{"_id":"7-12917","slug":"Hathras-12917-7","type":"story","status":"publish","title_hn":"इलाज में कोताही पर भड़के मरीज, हंगामा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इलाज में कोताही पर भड़के मरीज, हंगामा
Hathras
Updated Fri, 03 May 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाथरस। बागला जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की बुधवार की रात को एक बार फिर पोल खुल गई। गांव लहरा में फूड प्वाइजनिंग के शिकार मरीज बड़ी संख्या में जब जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां उन्हें संभालने के लिए पर्याप्त स्टाफ तक मौजूद नहीं था। एकमात्र चिकित्साधिकारी और कुछ चिकित्सा कर्मी ही इन मरीजों के इलाज के लिए जूझते नजर आए, जिससे वहां अव्यवस्था फैल गई। पूरे अस्पताल परिसर में हायतौबा मची रही। चिकित्सा कर्मी और मरीजों के तीमारदार हड़बड़ी में इधर से उधर दौड़ रहे थे।
कई मरीजों को लगातार उल्टी-दस्त हो रहे थे, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा था। उनकी बिगड़ती हालत देखकर एकबारगी तो उनके तीमारदारों का गुस्सा ही फूट पड़ा और वह आगरा-अलीगढ़ रोड पर जाम लगाने को भी तैयार हो गए। डॉक्टर और अन्य स्टाफ से भी इन लोगों की नोक-झोंक हुई, जिससे अस्पताल में अच्छा-खासा हंगामा खड़ा हो गया। कुछ समझदार लोगों ने जैसे-तैसे इन लोगों को समझाकर ऐसा करने से रोका। चिकित्सक और ड्यूटी स्टाफ ने भी इन्हें समझाया कि इलाज में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। बस, वह धैर्य बनाए रखें। बाद में सूचना मिलने पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएम सिंह भी अन्य स्टाफ के साथ वहां पहुंच गए। मरीजों का इलाज युद्ध स्तर पर शुरू किया गया। फिर सबने मिलकर जैसे-तैसे स्थिति संभाली। पूरी रात अस्पताल का इमरजेंसी परिसर मरीजों की भीड़ से पटा रहा और मरीजों कराहट से गूंजता रहा। सुबह जब ज्यादातर मरीजों की छुट्टी हो गई। तब वहां स्थिति सामान्य हो सकी।
विज्ञापन
कई मरीजों को लगातार उल्टी-दस्त हो रहे थे, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा था। उनकी बिगड़ती हालत देखकर एकबारगी तो उनके तीमारदारों का गुस्सा ही फूट पड़ा और वह आगरा-अलीगढ़ रोड पर जाम लगाने को भी तैयार हो गए। डॉक्टर और अन्य स्टाफ से भी इन लोगों की नोक-झोंक हुई, जिससे अस्पताल में अच्छा-खासा हंगामा खड़ा हो गया। कुछ समझदार लोगों ने जैसे-तैसे इन लोगों को समझाकर ऐसा करने से रोका। चिकित्सक और ड्यूटी स्टाफ ने भी इन्हें समझाया कि इलाज में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। बस, वह धैर्य बनाए रखें। बाद में सूचना मिलने पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएम सिंह भी अन्य स्टाफ के साथ वहां पहुंच गए। मरीजों का इलाज युद्ध स्तर पर शुरू किया गया। फिर सबने मिलकर जैसे-तैसे स्थिति संभाली। पूरी रात अस्पताल का इमरजेंसी परिसर मरीजों की भीड़ से पटा रहा और मरीजों कराहट से गूंजता रहा। सुबह जब ज्यादातर मरीजों की छुट्टी हो गई। तब वहां स्थिति सामान्य हो सकी।
विज्ञापन