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42 दिन बाद सराफा बाजार में लौटी रौनक
हाथरस/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Apr 2016 12:15 AM IST
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हाथरस। सराफा व स्वर्णकार कारोबार पर केंद्र सरकार द्वारा एक प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगाए जाने के विरोध में 42 दिन तक चली हड़ताल के बाद बुधवार को सभी सराफा व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान खोल लिए। इसको लेकर सराफा बाजार में काफी रौनक रही।
सहालग शुरू होेने वाले हैं। ऐसे में सोने-चांदी के आभूषण खरीदने वालों की भी दुकानों पर भीड़ रही। घरों में जिनके आभूषणों में टूट-फूट हो गई थी, उन्होंने भी दुकानें खुलने पर अपने आभूषणों की मरम्मत कराई। केंद्र सरकार के खिलाफ 42 दिन तक अपनी दुकानें बंद रखकर हड़ताल करने वाले कई व्यापारियों से हड़ताल के दौरान हुए नुकसान के संबंध में जानकारी करनी चाही तो व्यापारी यही कहने लगे कि किसी को पांच हजार, किसी को 10 से 15 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक इन 40 दिनों में सराफा बाजार को दो से ढाई करोड़ की चपत लगी है। अरसे बाद यह पहला मौका है, जब किसी कारोबार की इतनी लंबी हड़ताल रही है। एक महीने से भी ज्यादा समय तक कारोबार बंद रहने से इनसे जुड़े मजदूर, कारीगर और कर्मचारियों के सामने भी गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी। बुधवार को दुकानें खुलने से उनके चेहरों पर भी चमक दिखाई दी। बता दें कि सराफा और स्वर्णकार व्यापार से शहर में लगभग 250 व्यापारी व मजदूर जुड़े हुए हैं।
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सहालग शुरू होेने वाले हैं। ऐसे में सोने-चांदी के आभूषण खरीदने वालों की भी दुकानों पर भीड़ रही। घरों में जिनके आभूषणों में टूट-फूट हो गई थी, उन्होंने भी दुकानें खुलने पर अपने आभूषणों की मरम्मत कराई। केंद्र सरकार के खिलाफ 42 दिन तक अपनी दुकानें बंद रखकर हड़ताल करने वाले कई व्यापारियों से हड़ताल के दौरान हुए नुकसान के संबंध में जानकारी करनी चाही तो व्यापारी यही कहने लगे कि किसी को पांच हजार, किसी को 10 से 15 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक इन 40 दिनों में सराफा बाजार को दो से ढाई करोड़ की चपत लगी है। अरसे बाद यह पहला मौका है, जब किसी कारोबार की इतनी लंबी हड़ताल रही है। एक महीने से भी ज्यादा समय तक कारोबार बंद रहने से इनसे जुड़े मजदूर, कारीगर और कर्मचारियों के सामने भी गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी। बुधवार को दुकानें खुलने से उनके चेहरों पर भी चमक दिखाई दी। बता दें कि सराफा और स्वर्णकार व्यापार से शहर में लगभग 250 व्यापारी व मजदूर जुड़े हुए हैं।
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