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रद्द किए बलात्कार पीडितोंं के पांच मामले

Tue, 24 Nov 2015 11:51 PM IST
hathras
hathras Updated Tue, 24 Nov 2015 11:51 PM IST
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five cases cancel of rape victim
हाथरस। किसी के साथ दुष्कर्म हुआ है या नहीं, इसका फैसला हमेशा कोर्ट ने किया है, लेकिन रानी लक्ष्मीबाई योजना के  तहत पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को जल्द दुष्कर्म की हकीकत तय करनी पड़ रही है। इससे एक नई बहस छिड़ गई है।
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पुलिस की विवेचना और कोर्ट के अपने फैसले से पहले अधिकारियों ने कुल 14 में से पांच मामलों में दुष्कर्म को तय नहीं मानते हुए रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत इनकी पात्रता को निरस्त कर दिया है।
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हैरत की बात यह भी है कि दुष्कर्म पीड़िता को दस लाख तक की मदद वाली इस योजना के तहत अभी तक किसी भी पीड़िता को मदद नहीं मिल सकी है। जबकि योजना के तहत मामला दर्ज किए जाने के 15 दिन के अंदर पीड़िता को मदद मुहैया कराई जानी चाहिए।
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सरकार ने जघन्य अपराध की शिकार महिलाओं को त्वरित आर्थिक और चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए 100 करोड़ का रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष बनाया है। दुष्कर्म पीड़िता को तीन से दस लाख तक की मदद देने का प्रावधान है वो भी मामला दर्ज होने के 15 दिन के अंदर।
प्रदेश में सितंबर तक इस कोष की आधी रकम भी आवंटित नहीं हुई। आवंटित 49 करोड़ में से सभी जिले केवल 20 करोड़ की मदद ही पीड़िताओं को उपलब्ध करा सके हैं। जिले में तो एक भी पीड़िता को इस योजना के तहत लाभ नहीं मिला है। नौ नवंबर को प्रदेश की महिला कल्याण राज्यमंत्री शादाब फातिमा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में योजना में जिले के फिसड्डी होने पर अधिकारियों की क्लास भी लगाई थी।

दुष्कर्म के मामले काफी पेचीदा होते हैं। कई बार दुष्कर्म के कई दिन बाद रिपोर्ट दर्ज होती है। ऐसे में डॉक्टरों के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि दुष्कर्म हुआ या नहीं। इन मामलों में डॉक्टरों ने बचते हुए दुष्कर्म की बात साफ नहीं की और टेस्ट रिपोर्ट लिखकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद आला अधिकारियों की एक कमेटी ने डॉक्टरों को साथ लेकर सभी मामलों पर एक-एक कर विचार किया। इसके बाद दुष्कर्म के हर मामले पर डॉक्टरों ने अपना फाइनल ओपिनियन दे दिया।

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