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जीवन जीने की कला से दूर होते हैं विकार
hathras
Updated Wed, 24 Feb 2016 12:25 AM IST
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हाथरस। आर्ट ऑफ लिविंग बंगलौर की कला अलगप्पन और कोलकाता की बीना कैरौल ने बताया कि जीवन जीने की कला सिखाने के लिए शहर में पांच से 10 मार्च तक छह दिवसीय शिविर का आयोजन किया जाएगा।
शिविर में लोगों के अंदर छिपे बिकारों को दूर करने के लिए टिप्स दिए जाएंगे। यह बातें उन्होंने मानव कल्याण सामाजिक संस्था के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय के पुराना मिल कंपाउंड स्थित आवास पर पत्रकार वार्ता के कहीं। उन्होंने दावा किया कि शिविर में शामिल होने वाले लोगों को दो घंटे में उनके अंदर छिपे विकारों को बाहर निकालने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। नशा मुक्ति केंद्रों पर भी जीवन जीने की कला सिखाई जा रही है। जेलों में भी अभियान चलाया गया। काफी कैदियों ने जीवन जीने की कला सीखी। लोग नहाते समय साबुन से शरीर तो साफ कर लेते हैं, लेकिन शरीर के अंदर विकारों का प्रदूषण साफ नहीं होता वह सिर्फ जीवन जीने की कला सीखने से ही हो सकता है। मानव कल्याण के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि छह दिवसीय शिविर का पूरा सहयोग किया जाएगा। जल्द ही स्थान का भी चयन हो जाएगा। वार्ता के समय राकेश बल्लभ वशिष्ठ, हर्षवर्धन उपाध्याय, कृष्णगोपाल, कमलकांत दोबरावाल, मुकेश पौरुष, पीडी उपाध्याय, अजय अग्रवाल, नरेंद्रपाल वर्मा आदि मौजूद थे।
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शिविर में लोगों के अंदर छिपे बिकारों को दूर करने के लिए टिप्स दिए जाएंगे। यह बातें उन्होंने मानव कल्याण सामाजिक संस्था के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय के पुराना मिल कंपाउंड स्थित आवास पर पत्रकार वार्ता के कहीं। उन्होंने दावा किया कि शिविर में शामिल होने वाले लोगों को दो घंटे में उनके अंदर छिपे विकारों को बाहर निकालने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। नशा मुक्ति केंद्रों पर भी जीवन जीने की कला सिखाई जा रही है। जेलों में भी अभियान चलाया गया। काफी कैदियों ने जीवन जीने की कला सीखी। लोग नहाते समय साबुन से शरीर तो साफ कर लेते हैं, लेकिन शरीर के अंदर विकारों का प्रदूषण साफ नहीं होता वह सिर्फ जीवन जीने की कला सीखने से ही हो सकता है। मानव कल्याण के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि छह दिवसीय शिविर का पूरा सहयोग किया जाएगा। जल्द ही स्थान का भी चयन हो जाएगा। वार्ता के समय राकेश बल्लभ वशिष्ठ, हर्षवर्धन उपाध्याय, कृष्णगोपाल, कमलकांत दोबरावाल, मुकेश पौरुष, पीडी उपाध्याय, अजय अग्रवाल, नरेंद्रपाल वर्मा आदि मौजूद थे।
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