फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Action against the chairman within its own government sparks a stir.

Hathras News: अपनी ही सरकार में चेयरमैन पर कार्रवाई से बढ़ी सरगर्मी

Thu, 06 Aug 2026 02:35 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Thu, 06 Aug 2026 02:35 AM IST
विज्ञापन
Action against the chairman within its own government sparks a stir.
श्वेता चौधरी। - फोटो : Archive
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्वेता चौधरी के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज होने के बाद से जिले में खलबली मच गई है। अपनी ही सरकार में चेयरमैन के खिलाफ इस कार्रवाई को प्रदेश सरकार की नो टॉलरेंस पॉलिसी के रूप में देखा जा रहा है।
विज्ञापन

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि पिछले साल आठ जनवरी को जांच में आरोपों की पुष्टि के बाद भी मामले को लटकाने का प्रयास किया जाता रहा। शासन द्वारा लगातार जवाब मांगने पर भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया।
विज्ञापन


डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन टेंडर में वित्तीय व प्रक्रियागत अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सिद्ध होने के बाद शासन ने उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 48-2 के अंतर्गत नगर पालिका अध्यक्ष को तीन नोटिस दिए थे। पहला नोटिस 22 अगस्त 2025 को जारी करते हुए 15 दिनों में जवाब मांगा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके बाद 19 जनवरी को कारण बताओ नोटिस देकर सात दिन में जवाब मांगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर 19 फरवरी को अंतिम अवसर देते हुए सात दिनों में जवाब देन के निर्देश दिए थे।

प्रक्रिया को टालने का किया प्रयास
लगातार जवाब मांगे जाने पर पालिका अध्यक्ष की ओर से इस साल आठ जनवरी और पांच मार्च को जवाब दाखिल किए। शासनादेश के अनुसार अध्यक्ष ने अपने बचाव में कोई तथ्यात्मक साक्ष्य देने के बजाय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में लंबित याचिकाओं का हवाला देकर प्रक्रिया को टालने का प्रयास किया, जबकि हाईकोर्ट ने पिछले साल नौ दिसंबर को आठ सप्ताह के भीतर मामले के निस्तारण के निर्देश दिए थे और शासन की कार्रवाई पर कोई रोक नहीं थी। शिकायतकर्ता मनीष अग्रवाल की रिट याचिका पर कोर्ट ने आदेश जारी किया था। कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी की गई।

नगर पालिका में सब रहा सामान्य
चेयरमैन के अधिकार सीज होने के बाद नगर पालिका परिषद कार्यालय में बुधवार का दिन सामान्य रहा। सुबह 10 बजे कर्मचारी अपने पटलों पर मौजूद थे। रोजाना के काम सामान्य रूप से चलते मिले, अलबत्ता कार्रवाई के बारे में कर्मचारियों के बीच चर्चाएं जरूर चलती रहीं। सरकारी कार्य से बाहर होने के कारण ईओ कार्यालय में मौजूद नहीं थे।

नगर पालिका में ये होंगे बदलाव

शक्तियों का हस्तांतरण :
चेयरमैन के अधिकार सीज होते ही राज्य सरकार के नियमानुसार डीएम या उनके द्वारा मनोनीत अधिकारी जैसे एडीएम, एसडीएम या अधिशासी अधिकारी को वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां सौंप दी जाती हैं।

वित्तीय रोक :
चेयरमैन किसी भी प्रकार के बजट आवंटन, टेंडर की मंजूरी, चेक या वित्तीय भुगतान पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते।

विकास कार्य व सेवाएं जारी :
शहर में सफाई, जलापूर्ति, कर्मचारियों का वेतन और अन्य विकास कार्य नहीं रुकेंगे। ये सभी कार्य नामित प्राधिकारी के अनुमोदन से संचालित रहेंगे।

चेयरमैन की प्रशासनिक स्थिति : चेयरमैन अंतिम बर्खास्तगी का आदेश आने तक नाममात्र के लिए अपने पद पर बने रहते हैं, लेकिन उनके पास कोई कार्यकारी शक्ति नहीं होती। शासन द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस का चेयरमैन को निर्धारित समय सीमा में जवाब दाखिल करना होता है।


कानूनी विकल्प :
चेयरमैन अधिकार सीज करने के सरकारी आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर सकते हैं। यदि कोर्ट प्रक्रियात्मक चूक या पर्याप्त आधार न होने पर आदेश पर स्टे लगा देता है तो चेयरमैन के अधिकार बहाल हो जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article