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हाथरस : पानी की व्यवस्था नहीं होने से दोबारा शौचालय का नहीं हुआ इस्तेमाल
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हाथरस : सिकंदराराऊ में बदहाल पड़े शौचालय। संवाद
- फोटो : SIKANDHRA RAHU
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिकंदराराऊ (हाथरस)
नगर को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए नगर पालिका ने जगह-जगह प्लास्टिक के शौचालय रखवाए थे, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं होने की वजह से ये शौचालय कभी दोबारा इस्तेमाल करने लायक बचे ही नहीं। नगर पालिका प्रशासन की इस लापरवाही की वजह से लाखों रुपये बर्बाद हो गए।
बता दें कि खुले में शौच से मुक्त अभियान के तहत पालिका ने नगर में चारों तरफ प्लास्टिक के शौचालयों के सेट रखवाए थे। अधिकांश सैट उस जगह पर रखवाए थे जहां कि नालियां थी और लोग लोटा लेकर वहां सुबह शाम शौच करते थे। कई जगह पानी की टंकियां भी रखवाई गई। लेकिन अतिरिक्त कर्मी नियुक्त नहीं करने के कारण न तो इनकी सफाई हो पाई और न हीं पानी की इंतजाम किया गया।
कुछ ही दिन बाद ये शौचालय इतने गंदे हो गए कि यह इस्तेमाल करने लायक ही नहीं बचा। लोगों की शिकायत पर इन्हें चालू करने के प्रयास किया गया लेकिन कर्मियों की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पाया। कई शौचालय आग लगने के कारण जल गए तो कुछ इतने गंदे हालात में है कि लोग इस्तेमाल ही नहीं करते। कुछ शौचालयों की शीट लोग उखाड़ कर ले गए हैं और उसे अपने घरों में लगवा लिया है। संवाद
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नगर को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए नगर पालिका ने जगह-जगह प्लास्टिक के शौचालय रखवाए थे, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं होने की वजह से ये शौचालय कभी दोबारा इस्तेमाल करने लायक बचे ही नहीं। नगर पालिका प्रशासन की इस लापरवाही की वजह से लाखों रुपये बर्बाद हो गए।
बता दें कि खुले में शौच से मुक्त अभियान के तहत पालिका ने नगर में चारों तरफ प्लास्टिक के शौचालयों के सेट रखवाए थे। अधिकांश सैट उस जगह पर रखवाए थे जहां कि नालियां थी और लोग लोटा लेकर वहां सुबह शाम शौच करते थे। कई जगह पानी की टंकियां भी रखवाई गई। लेकिन अतिरिक्त कर्मी नियुक्त नहीं करने के कारण न तो इनकी सफाई हो पाई और न हीं पानी की इंतजाम किया गया।
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कुछ ही दिन बाद ये शौचालय इतने गंदे हो गए कि यह इस्तेमाल करने लायक ही नहीं बचा। लोगों की शिकायत पर इन्हें चालू करने के प्रयास किया गया लेकिन कर्मियों की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पाया। कई शौचालय आग लगने के कारण जल गए तो कुछ इतने गंदे हालात में है कि लोग इस्तेमाल ही नहीं करते। कुछ शौचालयों की शीट लोग उखाड़ कर ले गए हैं और उसे अपने घरों में लगवा लिया है। संवाद
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