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Hathras News: स्कूल से पहले रास्तों पर इम्तिहान, खतरे में रहती नौनिहालों की जान
Sat, 25 Jul 2026 02:08 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 25 Jul 2026 02:08 AM IST
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स्कूल चले हम...गांव बरामई में कीचड़ से होकर स्कूल जाते बच्चे। संवाद
- फोटो : Samvad
जिले के परिषदीय विद्यालयों तक पहुंचने के मार्ग कीचड़युक्त, उबड़-खाबड़ और जोखिम भरे हैं। हाथों में बस्ता लिए, आंखों में बेहतर भविष्य के सपने संजोए बच्चे बदहाल और बदबूदार रास्तों से होकर स्कूल आते-जाते हैं। सादाबाद और सहपऊ क्षेत्रों के बदहाल रास्ते यह बताने के लिए काफी हैं कि ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचा किस कदर ध्वस्त और जिम्मेदार बेपरवाह हैं।
जिले में कुल 1,235 परिषदीय विद्यालय हैं जिनमें करीब 1.10 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से करीब 30 फीसदी यानी 370 विद्यालयों के रास्ते खराब हैं। लगभग 30 हजार बच्चे रोजाना स्कूल आने-जाने की चुनौती से जूझते हैं।
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सीन-1 बरामई
20 साल पुराना दर्द, एक किमी का दलदल
सादाबाद क्षेत्र का बरामई गांव पिछले दो दशकों से विकास की बाट जोह रहा है। यहां लगभग एक किलोमीटर लंबा बाईपास मार्ग पिछले 20 वर्षों से कच्चा पड़ा हुआ है।
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समस्या: बारिश आते ही यह कच्चा रास्ता गहरे गड्ढों, जलभराव और जानलेवा दलदल में तब्दील हो जाता है। मार्ग से रोजाना 165 छात्र-छात्राएं और सैकड़ों ग्रामीण गुजरते हैं। यह मार्ग बरामई को अलिया और जंगला गांव से भी जोड़ता है। एक निजी विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चे भी इसी रास्ते से होकर जाते हैं। फिसलन के कारण कई मासूम गिरकर चोटिल हो चुके हैं। खेत आने-जाने वाले किसान भी आए दिन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
गांव के पवन कुमार सारस्वत ने बताया कि दो दिन पहले बुधवार को एक बच्चा कीचड़ में फिसल गया था जिससे उसके कपड़े गंदे हो गए थे। साथियों की मदद से वह घर पहुंचा। उन्होंने बताया कि 20 साल से यह रास्ता कच्चा है। बच्चे आए दिन गिरकर जख्मी होते हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
सीन-2: बटपुरा (सहपऊ) तीन साल से बह रहा नाले का पानी
सहपऊ के गांव बटपुरा की स्थिति और भी नारकीय है। यहां पिछले तीन सालों से घरों से निकलने वाला गंदा पानी
मुख्य रास्ते पर बह रहा है। यह रास्ता श्रीमती उज्ज्वल इंटर कॉलेज और प्राथमिक विद्यालय बटपुरा दोनों के लिए है।
समस्या : इंटर कॉलेज के 650 विद्यार्थी और प्राथमिक विद्यालय के 70 बच्चे इसी मार्ग से गुजरते हैं। गंदे पानी
से गुजरने के कारण यहां हादसे व बीमारी का खतरा बना हुआ है। स्कूल ड्रेस खराब होना यहां आम बात है। कई बार छोटे बच्चे गंदे और बदबूदार पानी
में फिसलकर घायल हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं।
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सीन-3
परिसर में घुसता है नाले का पानी
हाथरस जंक्शन क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय देवी नगर के भी हालात खराब हैं। यहां नाले का पानी स्कूल परिसर में घुस जाता है। इस गंदे पानी में ईंटों से बने रास्ते पर पैर रखकर बच्चे कूंदते-फांदते निकलते हैं। बारिश के समय अधिक समस्या होती है जब पूरी गली में पानी होता है। हालांकि विद्यालय प्रबंधन ने दीवार लगाकर नाले का पानी रोका है लेकिन बारिश का पानी गली में भरने से बच्चों को स्कूल तक आने में दिक्कत होती है।
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जिम्मेदारों की बात
लगभग सभी विद्यालयों के मार्ग सुगम बनाए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ जगहों पर अभी भी दिक्कतें हैं। वहां के मार्ग भी ठीक कराने के लिए संबंधित विभागों से संपर्क कर प्रयास किए जा रहे हैं। जहां-जहां समस्या है उसे जल्द ही दूर कराया जाएगा।
रणवीर सिंह, बीएसए
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जिले में कुल 1,235 परिषदीय विद्यालय हैं जिनमें करीब 1.10 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से करीब 30 फीसदी यानी 370 विद्यालयों के रास्ते खराब हैं। लगभग 30 हजार बच्चे रोजाना स्कूल आने-जाने की चुनौती से जूझते हैं।
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सीन-1 बरामई
20 साल पुराना दर्द, एक किमी का दलदल
सादाबाद क्षेत्र का बरामई गांव पिछले दो दशकों से विकास की बाट जोह रहा है। यहां लगभग एक किलोमीटर लंबा बाईपास मार्ग पिछले 20 वर्षों से कच्चा पड़ा हुआ है।
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समस्या: बारिश आते ही यह कच्चा रास्ता गहरे गड्ढों, जलभराव और जानलेवा दलदल में तब्दील हो जाता है। मार्ग से रोजाना 165 छात्र-छात्राएं और सैकड़ों ग्रामीण गुजरते हैं। यह मार्ग बरामई को अलिया और जंगला गांव से भी जोड़ता है। एक निजी विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चे भी इसी रास्ते से होकर जाते हैं। फिसलन के कारण कई मासूम गिरकर चोटिल हो चुके हैं। खेत आने-जाने वाले किसान भी आए दिन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
गांव के पवन कुमार सारस्वत ने बताया कि दो दिन पहले बुधवार को एक बच्चा कीचड़ में फिसल गया था जिससे उसके कपड़े गंदे हो गए थे। साथियों की मदद से वह घर पहुंचा। उन्होंने बताया कि 20 साल से यह रास्ता कच्चा है। बच्चे आए दिन गिरकर जख्मी होते हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
सीन-2: बटपुरा (सहपऊ) तीन साल से बह रहा नाले का पानी
सहपऊ के गांव बटपुरा की स्थिति और भी नारकीय है। यहां पिछले तीन सालों से घरों से निकलने वाला गंदा पानी
मुख्य रास्ते पर बह रहा है। यह रास्ता श्रीमती उज्ज्वल इंटर कॉलेज और प्राथमिक विद्यालय बटपुरा दोनों के लिए है।
समस्या : इंटर कॉलेज के 650 विद्यार्थी और प्राथमिक विद्यालय के 70 बच्चे इसी मार्ग से गुजरते हैं। गंदे पानी
से गुजरने के कारण यहां हादसे व बीमारी का खतरा बना हुआ है। स्कूल ड्रेस खराब होना यहां आम बात है। कई बार छोटे बच्चे गंदे और बदबूदार पानी
में फिसलकर घायल हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं।
सीन-3
परिसर में घुसता है नाले का पानी
हाथरस जंक्शन क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय देवी नगर के भी हालात खराब हैं। यहां नाले का पानी स्कूल परिसर में घुस जाता है। इस गंदे पानी में ईंटों से बने रास्ते पर पैर रखकर बच्चे कूंदते-फांदते निकलते हैं। बारिश के समय अधिक समस्या होती है जब पूरी गली में पानी होता है। हालांकि विद्यालय प्रबंधन ने दीवार लगाकर नाले का पानी रोका है लेकिन बारिश का पानी गली में भरने से बच्चों को स्कूल तक आने में दिक्कत होती है।
जिम्मेदारों की बात
लगभग सभी विद्यालयों के मार्ग सुगम बनाए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ जगहों पर अभी भी दिक्कतें हैं। वहां के मार्ग भी ठीक कराने के लिए संबंधित विभागों से संपर्क कर प्रयास किए जा रहे हैं। जहां-जहां समस्या है उसे जल्द ही दूर कराया जाएगा।
रणवीर सिंह, बीएसए