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हाथरस : घर से ही शुरू हो हिंदी के सम्मान का अभियान
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हाथरस : जितेंद्र कुमार, शिक्षक। संवाद
- फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हिंदी केवल हमारी मातृ भाषा ही नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति का अंग भी है। हिंदी को प्रोत्साहन देने की शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी होगी। इसके लिए माहौल तैयार करना होगा।
घर में बच्चों को हिंदी लिखने, पढ़ने व बोलने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों में सभी कामकाज व पत्र व्यवहार हिंदी भाषा में ही होना चाहिए। यह काम वर्तमान में अंग्रेजी में किया जा रहा है। ‘हिंदी हैं हम’, अभियान के तहत अमर उजाला ने शिक्षक-शिक्षिकाओं से बातचीत की तो उन्होंने यह बातें कहीं। संवाद
हिंदी में हम एक-दूसरे से संवाद या विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसे प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इसकी शुरुआत अपने आप से करनी होगी। खुद हिंदी बोलने के साथ दूसरों को भी हिंदी बोलने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इसके लिए सभी लोग आगे आएं।
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-प्रीतिका शर्मा, प्रधानाचार्य उमेशचंद्र कौशिक आदर्श विद्या निकेतन इंटर कॉलेज
हिंदी हमारी संस्कृति और राष्ट्र की पहचान भी है। वर्तमान में हावी अंग्रेजी का बाजार हिंदी को कमजोर कर रहा है। इसे बचाने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। हिंदी हमारी संस्कृति की झलक है। हिंदी का प्रचलन और ज्यादा बढ़ाने के लिए जरूरत इस बात की है कि सरकारी कार्यालयों में पूरा कामकाज हिंदी में ही हो।
-डॉ. मीता कौशल, प्राचार्या आरडी गर्ल्स डिग्री कॉलेज।
अपनी मातृभाषा से नई पीढ़ी विमुख हो रही है। अंग्रेजी बोलने वाले बच्चे हिंदी से विमुख हो रहे हैं। वह हिंदी में अपनी बात नहीं कह पाते। इन्हें मातृभाषा से परिचित कराने की जरूरत है। यहीं से हिंदी का प्रोत्साहन शुरू होगा। इसके लिए हमें अपने घर से शुरुआत करनी होगी।
-डॉ. मुकेश कुमार, प्रधानाचार्य, राजकीय हाईस्कूल भगना
हिंदी से दूर हो रहे बच्चों को अंग्रेजी की बजाय अपनी भाषा में बोलने या विचार प्रकट करने के लिए प्रेरित करना होगा। तभी हिंदी को बढ़ावा मिलेगा। उन्हें हिंदी की अच्छी पुस्तकें पढ़ाई जाएं। इसके लिए घर पर बेहतर माहौल बनना होगा।
-जितेंद्र कुमार शर्मा, शिक्षक
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हिंदी केवल हमारी मातृ भाषा ही नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति का अंग भी है। हिंदी को प्रोत्साहन देने की शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी होगी। इसके लिए माहौल तैयार करना होगा।
घर में बच्चों को हिंदी लिखने, पढ़ने व बोलने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों में सभी कामकाज व पत्र व्यवहार हिंदी भाषा में ही होना चाहिए। यह काम वर्तमान में अंग्रेजी में किया जा रहा है। ‘हिंदी हैं हम’, अभियान के तहत अमर उजाला ने शिक्षक-शिक्षिकाओं से बातचीत की तो उन्होंने यह बातें कहीं। संवाद
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हिंदी में हम एक-दूसरे से संवाद या विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसे प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इसकी शुरुआत अपने आप से करनी होगी। खुद हिंदी बोलने के साथ दूसरों को भी हिंदी बोलने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इसके लिए सभी लोग आगे आएं।
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-प्रीतिका शर्मा, प्रधानाचार्य उमेशचंद्र कौशिक आदर्श विद्या निकेतन इंटर कॉलेज
हिंदी हमारी संस्कृति और राष्ट्र की पहचान भी है। वर्तमान में हावी अंग्रेजी का बाजार हिंदी को कमजोर कर रहा है। इसे बचाने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। हिंदी हमारी संस्कृति की झलक है। हिंदी का प्रचलन और ज्यादा बढ़ाने के लिए जरूरत इस बात की है कि सरकारी कार्यालयों में पूरा कामकाज हिंदी में ही हो।
-डॉ. मीता कौशल, प्राचार्या आरडी गर्ल्स डिग्री कॉलेज।
अपनी मातृभाषा से नई पीढ़ी विमुख हो रही है। अंग्रेजी बोलने वाले बच्चे हिंदी से विमुख हो रहे हैं। वह हिंदी में अपनी बात नहीं कह पाते। इन्हें मातृभाषा से परिचित कराने की जरूरत है। यहीं से हिंदी का प्रोत्साहन शुरू होगा। इसके लिए हमें अपने घर से शुरुआत करनी होगी।
-डॉ. मुकेश कुमार, प्रधानाचार्य, राजकीय हाईस्कूल भगना
हिंदी से दूर हो रहे बच्चों को अंग्रेजी की बजाय अपनी भाषा में बोलने या विचार प्रकट करने के लिए प्रेरित करना होगा। तभी हिंदी को बढ़ावा मिलेगा। उन्हें हिंदी की अच्छी पुस्तकें पढ़ाई जाएं। इसके लिए घर पर बेहतर माहौल बनना होगा।
-जितेंद्र कुमार शर्मा, शिक्षक

हाथरस : डॉ. मुकेश कुमार, प्रधानाचार्य राजकीय हाईस्कूल बघना। संवाद- फोटो : HATHRAS

हाथरस : प्रीतिका शर्मा, प्रधानाचार्या आदर्श विद्या निकेतन इंटर कॉलेज। संवाद- फोटो : HATHRAS

हाथरस : डॉ. मीता कौशल, प्राचार्या आरडी गर्ल्स डिग्री कॉलेज। संवाद- फोटो : HATHRAS