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हाथरस : हाथरस सदर सीट से पहली बार बनीं महिला विधायक
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
हाथरस सदर विधानसभा सीट पर इस बार भाजपा की अंजुला माहौर जीती हैं। अंजुला के रूप में पहली बार सदर सीट से कोई महिला विधायक जीती हैं। इनसे पहले सिकंदराराऊ सीट से भी एक महिला चुनाव जीत चुकी हैं। हालांकि सादाबाद विधानसभा सीट से आज तक कोई भी महिला चुनाव नहीं जीती।
हाथरस संसदीय सीट से जरूर सारिका सिंह के रूप में एक महिला एक बार चुनाव जीत चुकी है। आधी आबादी को प्रतिनिधित्व देने की बात तो हर दल कहता है, लेकिन राजनीति में आधी आबादी को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता।
महिलाओं के लिए आरक्षित पदों की बात छोड़ दें तो जिले की राजनीति में आधी आबादी हाशिए पर ही रही है। जिले की तीन विधानसभा सीटों का यदि इतिहास देखें तो वर्ष 1980 में कांग्रेस की पुष्पा चौहान ने चुनाव जीता और विधानसभा में पहुंचीं। उनसे पहले और उनके बाद कई महिलाएं चुनाव लड़ीं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
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इस बार कांग्रेस ने सिकंदराराऊ सीट पर डॉ. छवि वार्ष्णेय को मैदान में उतारा तो भाजपा ने हाथरस सदर सीट पर अंजुला माहौर को। इसके अलावा अन्य किसी बड़े राजनीतिक दल ने किसी महिला को टिकट नहीं दिया था। इस चुनाव में अंजुला माहौर ने रिकॉर्ड एक लाख वोटों से जीत हासिल की है।
वहीं कांग्रेस की छवि वार्ष्णेय बुरी तरह से पराजित हुईं और उनकी जमानत भी जब्त हो गई। वर्ष 2009 में हाथरस संसदीय सीट से रालोद प्रत्याशी के रूप में सारिका सिंह चुनाव लड़ीं थीं और जीती थीं। उनके अलावा आज तक कोई महिला इस संसदीय सीट से निर्वाचित नहीं हुई है।
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हाथरस सदर विधानसभा सीट पर इस बार भाजपा की अंजुला माहौर जीती हैं। अंजुला के रूप में पहली बार सदर सीट से कोई महिला विधायक जीती हैं। इनसे पहले सिकंदराराऊ सीट से भी एक महिला चुनाव जीत चुकी हैं। हालांकि सादाबाद विधानसभा सीट से आज तक कोई भी महिला चुनाव नहीं जीती।
हाथरस संसदीय सीट से जरूर सारिका सिंह के रूप में एक महिला एक बार चुनाव जीत चुकी है। आधी आबादी को प्रतिनिधित्व देने की बात तो हर दल कहता है, लेकिन राजनीति में आधी आबादी को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता।
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महिलाओं के लिए आरक्षित पदों की बात छोड़ दें तो जिले की राजनीति में आधी आबादी हाशिए पर ही रही है। जिले की तीन विधानसभा सीटों का यदि इतिहास देखें तो वर्ष 1980 में कांग्रेस की पुष्पा चौहान ने चुनाव जीता और विधानसभा में पहुंचीं। उनसे पहले और उनके बाद कई महिलाएं चुनाव लड़ीं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
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इस बार कांग्रेस ने सिकंदराराऊ सीट पर डॉ. छवि वार्ष्णेय को मैदान में उतारा तो भाजपा ने हाथरस सदर सीट पर अंजुला माहौर को। इसके अलावा अन्य किसी बड़े राजनीतिक दल ने किसी महिला को टिकट नहीं दिया था। इस चुनाव में अंजुला माहौर ने रिकॉर्ड एक लाख वोटों से जीत हासिल की है।
वहीं कांग्रेस की छवि वार्ष्णेय बुरी तरह से पराजित हुईं और उनकी जमानत भी जब्त हो गई। वर्ष 2009 में हाथरस संसदीय सीट से रालोद प्रत्याशी के रूप में सारिका सिंह चुनाव लड़ीं थीं और जीती थीं। उनके अलावा आज तक कोई महिला इस संसदीय सीट से निर्वाचित नहीं हुई है।