों की सियासत में उनका दखल रहा। संवाद
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