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कांशीराम आवास: जर्जर हो गए आशियाने, झड़ रहीं दीवारें, छत भी गिरासू, खतरे में डेढ़ हजार परिवारों की जिंदगी

Sun, 09 Nov 2025 02:29 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 09 Nov 2025 02:29 PM IST
सार

वर्तमान में ज्यादातर आवासों के छज्जे टूट चुके है और मुख्य छज्जे टूटने की कगार पर हैं। इनकी सरिया साफ दिखाई दे रही हैं। छतों से प्लास्टर झड़ रहा है और सीढ़ियों की रेलिंग टूट चुकी है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। छतों से पानी टपकता है, नालियां जाम रहती हैं।

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condition of Kanshi Ram residence in Hathras
काशीराम आवासों की जर्जर हालत, साफ दिख रहे जर्जर छज्जे - फोटो : संवाद

विस्तार

हाथरस शहर में डेढ़ दशक पहले बसाई कांशीराम आवासीय कॉलोनी में बने डेढ़ हजार आवास सिस्टम की उदासीनता से जर्जर हो गए हैं। इनमें रहने वाले परिवार हर पल खतरे के साए में जिंदगी बसर कर रहे हैं। ज्यादातर मकानों से बारिश में पानी का रिसाव हो रहा है। दीवारें झड़ रही हैं और छत भी गिरासू हालत में हैं।

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शहर के जलेसर रोड स्थित कांशीराम आवासीय कॉलोनी का पहले फेज का निर्माण वर्ष 2009-10 में हुआ था। इसमें कुल डेढ़ हजार क्वार्टर बने हुए हैं और इनमें परिवार भी रह रहे हैं। गरीबों को आवंटित करने के बाद प्रशासन इन आवासों के रखरखाव की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ बैठा। वर्तमान में ये आवास इस कदर बदहाल हैं कि इन्हें दूर से देखकर ही यह डर लगता है कि कहीं ये गिर न जाएं।
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जर्जर कांशीराम आवासवर्तमान में ज्यादातर आवासों के छज्जे टूट चुके है और मुख्य छज्जे टूटने की कगार पर हैं। इनकी सरिया साफ दिखाई दे रही हैं। छतों से प्लास्टर झड़ रहा है और सीढ़ियों की रेलिंग टूट चुकी है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। छतों से पानी टपकता है, नालियां जाम रहती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें आज तक यही पता नहीं है कि इन आवासों का रखरखाव कौन सा विभाग कराएगा।

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हमारा आवास ऊपर की मंजिल पर है। छत की हालत इतनी खराब है कि बयां नहीं की जा सकती। अक्सर छत से पानी रिसता है। बेटी की बरात आनी है, समझ नहीं आ रहा कि कैसे इसकी मरम्मत कराएं।-हबीब, स्थानीय निवासी।

सबसे बड़ी दिक्कत इन आवासों में रहने वालों की गरीबी है, क्योंकि हम लोगों के पास इतने रुपये नहीं हैं कि अपने आवास की मरम्मत करा पाएं, इसलिए जर्जर आवासों में रहने के लिए मजबूर हैं।-धन देवी, स्थानीय निवासी।
सरकार को चाहिए कि वह इन आवासों की नियमित मरम्मत कराए, क्योंकि हम लोग अपने आवास की हल्की-फुल्की मरम्मत खुद कर लेते हैं, छज्जे और सीढ़ियों की मरम्मत कराना हमारे लिए मुमकिन नहीं है।-आमिर, स्थानीय निवासी।
जब से यह आवास हमें मिले हैं, तब से अब तक इन्हें कोई देखने तक नहीं आया। मरम्मत की बात तो दूर, अगर कोई शिकायत भी करें तो उसे देखने कोई नहीं आता। शौचालयों की पाइप लाइन तक टूटी पड़ी हैं।-बीना, स्थानीय निवासी।
मौके पर आवासों की स्थिति देखने मैं खुद जाऊंगा। इसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।-अतुल वत्स, जिलाधिकारी

निर्माण के समय ही हुआ था घटिया सामग्री का प्रयोग

कांशीराम कॉलोनी के निवासियों का आरोप है कि इन आवासों के निर्माण में ही बेहद घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था, जिससे ये जल्द ही जर्जर हो गए। सभी ब्लॉकों की छतों पर लगीं पानी की टंकियां भी अब टूट चुकी हैं, जिससे पानी का रिसाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कुछ जगहों पर लोगों को मजबूरी में स्वयं ही आवासों की मरम्मत करानी पड़ी है।
कांशीराम आवास के ऊपरी हिस्से की जर्जर हालतनियमित मरम्मत होती तो 35 साल चलते आवास
आवास-विकास परिषद की ओर से तैयार किए जाने वाले आवासों की मियाद करीब 35 साल होती है, लेकिन इसके लिए कई शर्तें होती हैं। इसमें सबसे प्रमुख शर्त यह है कि हर तीन साल बाद इनकी मरम्मत का कार्य कराना होता है, लेकिन पिछले 16 साल में इन आवासों की मरम्मत के लिए कोई काम नहीं कराया गया है।

दिल्ली-आगरा में हो चुके हैं ध्वस्तीकरण के आदेश
दिल्ली व आगरा में सरकार द्वारा आवंटित किए गए आवासों के जर्जर होने पर उनकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए समितियों का गठन किया गया है। समिति की जांच में भी यह बात सामने आई कि ये आवास अब रहने योग्य ही नहीं हैं। वहां ऐसे आवासों के ध्वस्तीकरण के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। इसके बाद हाथरस में भी कांशीराम कॉलोनी में बने आवासों की अब जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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