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हाथरस : निर्दलीय सदस्यों के हाथ में है जीत की चाभी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत की चाभी निर्दलीय सदस्यों के हाथ में है। इस स्थिति में कुछ निर्दलीय सदस्यों के भाव भी बढ़ गए हैं और उन्होंने नखरे दिखाना शुरू कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत में इस बार सबसे ज्यादा 10 सदस्य निर्दलीय निर्वाचित हुए हैं। किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में इन सदस्यों की पूछ काफी बढ़ गई है। अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले दावेदारों ने इनसे संपर्क करना शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि तीन सदस्य एक दावेदार के घर पर भी गए और बातचीत भी हुई। इसमें तो एक पार्टी समर्थित सदस्य भी था।
सूत्र बताते हैं कि कुछ सदस्यों के नखरे बढ़ गए हैं। उन्हें मालूम है कि उनका वोट ही दावेदारों को अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाएगा। सदस्यों से संपर्क के साथ मोलभाव भी शुरू हो गया है। इस स्थिति में यह निर्दलीय सदस्य नखरे दिखा रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ पार्टी के समर्थित उम्मीदवार भी दावेदारों की टोह ले रहे हैं। उन्हें मालूम है कि वह चाहे अपनी पार्टी के निर्देशों के विपरीत भी वोट दे दें तो भी उनकी जिला पंचायत से सदस्यता नहीं जाएगी। इसकी वजह यह है कि किसी भी पार्टी ने उन्हें अपने चुनाव चिह्न पर यह चुनाव नहीं लड़ाया है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत की चाभी निर्दलीय सदस्यों के हाथ में है। इस स्थिति में कुछ निर्दलीय सदस्यों के भाव भी बढ़ गए हैं और उन्होंने नखरे दिखाना शुरू कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत में इस बार सबसे ज्यादा 10 सदस्य निर्दलीय निर्वाचित हुए हैं। किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में इन सदस्यों की पूछ काफी बढ़ गई है। अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले दावेदारों ने इनसे संपर्क करना शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि तीन सदस्य एक दावेदार के घर पर भी गए और बातचीत भी हुई। इसमें तो एक पार्टी समर्थित सदस्य भी था।
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सूत्र बताते हैं कि कुछ सदस्यों के नखरे बढ़ गए हैं। उन्हें मालूम है कि उनका वोट ही दावेदारों को अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाएगा। सदस्यों से संपर्क के साथ मोलभाव भी शुरू हो गया है। इस स्थिति में यह निर्दलीय सदस्य नखरे दिखा रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ पार्टी के समर्थित उम्मीदवार भी दावेदारों की टोह ले रहे हैं। उन्हें मालूम है कि वह चाहे अपनी पार्टी के निर्देशों के विपरीत भी वोट दे दें तो भी उनकी जिला पंचायत से सदस्यता नहीं जाएगी। इसकी वजह यह है कि किसी भी पार्टी ने उन्हें अपने चुनाव चिह्न पर यह चुनाव नहीं लड़ाया है।
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