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हाथरस : भाजपा की कोशिश, जिपं. अध्यक्ष पद पर हो उसका कब्जा
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
भले ही इस पंचायत चुनाव में भाजपा समर्थित पांच सदस्य ही निर्वाचित हुए हैं। इसके बावजूद पार्टी यह दावा कर रही है कि जिला पंचायत अध्यक्ष उसी का बनेगा। इसके लिए पार्टी ने रणनीति तैयार करना भी शुरू कर दी है। कुछ जीते हुए बागी सदस्यों को पार्टी में वापस लेने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन पार्टी के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि आखिर अध्यक्ष पद के दावेदार के रूप में किसे प्रस्तुत किया जाए।
उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में इस बार भाजपा समर्थित पांच सदस्य ही चुनकर आए हैं। पार्टी समर्थित ज्यादातर उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं। सूत्रों का कहना है कि अब पार्टी सत्ता की हनक का इस्तेमाल कर इस पद पर अपना कब्जा करना चाह रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि ऐसे पांच सदस्य भी निर्वाचित हुए हैं, जिन्होंने भाजपा से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह बागी बन गए और चुनाव जीत भी गए। अब उन्हें फिर से पार्टी में लाने की कोशिश की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि कुछ निर्वाचित बागी सदस्य पार्टी में आने के इच्छुक भी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल पार्टी के सामने यह है कि आखिर अध्यक्ष के रूप में पार्टी किसका नाम आगे करे। इसके लिए पार्टी के बड़े नेता भी मंथन कर रहे हैं। स्थानीय स्तर से इसकी रिपोर्ट भी आलाकमान को भेजी जा रही है।
जिला पंचायत के चुनाव में अपनी भाजपा के पांच समर्थित सदस्य जीते हैं। किसी और पार्टी के इतने सदस्य नहीं जीते हैं। यह कोशिश की जा रही है कि जिला जिला पंचायत अध्यक्ष पार्टी का ही बने। आलाकमान को पूरी स्थिति से अवगत भी कराया जा रहा है।
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-गौरव आर्य, भाजपा जिलाध्यक्ष
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भले ही इस पंचायत चुनाव में भाजपा समर्थित पांच सदस्य ही निर्वाचित हुए हैं। इसके बावजूद पार्टी यह दावा कर रही है कि जिला पंचायत अध्यक्ष उसी का बनेगा। इसके लिए पार्टी ने रणनीति तैयार करना भी शुरू कर दी है। कुछ जीते हुए बागी सदस्यों को पार्टी में वापस लेने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन पार्टी के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि आखिर अध्यक्ष पद के दावेदार के रूप में किसे प्रस्तुत किया जाए।
उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में इस बार भाजपा समर्थित पांच सदस्य ही चुनकर आए हैं। पार्टी समर्थित ज्यादातर उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं। सूत्रों का कहना है कि अब पार्टी सत्ता की हनक का इस्तेमाल कर इस पद पर अपना कब्जा करना चाह रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि ऐसे पांच सदस्य भी निर्वाचित हुए हैं, जिन्होंने भाजपा से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह बागी बन गए और चुनाव जीत भी गए। अब उन्हें फिर से पार्टी में लाने की कोशिश की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि कुछ निर्वाचित बागी सदस्य पार्टी में आने के इच्छुक भी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल पार्टी के सामने यह है कि आखिर अध्यक्ष के रूप में पार्टी किसका नाम आगे करे। इसके लिए पार्टी के बड़े नेता भी मंथन कर रहे हैं। स्थानीय स्तर से इसकी रिपोर्ट भी आलाकमान को भेजी जा रही है।
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जिला पंचायत के चुनाव में अपनी भाजपा के पांच समर्थित सदस्य जीते हैं। किसी और पार्टी के इतने सदस्य नहीं जीते हैं। यह कोशिश की जा रही है कि जिला जिला पंचायत अध्यक्ष पार्टी का ही बने। आलाकमान को पूरी स्थिति से अवगत भी कराया जा रहा है।
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-गौरव आर्य, भाजपा जिलाध्यक्ष