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Hathras News: दस्तावेजों में नहीं मिल रहीं 80 फीसदी वक्फ संपत्तियां

Fri, 05 Dec 2025 02:27 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Fri, 05 Dec 2025 02:27 AM IST
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80% of Waqf properties are missing from the documents.
विकास भवन। संवाद - फोटो : samvad
जिले में वक्फ संपत्तियों का पूरा ब्योरा ‘उम्मीद पोर्टल’ पर अपलोड करने की प्रक्रिया अभी तक सुचारू रूप से नहीं चल पा रही। काम पूरा करने की निर्धारित समय सीमा पांच दिसंबर है, लेकिन करीब 80 फीसदी वक्फ संपत्तियों के जरूरी दस्तावेज अभी तक बोर्ड से नामित जिला समन्वयकों को उपलब्ध नहीं हो सके हैं और न ही फीड हो सके हैं।
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जिले में वक्फ बोर्ड की दफा 37 के तहत 490 संपत्तियां दर्ज हैं, लेकिन इनके स्वामित्व, सीमांकन, किरायेदारी, प्रबंधन और कब्जे से संबंधित मूल अभिलेख बड़ी संख्या में उपलब्ध नहीं हो रहे। इस कारण पोर्टल पर पूर्ण विवरण अपलोड करने में समस्या बनी हुई है।
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इधर, अंतिम तिथि नजदीक आते ही मुतवल्लियों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। मुतवल्लियों का कहना है कि दशकों पुराने कागजात एकत्रित करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण संपत्तियों का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। मुतवल्ली दस्तावेज जुटाने के लिए तहसील और वक्फ बोर्ड सहित अन्य प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।
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हैरानी की बात यह है कि जिले में अभी तक महज 20 फीसदी ही संपत्तियां पंजीकृत हो सकी हैं, जबकि उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के नाम, क्षेत्रफल, उपयोग, किरायेदारी और विवादित मामलों का पूरा ब्योरा दर्ज करना अनिवार्य है, लेकिन दस्तावेजों के अभाव में यह प्रक्रिया समय सीमा के भीतर पूरी होना मुश्किल दिख रही है। जिला समन्वयक राजा ने बताया कि जमीनों के दस्तावेज पूर्ण रूप से नहीं मिल पा रहे हैं। यहां की संपत्ति अलीगढ़ जिले में दर्ज चल रही हैं। अभी महज 15-20 फीसदी ही ब्योरा अपलोड हो पाया हे।

जिला समन्वयक कर रहे लगातार संपर्क

शासन स्तर से वक्फ संपत्तियों का ब्योरा अपलोड कराने के लिए जिले में दो समन्वयक नामित किए हैं। समन्वयक राजा एवं अयूब वक्फ संपत्तियों के मुतवल्ली और प्रबंधकों से लगातार संपर्क कर रहे हैं। उनसे पुराने अभिलेख, नक्शे, रजिस्टर, रसीदें और कोर्ट से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। अधिकतर मुतवल्लियों के पास रिकॉर्ड अधूरा है या वर्षों पुराने कागज नष्ट हो चुके हैं। कई मामलों में दस्तावेजों का कोई अता–पता नहीं मिल रहा है।


अलीगढ़ जिले में दर्ज दिख रहीं हाथरस की संपत्तियां

बड़ा तकनीकी पहलू यह भी है कि वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में हाथरस की सभी संपत्तियां आज भी अलीगढ़ जिले के खाते में दर्ज हैं। जिले के पुनर्गठन के बाद भी इन प्रविष्टियों को अपडेट नहीं किया गया है। इस कारण लेखा एवं अभिलेख प्रबंधन में गड़बड़ी हो रही है। मुतवल्ली वक्फ बोर्ड से अलीगढ़ जिले के नाम से ही जिले की वक्फ संपत्तियों का ब्योरा एकत्रित कर पा रहे हैं।

अभिलेख ढूंढ़ने में दिक्कत आ रही है। अलीगढ़ में वक्फ बोर्ड का कार्यालय है। हाथरस में कार्यालय न होने की वजह से बहुत दिक्कत हो रही है। यहां के दस्तावेजों का ब्योरा लेने के लिए अलीगढ़ की दौड़ लगानी पड़ रही है।

-नईमुद्दीन, मौलवी।

दशकों पुरानी संपत्ति हैं, जमीनों के दस्तावेज नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण पोर्टल पर डाटा फीड नहीं हो पा रहा है। हमें खुद संपत्तियों का ब्योरा खोजने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
नदीम हुसैन बरकाती, मौलवी।

यह डाटा होना है फीड
जमीन के दस्तावेज, किरायेदार हैं तो उनका ब्योरा, उनसे मिलने वाले किराये की जानकारी, किरायेदारों पर मुकदमा होने संबंधी ब्योरा।
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