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भीषण गर्मी में सरकारी विद्यालयों का हाल: स्कूलों में 'तप' रहा बचपन, पढ़ाई से ज्यादा ध्यान पसीना सुखाने पर

Sat, 09 May 2026 10:20 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sat, 09 May 2026 10:20 AM IST
सार

हाथरस जनपद में कई स्कूलों में कहने को तो बिजली के कनेक्शन हैं, लेकिन छत पर लगे पंखे वर्षों पुराने होने के कारण या तो धीमी गति से चल रहे हैं या पूरी तरह खराब होकर शांत पड़े हैं। कुछ प्राथमिक विद्यालयों में तो हालात और भी बदतर हैं।

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Condition of government schools in summer
प्राथमिक विद्यालय में बंद पंखा, पंखे की पंखुड़ी ही नहीं, बरामदे में हो रही पढ़ाई - फोटो : संवाद

विस्तार

हाथरस जिले में चढ़ते पारे और भीषण गर्मी के बीच सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। कहीं बिजली की कटौती पंखों को थामे हुए है, तो कहीं जर्जर भवन के कारण बच्चे पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ने पर मजबूर हैं। बच्चों का ध्यान पढ़ाई से ज्यादा पसीना सुखाने पर रहता है। बुनियादी सुविधाओं और बिजली की सुचारू आपूर्ति के बिना ''सर्व शिक्षा अभियान'' के दावे खोखले नजर आ रहे हैं।

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तपती दोपहर में बिना पंखे की हवा के कक्षाओं के भीतर बैठना नौनिहालों के लिए किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गया है। सुविधाओं के अभाव और बिजली की लुकाछिपी ने स्कूलों के भीतर का माहौल ''भट्ठी'' जैसा बना दिया है। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के कुछ विद्यालयों का जायजा लिया, तो स्थिति काफी चिंताजनक मिली।
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कई स्कूलों में कहने को तो बिजली के कनेक्शन हैं, लेकिन छत पर लगे पंखे वर्षों पुराने होने के कारण या तो धीमी गति से चल रहे हैं या पूरी तरह खराब होकर शांत पड़े हैं। कुछ प्राथमिक विद्यालयों में तो हालात और भी बदतर हैं। यहां मानक के अनुसार पंखों की व्यवस्था ही नहीं की गई है।

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हाथरस जनपद के सभी विद्यालयों में बिजली की व्यवस्था है। बिजली गुल होने के दौरान होने वाली समस्या को देखते हुए सभी स्कूलों में पानी के मटके रखने का आदेश जारी कर दिया गया है।-स्वाति भारती, बीएसए

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प्राथमिक विद्यालय में पेड़ के नीचे और जर्जर बरामदे में पढ़ाई - फोटो : संवाद

केस-01 : प्राथमिक विद्यालय नगला जायस
बिजली कटौती से पंखे बने शोपीस : हाथरस जंक्शन क्षेत्र के इस विद्यालय में 43 बच्चे पंजीकृत हैं। स्कूल में पंखे तो लगे हैं, लेकिन बिजली की कटौती के कारण वे शो-पीस बने हुए हैं। उमस भरी गर्मी में बच्चे पसीने से तर-बतर रहते हैं, जिससे उन्हें घबराहट और बेचैनी की शिकायत होने लगती है।

केस-02 प्राथमिक विद्यालय, मौहारी
इन्वर्टर के बिना पढ़ाई ठप : गांव मौहारी के प्राथमिक विद्यालय में 30 छात्र पढ़ने आते हैं। यहां सबसे बड़ी समस्या बिजली के आने-जाने का कोई समय न होना और विद्यालय में इन्वर्टर की सुविधा का न होना है। बिजली गुल होते ही कमरे भट्टी की तरह तपने लगते हैं, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।

केस-3 प्राथमिक विद्यालय, नगला भंभू जाट
पेड़ की छांव ही सहारा : सासनी क्षेत्र के इस विद्यालय में स्थिति और भी खराब है। यहां पुराना भवन जर्जर होने के कारण गिरा दिया गया है। अब मात्र दो कमरे बचे हैं, जबकि बच्चों की संख्या 55 है। जगह की कमी और कमरों की तपन के कारण शिक्षकों को विवश होकर बच्चों को पेड़ों के नीचे बिठाकर पढ़ाना पड़ रहा है।

Condition of government schools in summer
कॉपियों से हवा करने को मजबूर बच्चे - फोटो : संवाद

केस-4 संविलियन विद्यालय, कपूरा
टिनशेड के नीचे अग्नि परीक्षा : कपूरा के इस स्कूल में 130 बच्चों का भविष्य दांव पर है। भवन ध्वस्त होने के कारण पूरा स्कूल एक ही कमरे में सिमट गया है। बाकी बच्चों को बरामदे में बिठाया जाता है, जिसकी छत टिन शेड की है। बिना पंखे और तपते टिन के नीचे बैठना बच्चों के लिए किसी सजा से कम नहीं है।

केस-5 संविलियन विद्यालय, दयानतपुर
जर्जर बरामदे में जोखिम : नगर क्षेत्र के इस स्कूल में 123 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन बैठने के लिए सिर्फ एक कमरा है। बाकी बच्चों को मजबूरी में जर्जर हो चुके बरामदे में बिठाया जाता है। यहां पंखा तक नहीं लगा है, जिससे बच्चे दिन भर गर्मी से बेहाल रहते हैं और हमेशा हादसे का डर बना रहता है।

केस-6 कंपोजिट विद्यालय, सादाबाद द्वितीय
कॉपियों से हवा करने को मजबूर बच्चे : इस विद्यालय में सर्वाधिक 700 बच्चे पंजीकृत हैं। सुबह के समय ही यहां दो से तीन घंटे बिजली काट ली जाती है। भीषण गर्मी में जब पंखे बंद होते हैं, तो मासूम बच्चे अपनी कॉपी और किताबों से हवा करते नजर आते हैं। पसीने से भीगकर बच्चों का हाल बुरा हो जाता है।

केस-7 प्राथमिक विद्यालय, गदाखेड़ा
संसाधनों की कमी : सासनी क्षेत्र के इस स्कूल में 75 बच्चे हैं। यहां बिजली की बार-बार कटौती और इन्वर्टर का अभाव बड़ी समस्या है। बिजली जाते ही कमरों में पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है। भीषण उमस के कारण बच्चों का ध्यान पढ़ाई के बजाय गर्मी से राहत पाने पर लगा रहता है।

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