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हाथरस : गंगाघाट जाने के लिए बसों की किल्लत से जूझेंगे कांवड़िये
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
इस बार महाशिवरात्रि के पर्व पर गंगा घाटों के लिए जाने वाले कांवड़ियों को रोडवेज बसों की कमी का सामना करना पड़ेगा। इस कारण उन्हें गंगाघाट तक पहुंचने में मुश्किलों से जूझना पड़ेगा। उन्हें निजी और डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ेगा। इस पर खर्चा भी रोडवेज बस के सफर के मुकाबले ज्यादा आएगा। गौरतलब है कि हाथरस डिपो की 41 बसें चुनाव में पुलिस बल को लेकर चली गई हैं। ये बसें महाशिवरात्रि पर्व के बाद लौटेंगी।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। इनमें से अधिकांश बसें चुनाव में चली गई हैं। बसों के जाने के कारण यात्रियों को सहालग में काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है। 30 बसें मतगणना के बाद वापस आएंगी।
11 बसें पांचवें चरण का चुनाव कराने के बाद आठ मार्च को लौटेंगी। इस कारण कांवड़ियों को गंगा घाटों तक पहुंचने में दिक्कतें आएंगी। इस मामले में सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) शशी रानी का कहना है कि वर्तमान में दो दर्जन से अधिक बसें मार्ग पर चल रही हैं। बाकी बसें चुनाव में गई हैं। संवाद
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इस बार महाशिवरात्रि के पर्व पर गंगा घाटों के लिए जाने वाले कांवड़ियों को रोडवेज बसों की कमी का सामना करना पड़ेगा। इस कारण उन्हें गंगाघाट तक पहुंचने में मुश्किलों से जूझना पड़ेगा। उन्हें निजी और डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ेगा। इस पर खर्चा भी रोडवेज बस के सफर के मुकाबले ज्यादा आएगा। गौरतलब है कि हाथरस डिपो की 41 बसें चुनाव में पुलिस बल को लेकर चली गई हैं। ये बसें महाशिवरात्रि पर्व के बाद लौटेंगी।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 77 बसें हैं। इनमें से अधिकांश बसें चुनाव में चली गई हैं। बसों के जाने के कारण यात्रियों को सहालग में काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है। 30 बसें मतगणना के बाद वापस आएंगी।
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11 बसें पांचवें चरण का चुनाव कराने के बाद आठ मार्च को लौटेंगी। इस कारण कांवड़ियों को गंगा घाटों तक पहुंचने में दिक्कतें आएंगी। इस मामले में सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) शशी रानी का कहना है कि वर्तमान में दो दर्जन से अधिक बसें मार्ग पर चल रही हैं। बाकी बसें चुनाव में गई हैं। संवाद
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