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हाथरस : नदियों पर हो रहे कार्यों की गुणवत्ता परखेंगे अवर अभियंता
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
भारत सरकार ने समस्त नदियों के जीर्णोद्धार के लिए इस वित्तीय वर्ष में एक विशेष कार्ययोजना बनाकर क्षतिग्रस्त बांधों की मरम्मत, चेक डैम बनवाने, पौधरोपण कराने, कैचमेंट एरिया को उपयोगी बनाकर नदियों के जल प्रवाह को स्वच्छ एवं सुधार रूप से बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन नदियों पर चल रहे कार्यों की गुणवत्ता को प्रतिदिन परखने के लिए जिलाधिकारी रमेश रंजन ने सिंचाई विभाग के अवर अभियंताओं (जेई) को नामित किया है। उन्होंने कहा है कि सभी जेई कार्यस्थल पर पहुंचकर कार्य की गुणवत्ता परखेंगे। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में डीएम ने नदियों का भ्रमण कर जीर्णोद्धार का खाका खींचा था। इस दौरान सिंचाई विभाग का कोई भी अवर अभियंता एवं सहायक अभियंता तकनीकी पर्यवेक्षण के लिए उपस्थित नहीं था, जबकि सिंचाई विभाग हाथरस जल संरक्षण संबंधी कार्यों का नोडल विभाग है। डीएम ने कहा है कि जिले में प्रवाहित हो रही नदियों के रखरखाव का दायित्व भी सिंचाई विभाग का है।
सिंचाई विभाग के अभियंताओं की अनुश्रवण और तकनीकी पर्यवेक्षण के लिए ड्यूटी लगाई जाती है। उन्होंने कहा कि ईशन नदी, सेंगर नदी और करवन नदी पर हो रहे कार्यों की अवर अभियंता मौके पर देखरेख कर इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगे। सहायक अभियंता सप्ताह में कम से कम एक बार और अधिशासी अभियंता 15 दिन में कम से कम एक बार पूरी नदी एवं उसके कैचमेंट एरिया का स्वयं निरीक्षण करेंगे। संवाद
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भारत सरकार ने समस्त नदियों के जीर्णोद्धार के लिए इस वित्तीय वर्ष में एक विशेष कार्ययोजना बनाकर क्षतिग्रस्त बांधों की मरम्मत, चेक डैम बनवाने, पौधरोपण कराने, कैचमेंट एरिया को उपयोगी बनाकर नदियों के जल प्रवाह को स्वच्छ एवं सुधार रूप से बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन नदियों पर चल रहे कार्यों की गुणवत्ता को प्रतिदिन परखने के लिए जिलाधिकारी रमेश रंजन ने सिंचाई विभाग के अवर अभियंताओं (जेई) को नामित किया है। उन्होंने कहा है कि सभी जेई कार्यस्थल पर पहुंचकर कार्य की गुणवत्ता परखेंगे। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में डीएम ने नदियों का भ्रमण कर जीर्णोद्धार का खाका खींचा था। इस दौरान सिंचाई विभाग का कोई भी अवर अभियंता एवं सहायक अभियंता तकनीकी पर्यवेक्षण के लिए उपस्थित नहीं था, जबकि सिंचाई विभाग हाथरस जल संरक्षण संबंधी कार्यों का नोडल विभाग है। डीएम ने कहा है कि जिले में प्रवाहित हो रही नदियों के रखरखाव का दायित्व भी सिंचाई विभाग का है।
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सिंचाई विभाग के अभियंताओं की अनुश्रवण और तकनीकी पर्यवेक्षण के लिए ड्यूटी लगाई जाती है। उन्होंने कहा कि ईशन नदी, सेंगर नदी और करवन नदी पर हो रहे कार्यों की अवर अभियंता मौके पर देखरेख कर इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करेंगे। सहायक अभियंता सप्ताह में कम से कम एक बार और अधिशासी अभियंता 15 दिन में कम से कम एक बार पूरी नदी एवं उसके कैचमेंट एरिया का स्वयं निरीक्षण करेंगे। संवाद
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