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हाथरस : 300 से ज्यादा इकाइयां कर रहीं भूगर्भ जल का दोहन, एनओसी सिर्फ 22 ने ली
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिले में पिछले 10 वर्षों में लगातार भूगर्भ जल स्तर गिरता जा रहा है। कई कई इलाकों में तो छह मीटर से अधिक तक भूगर्भ जल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। भूगर्भ जल विभाग की ओर से अब इस स्थिति से निपटने के लिए भूगर्भ जल अधिनियम के तहत भूगर्भ जल का अतिदोहन करने वाली फर्मों व संस्थाओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया गया है। पड़ताल में पता चला है कि जिले में करीब 300 फर्म व संस्थाएं भूगर्भ जल का दोहन कर रही हैं, लेकिन अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) इनमें से महज 22 संस्थाओं ने ही ले रखी है।
शासन की ओर से गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं। इसके बावजूद पिछले दस वर्षों में जिले के सभी इलाकों में भूगर्भ जल स्तर गिरा है। हैरानी की बात यह है कि जिले के ब्लॉक सहपऊ में 6.67 मीटर और सादाबाद में 5.1 मीटर तक जल का स्तर गिर गया है। हाथरस शहर में भी पिछले 10 सालों में 3.4 मीटर तक भूगर्भ जल का स्तर गिरा है। इस कारण नलकूप की गहरी बोरिंग होना शुरू हो गई हैं।
प्रदूषण विभाग के सर्वे के अनुसार जिले में करीब 300 फर्म व संस्थाएं भूगर्भ जल का अतिदोहन कर रही हैं। इनको भूगर्भ जल विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के कई बार निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन इनके संचालक अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। अब इन फर्म व संस्थाओं पर शिकंजा कसने की तैयारी भूगर्भ जल विभाग की ओर से शुरू कर दी गई है। गिरते भूगर्भ जल स्तर के कारण आम लोगों को भी सबमर्सिबल लगाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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ब्लॉक भूगर्भ जल स्तर- 2012 --- भूगर्भ जल स्तर 2022 -- जल स्तर गिरा (मी)
हसायन 5.82 9.32 -- 3.5
हाथरस -- 13.47-- 17.68 -- 4.21
मुरसान -- 18.48 -- 19.69 -- 1.21
सासनी -- 18.98 -- 21.12 -- 2.14
सादाबाद-- 24.07-- 26.55-- 2.48
सिकंदराराऊ -- 7.51--12.61-- 5.1
सहपऊ -- 14.7 --21.37 -- 6.67
हाथरस शहर -- 14.72-- 18.12 -- 3.4
अतिदोहित -- मुरसान, सहपऊ, सासनी।
क्रिटिकल -- हाथरस, सिकंदराराऊ।
सेमी क्रिटिकल -- सादाबाद ।
सुरक्षित -- हसायन।
गिरते जल स्तर को देखते हुए प्रशासन बहुत सख्त है। जो भी उद्योग व्यावसायिक रूप में जल का प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे सभी उद्योगों व संस्थाओं को भूगर्भ जल अधिनियम के तहत अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान अनापत्ति प्रमाणपत्र न मिलने की दशा में विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-नम्रता जैसवाल, नोडल अधिकारी
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जिले में पिछले 10 वर्षों में लगातार भूगर्भ जल स्तर गिरता जा रहा है। कई कई इलाकों में तो छह मीटर से अधिक तक भूगर्भ जल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। भूगर्भ जल विभाग की ओर से अब इस स्थिति से निपटने के लिए भूगर्भ जल अधिनियम के तहत भूगर्भ जल का अतिदोहन करने वाली फर्मों व संस्थाओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया गया है। पड़ताल में पता चला है कि जिले में करीब 300 फर्म व संस्थाएं भूगर्भ जल का दोहन कर रही हैं, लेकिन अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) इनमें से महज 22 संस्थाओं ने ही ले रखी है।
शासन की ओर से गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं। इसके बावजूद पिछले दस वर्षों में जिले के सभी इलाकों में भूगर्भ जल स्तर गिरा है। हैरानी की बात यह है कि जिले के ब्लॉक सहपऊ में 6.67 मीटर और सादाबाद में 5.1 मीटर तक जल का स्तर गिर गया है। हाथरस शहर में भी पिछले 10 सालों में 3.4 मीटर तक भूगर्भ जल का स्तर गिरा है। इस कारण नलकूप की गहरी बोरिंग होना शुरू हो गई हैं।
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प्रदूषण विभाग के सर्वे के अनुसार जिले में करीब 300 फर्म व संस्थाएं भूगर्भ जल का अतिदोहन कर रही हैं। इनको भूगर्भ जल विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने के कई बार निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन इनके संचालक अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। अब इन फर्म व संस्थाओं पर शिकंजा कसने की तैयारी भूगर्भ जल विभाग की ओर से शुरू कर दी गई है। गिरते भूगर्भ जल स्तर के कारण आम लोगों को भी सबमर्सिबल लगाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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ब्लॉक भूगर्भ जल स्तर- 2012 --- भूगर्भ जल स्तर 2022 -- जल स्तर गिरा (मी)
हसायन 5.82 9.32 -- 3.5
हाथरस -- 13.47-- 17.68 -- 4.21
मुरसान -- 18.48 -- 19.69 -- 1.21
सासनी -- 18.98 -- 21.12 -- 2.14
सादाबाद-- 24.07-- 26.55-- 2.48
सिकंदराराऊ -- 7.51--12.61-- 5.1
सहपऊ -- 14.7 --21.37 -- 6.67
हाथरस शहर -- 14.72-- 18.12 -- 3.4
अतिदोहित -- मुरसान, सहपऊ, सासनी।
क्रिटिकल -- हाथरस, सिकंदराराऊ।
सेमी क्रिटिकल -- सादाबाद ।
सुरक्षित -- हसायन।
गिरते जल स्तर को देखते हुए प्रशासन बहुत सख्त है। जो भी उद्योग व्यावसायिक रूप में जल का प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे सभी उद्योगों व संस्थाओं को भूगर्भ जल अधिनियम के तहत अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान अनापत्ति प्रमाणपत्र न मिलने की दशा में विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-नम्रता जैसवाल, नोडल अधिकारी