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हाथरस : निर्माण के बाद से ही शौचालय पर लटका ताला
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हाथरस : कस्बा के मोहल्ला छिपैटी में सामुदायिक शौचालय पर लटका ताला। संवाद
- फोटो : SASNI
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सासनी (हाथरस)
प्रधानमंत्री के महत्वाकांछी स्वच्छ भारत मिशन की क्षेत्र में खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। करीब तीन साल पूर्व कस्बा के मोहल्ला छिपैटी में सामुदायिक शौचालय बनवाया गया था। इस पर आज तक ताला लटका हुआ है। शासन ने गरीबों जनता की सहूलियत के लिए इस शौचालय का निर्माण कराया था, लेकिन जनहित में इसका कोई उपयोग नहीं होने पर यह शौचालय शोपीस साबित हो रहे हैं।
जरूरतमंद लोग शौच के लिए इधर-उधर भटकते रहते है और इसका उपयोग नहीं करपाते है। यह सामुदायिक शौचालय कस्बा की मलिन बस्ती में बना है। इसके चारों ओर जरूरतमंद लोग निवास करते है, लेकिन आज तक कोई जरूरतमंद आज तक इसका उपयोग नहीं कर पाया है। पानी की आपूर्ति के लिए शौचालय की छत पर दो टंकियां रखी हैं। शौचालय के गेट के निकट खुले में सबमर्सिबल भी लगी हुई है।
मैं मोहल्ला छिपैटी का रहने वाला हूं। चंद कदम की दूरी पर सामुदायिक शौचालय बना हुआ है, लेकिन इस पर ताला लटका हुआ है। जरूरतमंद लोगों के लिए इसका कोई उपयोग नहीं है। इसके निर्माण पर सरकारी धन की बर्बादी हुई है।
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-विनोद वार्ष्णेय
मैं भी मोहल्ला छिपैटी का रहने वाला हूं। गंदे नाले के सहारे सामुदायिक शौचालय बना हुआ है। करीब तीन वर्ष बीत गए, लेकिन आज तक इस पर ताला लटका हुआ है। जनता के लिए कोई इसका कोई उपयोग नहीं है।
-चंद्रदेव
छिपैटी जाने वाले मुख्य मार्ग पर मेरी दुकान है। जो शौचालय से जाने वाले रास्ते पर चंद कदम की दूरी पर है। आने-जाने वाले ग्राहक भी इधर-उधर भटकते रहते है। शौचालय का प्रयोग नहीं कर पाते है। ताला लटका हुआ है।
-योगेश वार्ष्णेय
मोहल्ला छिपैटी में बना शौचालय जरूरतमंद लोगों के लिए बनाया गया था। यह ऐसी जगह बना है, जहां हर आदमी इसका उपयोग कर सकता है, लेकिन इस पर ताला लटका हुआ है। इस वजह से यह जरूरतमंद लोगों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहा है।
-कौशल किशोर वार्ष्णेय
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प्रधानमंत्री के महत्वाकांछी स्वच्छ भारत मिशन की क्षेत्र में खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। करीब तीन साल पूर्व कस्बा के मोहल्ला छिपैटी में सामुदायिक शौचालय बनवाया गया था। इस पर आज तक ताला लटका हुआ है। शासन ने गरीबों जनता की सहूलियत के लिए इस शौचालय का निर्माण कराया था, लेकिन जनहित में इसका कोई उपयोग नहीं होने पर यह शौचालय शोपीस साबित हो रहे हैं।
जरूरतमंद लोग शौच के लिए इधर-उधर भटकते रहते है और इसका उपयोग नहीं करपाते है। यह सामुदायिक शौचालय कस्बा की मलिन बस्ती में बना है। इसके चारों ओर जरूरतमंद लोग निवास करते है, लेकिन आज तक कोई जरूरतमंद आज तक इसका उपयोग नहीं कर पाया है। पानी की आपूर्ति के लिए शौचालय की छत पर दो टंकियां रखी हैं। शौचालय के गेट के निकट खुले में सबमर्सिबल भी लगी हुई है।
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मैं मोहल्ला छिपैटी का रहने वाला हूं। चंद कदम की दूरी पर सामुदायिक शौचालय बना हुआ है, लेकिन इस पर ताला लटका हुआ है। जरूरतमंद लोगों के लिए इसका कोई उपयोग नहीं है। इसके निर्माण पर सरकारी धन की बर्बादी हुई है।
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-विनोद वार्ष्णेय
मैं भी मोहल्ला छिपैटी का रहने वाला हूं। गंदे नाले के सहारे सामुदायिक शौचालय बना हुआ है। करीब तीन वर्ष बीत गए, लेकिन आज तक इस पर ताला लटका हुआ है। जनता के लिए कोई इसका कोई उपयोग नहीं है।
-चंद्रदेव
छिपैटी जाने वाले मुख्य मार्ग पर मेरी दुकान है। जो शौचालय से जाने वाले रास्ते पर चंद कदम की दूरी पर है। आने-जाने वाले ग्राहक भी इधर-उधर भटकते रहते है। शौचालय का प्रयोग नहीं कर पाते है। ताला लटका हुआ है।
-योगेश वार्ष्णेय
मोहल्ला छिपैटी में बना शौचालय जरूरतमंद लोगों के लिए बनाया गया था। यह ऐसी जगह बना है, जहां हर आदमी इसका उपयोग कर सकता है, लेकिन इस पर ताला लटका हुआ है। इस वजह से यह जरूरतमंद लोगों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहा है।
-कौशल किशोर वार्ष्णेय