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सांसद प्रतिनिधि की मौत का कारण साफ नहीं कर सकी कमेटी
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, हाथरस।
Updated Mon, 12 Mar 2018 11:43 PM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
हाथरस। सांसद प्रतिनिधि मुकेश पौरुष की मौत के मामले में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने सोमवार को मामले की जांच पूरी करने के बाद अपनी रिपोर्ट डीएम अमित कुमार सिंह को सौंप दी। इस रिपोर्ट में कमेटी ने विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने की बात कहकर गेंद अधिकारियों के पाले में डाल दी है। साफ है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद जांच कमेटी की रिपोर्ट में सांसद प्रतिनिधि की मौत का कारण साफ नहीं हो सका है।
सीएमओ डॉ. बृजेश राठौर ने बताया कि जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपी है। अब आगे की कार्रवाई पर डीएम ही निर्णय लेंगे। उधर, एसपी घुले सुशील ने बताया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट आ गई है, हालांकि यह रिपोर्ट उन्हें अभी नहीं मिली है लेकिन उन्हें इतना पता चला है कि रिपोर्ट में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने की सिफारिश की गई है। एसपी ने कहा कि यह मामला बेहद तकनीकी है और पुलिस विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच के आधार पर ही कोई निर्णय ले सकती है। मालूम हो कि सांसद प्रतिनिधि की मौत मुकेश पौरुष की मौत में सरस्वती नर्सिंग होम के संचालक डॉ. महेश चंद्र गुप्ता और उनके बेटे सौरभ महेश गुप्ता पर लापरवाही के आरोप लगे थे। इन आरोपों की जांच के लिए डीएम ने सीएमओ के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने ऑपरेशन थियेटर का निरीक्षण किया था।
जांच होने तक न हो डॉक्टरों की गिरफ्तारी
बैनीगंज व्यापार कमेटी के सदस्यों ने सोमवार को एसपी घुले सुशील से मिलकर सांसद प्रतिनिधि मुकेश पौरुष की मौत के मामले में चल रही जांच पूरा होने से पहले आरोपी डॉक्टर महेश चंद्र गुप्ता और उनके बेटे डॉ. सौरभ महेश गुप्ता की गिरफ्तारी न किए जाने की मांग की है।
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कमेटी के सदस्यों ने एसपी को सौंपे ज्ञापन में कहा कि सांसद प्रतिनिधि की मौत हायर सेंटर पर रेफर करने के बाद हुई। मुकेश पौरुष की पत्नी की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके। जब तक आरोप सिद्ध नहीं हो जाते तब तक किसी भी चिकित्सक की गिरफ्तारी न की जाए। अन्य मरीजों के हित में हॉस्पिटल में चिकित्सकीय सेवा शुरू कराई जाए। शहर में कुछ ही अस्पताल हैं जो 24 घंटे सेवाएं देते हैं। सरस्वती नर्सिंग होम इन्हीं में से एक है। एसपी से मिलने वालों में अध्यक्ष डॉ. मुकेश चंद्रा, विपुल सिंघानिया, अजय वार्ष्णेय, रमेश चंद्र अग्रवाल, दिनेश वर्मा, दिनेश वार्ष्णेय, सतीश वर्मा, मंगल सिंह, रवि कुमार, दीनानाथ अरोरा, मनोज वर्मा, नत्थीलाल, लोकेश सेंगर, संजीव गुप्ता, असरानी, विनोद अग्रवाल, मोहनलाल समेत कई व्यापारी शामिल थे।
डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल भी एसपी से मिला
सांसद प्रतिनिधि मुकेश पौरुष की मौत के मामले में आरोपी डॉक्टरों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने के मामले में डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को एसपी से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की। डॉक्टरों ने रविवार रात को सीएमओ से उनके आवास पर मिलने की कोशिश की थी। सोमवार सुबह डॉक्टरों ने एसपी घुले सुशील से उनके कार्यालय पर मुलाकात की। इस दौरान डॉक्टरों ने प्रेस को बयान देने या फोटो खिंचाने से मना कर दिया। रविवार रात को भी सीएमओ आवास पर पहुंचे डॉक्टरों ने फोटो खिंचाने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि वे निष्पक्ष जांच कराना चाहते हैं। किसी तरह की सनसनी पैदा करना या सुर्खियां बटोरना उनका मकसद नहीं है।
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सीएमओ डॉ. बृजेश राठौर ने बताया कि जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपी है। अब आगे की कार्रवाई पर डीएम ही निर्णय लेंगे। उधर, एसपी घुले सुशील ने बताया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट आ गई है, हालांकि यह रिपोर्ट उन्हें अभी नहीं मिली है लेकिन उन्हें इतना पता चला है कि रिपोर्ट में एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने की सिफारिश की गई है। एसपी ने कहा कि यह मामला बेहद तकनीकी है और पुलिस विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच के आधार पर ही कोई निर्णय ले सकती है। मालूम हो कि सांसद प्रतिनिधि की मौत मुकेश पौरुष की मौत में सरस्वती नर्सिंग होम के संचालक डॉ. महेश चंद्र गुप्ता और उनके बेटे सौरभ महेश गुप्ता पर लापरवाही के आरोप लगे थे। इन आरोपों की जांच के लिए डीएम ने सीएमओ के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने ऑपरेशन थियेटर का निरीक्षण किया था।
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जांच होने तक न हो डॉक्टरों की गिरफ्तारी
बैनीगंज व्यापार कमेटी के सदस्यों ने सोमवार को एसपी घुले सुशील से मिलकर सांसद प्रतिनिधि मुकेश पौरुष की मौत के मामले में चल रही जांच पूरा होने से पहले आरोपी डॉक्टर महेश चंद्र गुप्ता और उनके बेटे डॉ. सौरभ महेश गुप्ता की गिरफ्तारी न किए जाने की मांग की है।
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कमेटी के सदस्यों ने एसपी को सौंपे ज्ञापन में कहा कि सांसद प्रतिनिधि की मौत हायर सेंटर पर रेफर करने के बाद हुई। मुकेश पौरुष की पत्नी की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके। जब तक आरोप सिद्ध नहीं हो जाते तब तक किसी भी चिकित्सक की गिरफ्तारी न की जाए। अन्य मरीजों के हित में हॉस्पिटल में चिकित्सकीय सेवा शुरू कराई जाए। शहर में कुछ ही अस्पताल हैं जो 24 घंटे सेवाएं देते हैं। सरस्वती नर्सिंग होम इन्हीं में से एक है। एसपी से मिलने वालों में अध्यक्ष डॉ. मुकेश चंद्रा, विपुल सिंघानिया, अजय वार्ष्णेय, रमेश चंद्र अग्रवाल, दिनेश वर्मा, दिनेश वार्ष्णेय, सतीश वर्मा, मंगल सिंह, रवि कुमार, दीनानाथ अरोरा, मनोज वर्मा, नत्थीलाल, लोकेश सेंगर, संजीव गुप्ता, असरानी, विनोद अग्रवाल, मोहनलाल समेत कई व्यापारी शामिल थे।
डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल भी एसपी से मिला
सांसद प्रतिनिधि मुकेश पौरुष की मौत के मामले में आरोपी डॉक्टरों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होने के मामले में डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को एसपी से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की। डॉक्टरों ने रविवार रात को सीएमओ से उनके आवास पर मिलने की कोशिश की थी। सोमवार सुबह डॉक्टरों ने एसपी घुले सुशील से उनके कार्यालय पर मुलाकात की। इस दौरान डॉक्टरों ने प्रेस को बयान देने या फोटो खिंचाने से मना कर दिया। रविवार रात को भी सीएमओ आवास पर पहुंचे डॉक्टरों ने फोटो खिंचाने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि वे निष्पक्ष जांच कराना चाहते हैं। किसी तरह की सनसनी पैदा करना या सुर्खियां बटोरना उनका मकसद नहीं है।