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ट्रैवल एजेंसी पर छापा, एजेंट हिरासत में
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Mon, 17 Oct 2016 11:15 PM IST
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चामड़ गेट स्थित एक ट्रेवल एजेंसी पर सोमवार सुबह हाथरस जंक्शन आरपीएफ ने छापेमारी की। एजेंट को पर्सनल आईडी पर ज्यादा दाम लेकर कॉमर्शियल टिकट बेचने का आरोप लगाते हुए हिरासत में ले लिया गया।
ऑफिस की जांच पड़ताल करते हुए वहां रखे तीन मॉनिटर और एक कंप्यूटर को भी आरपीएफ ने कब्जे में ले लिया है। आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर योगेश कालीरमण और राजेंद्र कुमार ने बताया कि एजेंट के खिलाफ एक ग्राहक ने शिकायत कर टिकट की तय कीमत से ज्यादा रुपये लेने का आरोप लगाया है।
मामले की जांच में पता चला है कि रिजर्वेशन एजेंट ने रेलवे की ओर से दी गई कॉमर्शियल आईडी पर आरक्षण न कर, पर्सनल आईडी बनाकर किया है।
उन्होंने बताया कि तत्काल के लिए कॉमर्शियल आईडी के जरिए सुबह साढ़े ग्यारह बजे से रिजर्वेशन शुरू होते हैं। वहीं पर्सनल आईडी पर इसे आधा घंटे पहले शुरू किया जा सकता है।
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तत्काल में रिजर्वेशन जल्द भर जाता है, इसलिए कुछ ट्रैवल चोरी छिपे पर्सनल आईडी पर आधा घंटा पहले तत्काल का रिजर्वेशन कर देते हैं और इसके बदले ज्यादा कीमत वसूलते हैं। ऐसा करना रेलवे के नियमों के विपरीत है।
राजेंद्र कुमार ने कहा कि एजेंट को पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा है। पूछताछ में आरोप सही पाए जाने पर मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है। अगर आरोप गलत पाए गए तो आरोपी को छोड़ दिया जाएगा।
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ऑफिस की जांच पड़ताल करते हुए वहां रखे तीन मॉनिटर और एक कंप्यूटर को भी आरपीएफ ने कब्जे में ले लिया है। आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर योगेश कालीरमण और राजेंद्र कुमार ने बताया कि एजेंट के खिलाफ एक ग्राहक ने शिकायत कर टिकट की तय कीमत से ज्यादा रुपये लेने का आरोप लगाया है।
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मामले की जांच में पता चला है कि रिजर्वेशन एजेंट ने रेलवे की ओर से दी गई कॉमर्शियल आईडी पर आरक्षण न कर, पर्सनल आईडी बनाकर किया है।
उन्होंने बताया कि तत्काल के लिए कॉमर्शियल आईडी के जरिए सुबह साढ़े ग्यारह बजे से रिजर्वेशन शुरू होते हैं। वहीं पर्सनल आईडी पर इसे आधा घंटे पहले शुरू किया जा सकता है।
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तत्काल में रिजर्वेशन जल्द भर जाता है, इसलिए कुछ ट्रैवल चोरी छिपे पर्सनल आईडी पर आधा घंटा पहले तत्काल का रिजर्वेशन कर देते हैं और इसके बदले ज्यादा कीमत वसूलते हैं। ऐसा करना रेलवे के नियमों के विपरीत है।
राजेंद्र कुमार ने कहा कि एजेंट को पूछताछ के लिए ले जाया जा रहा है। पूछताछ में आरोप सही पाए जाने पर मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है। अगर आरोप गलत पाए गए तो आरोपी को छोड़ दिया जाएगा।