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Hathras News: टीईटी अभ्यर्थी की पहचान में मिला अंतर, रिपोर्ट दर्ज
Sun, 05 Jul 2026 02:07 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sun, 05 Jul 2026 02:07 AM IST
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केवाईसी के दौरान सामने आई दोहरी पहचान। स्वयं।
- फोटो : self
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के अंतिम दिन शहर के सरस्वती इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने पहुंची एक युवती का प्रवेश पत्र में नाम, बल्दियत और जन्मतिथि कुछ और थी और बायोमीट्रिक सत्यापन में कुछ और निकली। प्रशासन ने परीक्षा के बाद उसके खिलाफ सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को अलीगढ़ के मानगढ़ी निवासी युवती सरस्वती इंटर कॉलेज में टीईटी में शामिल होने पहुंची। उसके पास प्रीति पुत्री अमर सिंह के नाम से जारी प्रवेश पत्र था। बायोमेट्रिक और केवाईसी प्रक्रिया के दौरान जब आधार कार्ड का सत्यापन किया गया तो उसमें कुमारी साक्षी पत्नी आकाश कुमार नाम अंकित मिला।
इतना ही नहीं, प्रवेश पत्र में जन्मतिथि 20 जुलाई 1992 दर्ज थी, जबकि आधार कार्ड में 10 जुलाई 1998 अंकित मिली। अधिकारियों ने मौके पर युवती से पूछताछ की। उसने बताया कि पहले उसका नाम साक्षी था, जिसे बाद में बदलकर प्रीति करा लिया गया। उसने यह भी बताया कि उसने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा दोबारा उत्तीर्ण की है।
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पूछताछ के बाद परीक्षा नियमों के तहत उसे परीक्षा देने की अनुमति तो दे दी गई, लेकिन दस्तावेजों में गंभीर विसंगति पाए जाने के कारण उसके विरुद्ध सदर कोतवाली में बायोमीट्रिक प्रतिनिधि जितेंद्र कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
एडीएम न्यायिक प्रकाशचंद्र ने बताया कि बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान अभ्यर्थी की पहचान मेल नहीं खा रही थी। नाम और जन्मतिथि में स्पष्ट अंतर मिलने के कारण संबंधित अभ्यर्थी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाएगी कि दस्तावेजों में अंतर किस कारण से है और कहीं परीक्षा नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। संवाद
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जानकारी के अनुसार शुक्रवार को अलीगढ़ के मानगढ़ी निवासी युवती सरस्वती इंटर कॉलेज में टीईटी में शामिल होने पहुंची। उसके पास प्रीति पुत्री अमर सिंह के नाम से जारी प्रवेश पत्र था। बायोमेट्रिक और केवाईसी प्रक्रिया के दौरान जब आधार कार्ड का सत्यापन किया गया तो उसमें कुमारी साक्षी पत्नी आकाश कुमार नाम अंकित मिला।
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इतना ही नहीं, प्रवेश पत्र में जन्मतिथि 20 जुलाई 1992 दर्ज थी, जबकि आधार कार्ड में 10 जुलाई 1998 अंकित मिली। अधिकारियों ने मौके पर युवती से पूछताछ की। उसने बताया कि पहले उसका नाम साक्षी था, जिसे बाद में बदलकर प्रीति करा लिया गया। उसने यह भी बताया कि उसने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा दोबारा उत्तीर्ण की है।
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पूछताछ के बाद परीक्षा नियमों के तहत उसे परीक्षा देने की अनुमति तो दे दी गई, लेकिन दस्तावेजों में गंभीर विसंगति पाए जाने के कारण उसके विरुद्ध सदर कोतवाली में बायोमीट्रिक प्रतिनिधि जितेंद्र कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
एडीएम न्यायिक प्रकाशचंद्र ने बताया कि बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान अभ्यर्थी की पहचान मेल नहीं खा रही थी। नाम और जन्मतिथि में स्पष्ट अंतर मिलने के कारण संबंधित अभ्यर्थी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाएगी कि दस्तावेजों में अंतर किस कारण से है और कहीं परीक्षा नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। संवाद