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Hathras News: सरकारी गाड़ी से मौत, कार्रवाई के पहिये जाम
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
हाथरस में सरकारी वाहनों से हुए हादसों में लोगों की जान तो चली गई, लेकिन जिम्मेदार चालकों पर कार्रवाई के पहिए थमे हुए हैं। रोडवेज बस से लेकर प्रशासनिक अफसरों की गाड़ियों तक, हादसों के बाद कार्रवाई की सुस्त रफ्तार ने सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रविवार को नगर पालिका के जेसीबी चालक की लापरवाही से 11 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। इसमें पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लेकिन सरकारी वाहनों से हुए दूसरे जानलेवा हादसों में कार्रवाई सवालों के घेरे में है। 16 अप्रैल को रोडवेज बस से युवक की मौत के मामले में चालक पर कार्रवाई नहीं हुई। वहीं 14 अगस्त को नायब तहसीलदार की गाड़ी से तीन लोगों की मौत के मामले में भी चालक की गिरफ्तारी नहीं हुई। ये घटनाएं सरकारी वाहन चालकों पर कार्रवाई की सुस्ती को उजागर करती हैं।
केस-1
युवक की मौत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
इसी साल 16 अप्रैल को अलीगढ़ रोड पर तहसील सदर के निकट रोडवेज बस एक बाइक सवार युवक को करीब 500 मीटर तक सड़क पर घसीटती चली गई। इस दर्दनाक हादसे में अलीगढ़ (बरला) निवासी 22 वर्षीय रितेश की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसमें चालक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह, 24 अप्रैल की रात नोएडा से होमगार्ड परीक्षा देने आए हतीसा निवासी अनुज चौधरी रेलवे पुल पर बस से उतर रहे थे। चालक ने उनके पूरी तरह उतरने से पहले ही बस आगे बढ़ा दी, जिससे उनका पैर पिछले पहिये के नीचे आकर कुचल गया।
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केस-2
नायब तहसीलदार की गाड़ी से तीन की मौत
14 अगस्त को मथुरा-बरेली हाईवे पर प्रशासनिक हनक का शिकार एक पूरा परिवार हो गया। सिकंदराराऊ के नायब तहसीलदार की तेज रफ्तार गाड़ी ने मोपेड सवार तीन लोगों को जोरदार टक्कर मारते हुए रौंद दिया। इस भीषण हादसे में एक छह साल के मासूम बच्चे समेत तीनों लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में चालक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
डीएसओ की गाड़ी ने ली जान
27 अगस्त को मथुरा रोड पर कलेक्ट्रेट के बिल्कुल करीब आपूर्ति विभाग (डीएसओ) की गाड़ी का कहर देखने को मिला। तेज रफ्तार प्रशासनिक वाहन ने बाइक सवार तीन मजदूरों को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें से एक मजदूर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
चालकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
- सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए पुलिस चेकिंग से लेकर जागरूकता अभियान चलाती है। तेज रफ्तार व यातायात नियमों की अनदेखी हादसों की वजह बन रही है। जल्द ही सरकारी व सवारी वाहनों के चालकों की कार्यशाला आयोजित कर उन्हें यातायात नियमों को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। - चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी
ये है सजा का प्रावधान
दुर्घटना में मौत के लिए जो आम लोगों के लिए सजा है, वही सरकारी वाहन चालकों के लिए। दुर्घटना के मामलों के जानकार अधिवक्ता कृष्णकांत शर्मा ने बताया कि बीएनएस की धारा 106 लापरवाही या उतावलेपन के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने से संबंधित है। इस धारा को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है। धारा 106(1) सामान्य लापरवाही, जिसमें 5 साल तक की कैद और जुर्माना का प्रावधान है।
वहीं धारा 106(2) हिट एंड रन से जुड़ी है। इस गंभीर श्रेणी में 10 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इस धारा में एफआईआर दर्ज नहीं करा पाते। इसलिए चालक को आसानी से बाहर ही बाहर जमानत मिल जाती है।
विभागों में लगी गाड़ियों में जीपीएस नहीं
सरकारी विभागों में अधिकारियों के इस्तेमाल के लिए अनुबंध पर लिए जाने वाले चार पहिया वाहन जैसे सेडान, एसयूवी आदि में पैनिक बटन के साथ सरकार से प्रमाणित एआईएस-140 जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस होनी चाहिए लेकिन, जिले के सरकारी कार्यालयों में लगी अधिकतर गाड़ियों में जीपीएस नहीं है।
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रविवार को नगर पालिका के जेसीबी चालक की लापरवाही से 11 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। इसमें पुलिस ने चालक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लेकिन सरकारी वाहनों से हुए दूसरे जानलेवा हादसों में कार्रवाई सवालों के घेरे में है। 16 अप्रैल को रोडवेज बस से युवक की मौत के मामले में चालक पर कार्रवाई नहीं हुई। वहीं 14 अगस्त को नायब तहसीलदार की गाड़ी से तीन लोगों की मौत के मामले में भी चालक की गिरफ्तारी नहीं हुई। ये घटनाएं सरकारी वाहन चालकों पर कार्रवाई की सुस्ती को उजागर करती हैं।
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केस-1
युवक की मौत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
इसी साल 16 अप्रैल को अलीगढ़ रोड पर तहसील सदर के निकट रोडवेज बस एक बाइक सवार युवक को करीब 500 मीटर तक सड़क पर घसीटती चली गई। इस दर्दनाक हादसे में अलीगढ़ (बरला) निवासी 22 वर्षीय रितेश की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसमें चालक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह, 24 अप्रैल की रात नोएडा से होमगार्ड परीक्षा देने आए हतीसा निवासी अनुज चौधरी रेलवे पुल पर बस से उतर रहे थे। चालक ने उनके पूरी तरह उतरने से पहले ही बस आगे बढ़ा दी, जिससे उनका पैर पिछले पहिये के नीचे आकर कुचल गया।
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केस-2
नायब तहसीलदार की गाड़ी से तीन की मौत
14 अगस्त को मथुरा-बरेली हाईवे पर प्रशासनिक हनक का शिकार एक पूरा परिवार हो गया। सिकंदराराऊ के नायब तहसीलदार की तेज रफ्तार गाड़ी ने मोपेड सवार तीन लोगों को जोरदार टक्कर मारते हुए रौंद दिया। इस भीषण हादसे में एक छह साल के मासूम बच्चे समेत तीनों लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में चालक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
डीएसओ की गाड़ी ने ली जान
27 अगस्त को मथुरा रोड पर कलेक्ट्रेट के बिल्कुल करीब आपूर्ति विभाग (डीएसओ) की गाड़ी का कहर देखने को मिला। तेज रफ्तार प्रशासनिक वाहन ने बाइक सवार तीन मजदूरों को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें से एक मजदूर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
चालकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
- सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए पुलिस चेकिंग से लेकर जागरूकता अभियान चलाती है। तेज रफ्तार व यातायात नियमों की अनदेखी हादसों की वजह बन रही है। जल्द ही सरकारी व सवारी वाहनों के चालकों की कार्यशाला आयोजित कर उन्हें यातायात नियमों को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। - चिरंजीवनाथ सिन्हा, एसपी
ये है सजा का प्रावधान
दुर्घटना में मौत के लिए जो आम लोगों के लिए सजा है, वही सरकारी वाहन चालकों के लिए। दुर्घटना के मामलों के जानकार अधिवक्ता कृष्णकांत शर्मा ने बताया कि बीएनएस की धारा 106 लापरवाही या उतावलेपन के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने से संबंधित है। इस धारा को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है। धारा 106(1) सामान्य लापरवाही, जिसमें 5 साल तक की कैद और जुर्माना का प्रावधान है।
वहीं धारा 106(2) हिट एंड रन से जुड़ी है। इस गंभीर श्रेणी में 10 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इस धारा में एफआईआर दर्ज नहीं करा पाते। इसलिए चालक को आसानी से बाहर ही बाहर जमानत मिल जाती है।
विभागों में लगी गाड़ियों में जीपीएस नहीं
सरकारी विभागों में अधिकारियों के इस्तेमाल के लिए अनुबंध पर लिए जाने वाले चार पहिया वाहन जैसे सेडान, एसयूवी आदि में पैनिक बटन के साथ सरकार से प्रमाणित एआईएस-140 जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस होनी चाहिए लेकिन, जिले के सरकारी कार्यालयों में लगी अधिकतर गाड़ियों में जीपीएस नहीं है।