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हाथरस : मेला पंडाल में भरा कई फीट पानी, अवैध कब्जों की भरमार

Fri, 17 Sep 2021 09:02 PM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Sep 2021 09:02 PM IST
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Hathras: Many feet of water filled in the fair pandal, full of illegal occupations
हाथरस : मेला परिसर में भरा पानी। संवाद - फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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इस बार भी बृज क्षेत्र के लक्खी मेला श्रीदाऊजी महाराज का जिले में सांकेतिक आयोजन ही हो रहा है। ऐसे में प्रशासन की तरफ से मेला व किला राजा दयाराम परिसर की सुधि नहीं ली जा रही। मेला पंडाल में कई-कई फीट पानी भरा है। पुरातन महत्व के मंदिर व किला क्षेत्र की कई दीवारें ढहती जा रही हैं। टीलों का क्षरण हो रहा है और जमीन पर लगातार अवैध कब्जे हो रहे हैं।
मंदिर श्रीदाऊजी महाराज 200 साल पुराना है। यह राष्ट्रीय महत्व की पुरातत्व संरक्षित धरोहरों की सूची में सूचीबद्ध स्मारक है। यह मंदिर किला राजा दयाराम का एक भाग है। इस मंदिर व किला क्षेत्र में अंग्रेजों की जंग के निशां भी मौजूद हैं। वर्ष 1817 में कई दिन युद्ध के पश्चात अंग्रेजों के इस किले व मंदिर क्षेत्र पर कब्जा किया था। करीब एक सदी से ज्यादा समय से इस मंदिर पर बृज क्षेत्र का लक्खी मेला आयोजित हो रहा है। कोरोना संक्रमण के चलते पिछले दो साल से यह मेला आयोजित नहीं हो रहा तो मेला और किला क्षेत्र पर किसी का ध्यान नहीं है। मेला क्षेत्र में काफी बड़ा पंडाल भी है।
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यहां साल ऐतिहासिक कुश्तियां होती हैं और रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं, जिनमें हजारों की भीड़ भी मेले के समय जुड़ती है, लेकिन वर्तमान में इस पंडाल में कई कई फुट गंदा पानी भरा है। मंदिर के निकट नीचे की कई दीवारें जर्जर हालत में हैं और ढह गई हैं। इसी तरह मंदिर व किला क्षेत्र के टीलों का लगातार क्षरण हो रहा है। किला व मेला क्षेत्र में लगातार अतिक्रमणकारियों का बोलबाला है। अवैध कब्जे इस भूमि पर हो रहे हैं और इन्हें हटवाने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा। इस पुरातन स्थल पर 392 अतिक्रमण तो टीम पहले ही चिन्हित कर चुकी है। लगातार इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। इस बार भी चूंकि मेला व किला क्षेत्र में ज्यादा चहल-पहल नहीं होगी तो ऐसे में पुरातन महत्व के इस स्थल के संरक्षण व सौंदर्यीकरण की ओर प्रशासन का ध्यान नहीं है।
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जरूरत इस बात की है इस ऐतिहासिक स्थल का संरक्षण और सौंदर्यीकरण हो। इस समय तो मेला पंडाल में गंदा पानी भरा है। इससे संक्रामक बीमारी भी फैल सकती है। इस जलभराव को दूर कराया जाए। पुरातन महत्व के इस स्थल को अतिक्रमण से मुक्त किया जाए और इसके बाद ऐसी व्यवस्था की जाए कि यहां अवैध कब्जा न हो। पूर्व में जो सौंदर्यीकरण के काम प्रस्तावित हैं, उन पर अमल किया जाए।

-हरीश कुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता
मंदिर के नीचे की ओर कई दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इनकी मरम्मत कराई जाए। मेले के और भव्य बनाया जाए। यहां पर्याप्त सफाई कराई जाए और इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पहले जो योजनाएं बन चुकी हैं, उन पर अमल किया जाए। जनप्रतिनिधि भी इस काम के लिए आगे आएं, जिससे यह ऐतिहासिक स्थल अपना स्वरूप बचाए रखे।
-डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा फौजी, समाजसेवी
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