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हाथरस : गणित पर चर्चा करके मनाया गया गणित दिवस
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हाथरस : गणितज्ञ रामानुजन की जयंती पर विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में होतीं प्रतियोगिताएं। संवाद
- फोटो : SIKANDHRA RAHU
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
श्रीराधा बिहारी पब्लिक स्कूल में भारत के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का जन्मदिवस गणित दिवस के रूप में मनाया गया। विद्यालय के निदेशक प्रदीप सेंगर, संरक्षक एपी सिंह, प्रबंधक पुनीत सिंह एवं प्रिंसिपल विक्रम सिंह ने कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की।
विद्यार्थियों द्वारा विशिष्ट प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। श्रीनिवास रामानुजन के जीवन परिचय व उनके द्वारा गणित के क्षेत्र में किए गए कार्यों का वर्णन प्रिंसिपल विक्रम सिंह द्वारा विस्तृत रूप से किया गया। उन्होंने कहा कि श्रीनिवास रामानुजन द्वारा अल्प आयु में विभिन्न प्रकार के सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया था। इनमें से कुछ आज भी अन्य गणितज्ञ द्वारा सिद्ध नहीं किए जा सके। उदाहरण के तौर पर त्रिकोणमिति संख्या पद्धति आदि के सिद्धांत मुख्य रूप से शामिल हैं। 12 वर्ष की अल्प आयु में उन्होंने अपनी विशिष्ट योग्यता को दिखाते हुए महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए।
उन्होंने जादुई नंबर के बारे में भी बताया। उन्होंने विदेश में जाकर भारतीय मेधा का लोहा मनवाया था। सच में अगर कहा जाए तो श्रीनिवास रामानुजन वास्तव में गणित के अथाह सागर की तरह से थे। इसके साथ ही विद्यालय में एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। यह प्रतियोगिता हिंदी व अंग्रेजी दोनों माध्यम में आयोजित की गई। विद्यालय के चारों सदनों के छात्रों ने भागीदारी की। संवाद
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श्रीराधा बिहारी पब्लिक स्कूल में भारत के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का जन्मदिवस गणित दिवस के रूप में मनाया गया। विद्यालय के निदेशक प्रदीप सेंगर, संरक्षक एपी सिंह, प्रबंधक पुनीत सिंह एवं प्रिंसिपल विक्रम सिंह ने कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की।
विद्यार्थियों द्वारा विशिष्ट प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। श्रीनिवास रामानुजन के जीवन परिचय व उनके द्वारा गणित के क्षेत्र में किए गए कार्यों का वर्णन प्रिंसिपल विक्रम सिंह द्वारा विस्तृत रूप से किया गया। उन्होंने कहा कि श्रीनिवास रामानुजन द्वारा अल्प आयु में विभिन्न प्रकार के सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया था। इनमें से कुछ आज भी अन्य गणितज्ञ द्वारा सिद्ध नहीं किए जा सके। उदाहरण के तौर पर त्रिकोणमिति संख्या पद्धति आदि के सिद्धांत मुख्य रूप से शामिल हैं। 12 वर्ष की अल्प आयु में उन्होंने अपनी विशिष्ट योग्यता को दिखाते हुए महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए।
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उन्होंने जादुई नंबर के बारे में भी बताया। उन्होंने विदेश में जाकर भारतीय मेधा का लोहा मनवाया था। सच में अगर कहा जाए तो श्रीनिवास रामानुजन वास्तव में गणित के अथाह सागर की तरह से थे। इसके साथ ही विद्यालय में एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। यह प्रतियोगिता हिंदी व अंग्रेजी दोनों माध्यम में आयोजित की गई। विद्यालय के चारों सदनों के छात्रों ने भागीदारी की। संवाद
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