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हाथरस : सादाबाद में फिर हार, सिकंदराराऊ में मामूली अंतर से जीती भाजपा
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
प्रदेश में भले ही अखिलेश और जयंत चौधरी की जोड़ी हिट न हुई हो, लेकिन जिले की सादाबाद और सिकंदराराऊ सीट पर इस जोड़ी की वजह से भाजपा को कड़ी टक्कर मिली। रालोद ने सादाबाद में अपनी जमीन फिर से हासिल कर ली तो सिकंदराराऊ में भी भाजपा प्रत्याशी और विधायक वीरेंद्र सिंह राना थोड़े से अंतर से ही अपनी सीट बचा पाए, अलबत्ता हाथरस सीट पर भाजपा के पक्ष में जमकर वोटों की बारिश हुई। यहां गठबंधन प्रत्याशी को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और रालोद मुखिया जयंत चौधरी के दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। प्रदेश में भले ही यह हिट नहीं हुई हो, लेकिन जिले में अखिलेश और जयंत की जोड़ी का सिकंदराराऊ और सादाबाद सीट पर खासा असर देखने को मिला। भाजपा ने सादाबाद सीट से इस बार कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन रामवीर उपाध्याय भी यहां से भाजपा को जीत नहीं दिला सके। वहां रालोद के प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी ने कड़े मुकाबले में उन्हें हरा दिया। इस सीट पर रालोद ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा ली थी। रालोद के मुखिया जयंत चौधरी ने यहां करीब दर्जन भर सभाएं की थीं। इसका असर भी देखने को मिला। यहां गठबंधन और भाजपा की सीधी टक्कर रही। ऐसे में रालोद प्रत्याशी गुड्डू चौधरी जीतने में कामयाब रहे।
हालांकि गठबंधन की सरकार न बनने से रालोद समर्थक निराश हैं, लेकिन गुड्डू की जीत पर सपा और रालोद गठबंधन में खुशी है। वहीं सिकंदराराऊ में भी सपा प्रत्याशी से भाजपा के विधायक वीरेंद्र सिंह राना को कड़ी टक्कर मिली। लगातार कई चक्रों में विधायक पिछड़ते दिखाई दिए। आखिरी चक्रों में जीत के लिए उन्होंने बढ़त बनाई। हालांकि सदर सीट पर फिर भाजपा को जमकर वोट मिले और इस सीट पर गठबंधन कोई कमाल नहीं दिखा पाया। संवाद
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प्रदेश में भले ही अखिलेश और जयंत चौधरी की जोड़ी हिट न हुई हो, लेकिन जिले की सादाबाद और सिकंदराराऊ सीट पर इस जोड़ी की वजह से भाजपा को कड़ी टक्कर मिली। रालोद ने सादाबाद में अपनी जमीन फिर से हासिल कर ली तो सिकंदराराऊ में भी भाजपा प्रत्याशी और विधायक वीरेंद्र सिंह राना थोड़े से अंतर से ही अपनी सीट बचा पाए, अलबत्ता हाथरस सीट पर भाजपा के पक्ष में जमकर वोटों की बारिश हुई। यहां गठबंधन प्रत्याशी को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और रालोद मुखिया जयंत चौधरी के दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। प्रदेश में भले ही यह हिट नहीं हुई हो, लेकिन जिले में अखिलेश और जयंत की जोड़ी का सिकंदराराऊ और सादाबाद सीट पर खासा असर देखने को मिला। भाजपा ने सादाबाद सीट से इस बार कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन रामवीर उपाध्याय भी यहां से भाजपा को जीत नहीं दिला सके। वहां रालोद के प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी ने कड़े मुकाबले में उन्हें हरा दिया। इस सीट पर रालोद ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा ली थी। रालोद के मुखिया जयंत चौधरी ने यहां करीब दर्जन भर सभाएं की थीं। इसका असर भी देखने को मिला। यहां गठबंधन और भाजपा की सीधी टक्कर रही। ऐसे में रालोद प्रत्याशी गुड्डू चौधरी जीतने में कामयाब रहे।
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हालांकि गठबंधन की सरकार न बनने से रालोद समर्थक निराश हैं, लेकिन गुड्डू की जीत पर सपा और रालोद गठबंधन में खुशी है। वहीं सिकंदराराऊ में भी सपा प्रत्याशी से भाजपा के विधायक वीरेंद्र सिंह राना को कड़ी टक्कर मिली। लगातार कई चक्रों में विधायक पिछड़ते दिखाई दिए। आखिरी चक्रों में जीत के लिए उन्होंने बढ़त बनाई। हालांकि सदर सीट पर फिर भाजपा को जमकर वोट मिले और इस सीट पर गठबंधन कोई कमाल नहीं दिखा पाया। संवाद
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