{"_id":"5efb7bb78ebc3e42b2400e48","slug":"hathras-devashini-ekadashi-will-be-celebrated-today-band-bande-baaraat-will-be-held-hathras-news-ali237470869","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथरस: आज मनाई जाएगी देवश्यनी एकादशी, थमेंगे बैंड बाजा बारात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथरस: आज मनाई जाएगी देवश्यनी एकादशी, थमेंगे बैंड बाजा बारात
विज्ञापन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
देवशयनी एकादशी बुधवार को मनाई जाएगी। इसके साथ देवशयन के लिए पाताल लोक चले जाएंगे। शुभ कार्य थम जाएंगे। अगले चार माह तक शहनाई पर विराम रहेगा। मंगलवार के एक दिन पहले शादियों की धूम रही। शहर से देहात तक सीमित लोगों के साथ शादियों का आयोजन हुआ।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि देवशयन के दौरान कोई मांगलिक कार्य नहीं होता है, क्योंकि इष्ट के शयन करने से मनोकामना पूर्ति नहीं होती है। इस दिन एकादशी के कारण देवशयनी एकादशी कहा जाता है। बुधवार की सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें। चौकी पर भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराएं। छवि चित्र रख सकते हैं। भगवान विष्णु के समक्ष देसी घी का दीपक जलाएं।
पूजा में तुलसी के पत्ते का प्रयोग करें। एकादशी व्रत की कथा का श्रवण करें। व्रत धारण करें। फल, फूल मिष्ठान आदि का भगवान को भोग लगाए। प्रसाद को कुटुंब सहित ग्रहण करें। शाम को दीपक जलाकर आरती करें। मनोकामना पूर्ति की कामना करें। द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन करा दान दक्षिणा आदि दें। शहर के देवालयों में भगवान की विशेष पूजा अर्चना होगी। भव्य श्रंगार शृंगार के साथ प्रसाद वितरण भी होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
देवशयनी एकादशी बुधवार को मनाई जाएगी। इसके साथ देवशयन के लिए पाताल लोक चले जाएंगे। शुभ कार्य थम जाएंगे। अगले चार माह तक शहनाई पर विराम रहेगा। मंगलवार के एक दिन पहले शादियों की धूम रही। शहर से देहात तक सीमित लोगों के साथ शादियों का आयोजन हुआ।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि देवशयन के दौरान कोई मांगलिक कार्य नहीं होता है, क्योंकि इष्ट के शयन करने से मनोकामना पूर्ति नहीं होती है। इस दिन एकादशी के कारण देवशयनी एकादशी कहा जाता है। बुधवार की सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें। चौकी पर भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराएं। छवि चित्र रख सकते हैं। भगवान विष्णु के समक्ष देसी घी का दीपक जलाएं।
विज्ञापन
पूजा में तुलसी के पत्ते का प्रयोग करें। एकादशी व्रत की कथा का श्रवण करें। व्रत धारण करें। फल, फूल मिष्ठान आदि का भगवान को भोग लगाए। प्रसाद को कुटुंब सहित ग्रहण करें। शाम को दीपक जलाकर आरती करें। मनोकामना पूर्ति की कामना करें। द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन करा दान दक्षिणा आदि दें। शहर के देवालयों में भगवान की विशेष पूजा अर्चना होगी। भव्य श्रंगार शृंगार के साथ प्रसाद वितरण भी होगा।
विज्ञापन